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चित्रकूट में फिल्म स्टारों के नाम पर बिकते हैं गधे:औरंगजेब के जमाने से लगता आ रहा यह मेला, गधे-खच्चरों की बोली लगती है यहां

चित्रकूट3 महीने पहले
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चित्रकूट में औरंगजेब के जमाने से लगता आ रहा है गधा मेला।

चित्रकूट जिले में दीपदान मेले का आज चौथा दिन है। दीपदान मेले में दिवाली के दूसरे दिन मंदाकिनी नदी के किनारे ऐतिहासिक गधा मेला लगता है। यह मेला औरंगजेब के जमाने से लग रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत अलग-अलग प्रांतों के व्यापारी गधों को बेचने और खरीदने आते हैं। गधों का नाम फिल्मी सितारों पर रखा जाता है, जिसमें अमिताभ बच्चन, सलमान, शाहरुख आदि के नामों की बोली लगती है। लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस मेले को देखने पहुंचते हैं।

कई राज्यों से व्यापारी मेले में गधा लेकर पहुंचते हैं।
कई राज्यों से व्यापारी मेले में गधा लेकर पहुंचते हैं।

दिवाली के दूसरे दिन लगने वाले गधा मेले में रौनक है। मंदाकिनी नदी के किनारे हजारों की संख्या में गधों और खच्चरों का मेला लगा है, जिसकी बाकायदा नगर पंचायत ने व्यवस्था की है। मेले में देश के कोने-कोने से गधा व्यापारी अपने पशुओं के साथ आए हैं.

औरंगजेब के समय से चली आ रही परंपरा

मंदाकिनी नदी के किनारे लगने वाले इस मेले की परंपरा बहुत पुरानी है। इस​ मेले की शुरुआत मुगल बादशाह औरंगजेब ने की थी। औरंगजेब ने चित्रकूट के इसी मेले से अपनी सेना के बेड़े में गधों और खच्चरों को शामिल किया था। इसलिए इस ​मेले का ऐतिहासिक महत्व है। इस मेले में एक लाख तक के गधे बिकते हैं।

गधा मेले में लाखों में बिकते हैं गधे।
गधा मेले में लाखों में बिकते हैं गधे।

सुविधाओं का है टोटा

मुगल काल से चली आ रही ये परंपरा सुविधाओं के अभाव में अब लगभग खात्मे की कगार पर है। नदी के किनारे भीषण गंदगी के बीच लगने वाले इस मेले में व्यापारियों को न तो पीने का पानी मुहैया होता है, और न ही छाया। दो दिवसीय गधा मेले में सुरक्षा के नाम पर होमगार्ड तक के जवान नहीं लगाए जाते। वहीं व्यापारियों के जानवर बिकें या न बिकें ठेकेदार उनसे पैसे वसूल लेते हैं। ऐसी हालत में यह ऐतिहासिक गधा मेला अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। धीरे-धीरे व्यापारियों का आना कम हो रहा है।

सकरे रास्तों में सामान पहुंचाने के काम आते हैं गधे

गधा मेले में व्यापारी एसपी के सतना, रीवा, शहडोल, अनूपपुर, कटनी और छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, रायपुर रायगढ़ और कोरिया जिले से आते हैं। वहीं यूपी की बात करें तो हमीरपुर, बांदा, जालौन और झांसी से व्यापारी आते हैं। मेले में आए व्यापारी हरिश्चंद्र ने बताया कि गधे सकरे रास्तों में आसानी से काम कर सकते हैं। मकान बनवाते समय जिन रास्तों में ट्रक, ट्रैक्टर सामान लेकर नहीं जा पाते, वहां सामान ढोने के काम में गधे ही आते हैं। व्यापारी हरिश्चंद्र ने बताया कि मकान की मिट्टी हटाने या डालने के काम में गधों का उपयोग किया जाता है। यही वजह है कि इनकी खरीद-फरोख्त ज्यादा बढ़ गई है।

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