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चित्रकूट में 50 लाख श्रद्धालु करेंगे दीप दान:दिवाली पर रंग-बिरंगी लाइट से जगमगा उठेंगे घाट और मंदिर, 5 दिनों तक दिखेगा अद्भुत नजारा

चित्रकूट6 महीने पहलेलेखक: जितेंद्र कुमार मिश्रा
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चित्रकूट में दीपदान मेले की शुरुआत हो गई। रंग बिरंगी लाइट से घाटों को सजाया जाने लगा है। रात में इसकी सुंदरता देखते ही बनती है। 5 दिवसीय इस मेले में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के अलावा विदेशों तक से श्रद्धालु आते हैं और दीपदान करते हैं। इस दौरान दीपों की रोशनी से घाट जगमगा उठते हैं। दिवाली में श्रद्धा और सजावट का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। एक तरफ श्रद्धालु उमड़ेंगे तो वहीं दूसरी ओर रंग बिरंगी लाइट और दीपों की रोशनी से चित्रकूट धाम नहा उठेगा।

इस साल श्रद्धालु की संख्या भी बढ़ रही है। करीब 50 लाख श्रद्धालुओं के दीप दान करने का अनुमान है। हर साल इतनी ही संख्या रहती थी, लेकिन दो साल में कोविड के दौरान संख्या कम रही थी। श्रद्धालु यहां मंदाकिनी के विभिन्न घाटों पर दीपदान कर भगवान कामतानाथ स्वामी के दर्शन करते हैं। दीवारों पर पेंटिंग के जरिए सुंदर-सुंदर चित्रों को उकेरा जा रहा है। इसके साथ ही, रंगाई पुताई और साफ-सफाई का भी काम चल रहा है।

घाटों की सुंदरता भी देखते ही बनती है। घाटों को सजाया जा रहा है। दीपदान के समय यह घाट रोशन हो उठेंगे। तैयारियां जोरों पर चल रहीं हैं।
घाटों की सुंदरता भी देखते ही बनती है। घाटों को सजाया जा रहा है। दीपदान के समय यह घाट रोशन हो उठेंगे। तैयारियां जोरों पर चल रहीं हैं।
मंदिर परिसर में साफ-सफाई के साथ-साथ रंगाई पुताई का काम भी हो रहा है।
मंदिर परिसर में साफ-सफाई के साथ-साथ रंगाई पुताई का काम भी हो रहा है।

क्या है महत्व
भगवान श्री राम के चित्रकूट आने की खुशी में लोगों ने सबसे पहले यहीं पर दीप जलाकर दीपावली मनाई थी। श्रद्धालु चित्रकूट आकर दीपदान करते हैं। इसके अलावा भगवान राम ने चित्रकूट में ही भाई लक्ष्मण, माता जानकी के साथ वनवास काल के 14 वर्षों में 11 साल 11 महीना 11 दिन बिताए थे।

लंका से विजय प्राप्त करके चित्रकूट से भगवान राम अयोध्या चले गए। लेकिन चित्रकूट के आदिवासी कोलभील (जनजाति)और संत-महंत कई दिनों तक राम की विजय और वनवास खत्म होने का उत्सव चित्रकूट में मनाते रहे हैं। आज भी लोग अपने घर से आकर दीपदान करते हैं।

पेंटिंग के जरिए भी सुंदर-सुंदर चित्रों को उकेरा गया है। इसे एक टक लोग देखने को बाध्य हो जाएंगे। सुंदर कलाकृति दर्शायी गई है।
पेंटिंग के जरिए भी सुंदर-सुंदर चित्रों को उकेरा गया है। इसे एक टक लोग देखने को बाध्य हो जाएंगे। सुंदर कलाकृति दर्शायी गई है।

गाय के गोबर से बनते हैं दीपक
गाय के गोबर से बने दीपक वजन में बेहद हल्के होने की वजह से कई घंटों तक पानी में तैरते रहते हैं। पानी में घुलने के बाद दीपक का गोबर जब नदी में जाएगा तो जलीय पौधों के लिए खाद का काम करेगा और इससे जीव-जंतुओं को किसी प्रकार की समस्या भी नहीं होगी।

