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चित्रकूट में संत समाज में आक्रोश:कामदगिरी पर्वत के ऊपर बनाया गया था परिक्रमा मार्ग, विरोध के बाद बैकफुट में प्रशासन

चित्रकूटएक वर्ष पहले
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प्रशासन ने कामदगिरी पर्वत के ऊपर परिक्रमा मार्ग बनाया था। - Money Bhaskar
प्रशासन ने कामदगिरी पर्वत के ऊपर परिक्रमा मार्ग बनाया था।

चित्रकूट में संत समाज में आक्रोश है। प्रशासन ने कामदगिरी पर्वत के ऊपर परिक्रमा मार्ग बनाया था। संत समाज के विरोध के बाद जिला प्रशासन बैकफुट में आ गया है। जिसके बाद पहली की तरह ही श्रद्धालु परिक्रमा करेंगे। दीपावली मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ को परिक्रमा पर नियंत्रण करने के लिए भरत मिलाप मंदिर के पास से कामदगिरि पर्वत की ओर बाइपास मार्ग बनाया गया है। जिससे संत समाज आक्रोशित है।

हिंदू संगठन बजरंग दल एवं समाजसेवी और संत समाज ने मंगलवार को धरना देकर राम नाम संकीर्तन कर विरोध किया। बता दें, धर्म नगरी चित्रकूट में उप्र का सबसे बड़ा मेला दीपदान माना जाता है, जहां पर लगभग 5000000 श्रद्धालु आने की संभावना है।

पूजा यादव ने कहा कि यहां से परिक्रमा नहीं निकाला जा रहा है। सिर्फ साफ-सफाई कराई गई है।
पूजा यादव ने कहा कि यहां से परिक्रमा नहीं निकाला जा रहा है। सिर्फ साफ-सफाई कराई गई है।

एसडीएम बोलीं- सिर्फ साफ-सफाई कराई गई

संतों के धरने में बैठने की जानकारी पर सदर एसडीएम पूजा यादव मौके पर पहुंचीं। उन्होंने संतों से बात की। पूजा यादव ने कहा कि यहां से परिक्रमा नहीं निकाला जा रहा है। सिर्फ साफ-सफाई कराई गई है। उधर, संतों ने कहा कि हमारे आस्था के ऊपर खिलवाड़ किया जा रहा है।

सनकादिक महाराज ने कहा कि कहीं दूसरी जगह से प्रशासन व्यवस्था करे। यहां से हम परिक्रमा नहीं निकलने देंगे।
सनकादिक महाराज ने कहा कि कहीं दूसरी जगह से प्रशासन व्यवस्था करे। यहां से हम परिक्रमा नहीं निकलने देंगे।

हम जब तक इस पद पर बैठे रहेंगे, तब तक यहां से परिक्रमा नहीं करने दी जाएगी। विश्व हिंदू परिषद एवं चित्रकूट संत समाज के सैकड़ों व्यक्ति बैठ कर धरना दिया। जब प्रशासन ने उनकी बात मानी तो धरना समाप्त कर दिया गया।

भरत मिलाप मंदिर के पास से कामदगिरि पर्वत की ओर बाइपास मार्ग बनाया गया है।
भरत मिलाप मंदिर के पास से कामदगिरि पर्वत की ओर बाइपास मार्ग बनाया गया है।

सनकादिक महाराज बोले- दूसरी जगह से व्यवस्था करे प्रशासन

सनकादिक महाराज ने कहा कि कहीं दूसरी जगह से प्रशासन व्यवस्था करे। यहां से हम परिक्रमा नहीं निकलने देंगे। जिस भगवान की हम पूजा करते हैं, उसी के सिर से चढ़कर जाएं, यह अच्छा नहीं है। प्रशासन को अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर चुका था। साफ सफाई एवं मिट्टी भी डलवाई जा रही थी, तभी संतों को पता चला तो वह विरोध पर उतर आए।