जिला प्रशासन ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गए ऐसे दीपों को बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराया है। इस बार चित्रकूट में दीपदान के लिए आने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में इन दीपों का प्रयोग करेंगे। गोबर से बने इन दीप का प्रयोग से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा।

चित्रकूट धाम कर्वी रेलवे स्टेशन की बाउंड्री वॉल पर प्रशासन की ओर से कई प्रकार के चित्र बनवाए गए हैं।
चित्रकूट धाम कर्वी रेलवे स्टेशन की बाउंड्री वॉल पर प्रशासन की ओर से कई प्रकार के चित्र बनवाए गए हैं।

इस तरह रहेगी सुरक्षा
रामघाट, परिक्रमा मार्ग समेत प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जाएगी। जगह-जगह कैमरे लगा दिए गए हैं। इसके साथ ही, मंदाकिनी नदी तट पर गोताखोर, मोटर बोट के साथ ही पुलिस भी रहेगी। वहीं, वाट्सऐप ग्रुप पर भी विशेष तौर पर तकनीकी टीम नजर रखेगी।

रंग बिरंगी लाइट आकर्षण का केंद्र हैं। इनसे अलग-अलग तरह की आकृतियां बनाई गई हैं। ताकि लोग आकर्षित हो सकें।
रंग बिरंगी लाइट आकर्षण का केंद्र हैं। इनसे अलग-अलग तरह की आकृतियां बनाई गई हैं। ताकि लोग आकर्षित हो सकें।

ये रहेगा आकर्षण का केंद्र
पांच दिवसीय दीपदान मेले में बुंदेलखंड के प्रसिद्ध लोकनृत्य दिवारी की धूम रहेगी। दिन दिवारी नृत्य से पूरा मेला क्षेत्र मयूरी की तरह प्रतीत होगा। इसके अलावा मुनियों की टोली मोर पंख और लाठी के साथ नृत्य करती जगह-जगह नजर आएंगी। दिवाली नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन भी होगा। यह बुंदेलखंड का सबसे प्राचीन लोक नृत्य है।

कोरोना के चलते श्रद्धालु कम आ रहे थे, लेकिन इस साल करीब 50 लाख श्रद्धालु आएंगे। इसे लेकर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
कोरोना के चलते श्रद्धालु कम आ रहे थे, लेकिन इस साल करीब 50 लाख श्रद्धालु आएंगे। इसे लेकर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
पानी के फव्वारे को भी आकर्षण का केंद्र बनाया गया है। यह फाउंटेन बेहद ही सुंदर लग रहा है। रात से समय अद्भुत नजारा होता है।
पानी के फव्वारे को भी आकर्षण का केंद्र बनाया गया है। यह फाउंटेन बेहद ही सुंदर लग रहा है। रात से समय अद्भुत नजारा होता है।

गधा मेले में होती जमकर खरीदारी
दीपावली पर चित्रकूट में विशाल गधा मेला भी लगता है। मंदाकिनी तट पर गधा मेला में अलग-अलग राज्यों से लोग पहुंचते हैं। 5 दिन में करोड़ों रुपये के गधों की खरीद-बिक्री होती है। प्रशासन की ओर से इसकी तैयारियां कर ली गई है।

लेजर शो का एक अलग ही नजारा देखने को मिलेगा। लगातार आकृतियां बदलती रहेंगी। माता सीता की भी खूबसूरत आकृति दिखाई जाएगी।
लेजर शो का एक अलग ही नजारा देखने को मिलेगा। लगातार आकृतियां बदलती रहेंगी। माता सीता की भी खूबसूरत आकृति दिखाई जाएगी।
ओम की मनभावन आकृतियों जैसी कई आकृतियों का अद्भुत नजारा प्रस्तुत करेंगी।
ओम की मनभावन आकृतियों जैसी कई आकृतियों का अद्भुत नजारा प्रस्तुत करेंगी।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम में मेले में पुलिस उपाधीक्षक 16, प्रभारी निरीक्षक 14, 18 उपनिरीक्षक, 206 महिला उपनिरीक्षक, 12 हेड कांस्टेबल एवं कांस्टेबल, 670 महिला हेड कांस्टेबल, 70 निरीक्षक एवं उप निरीक्षक, 8 हेड कांस्टेबल एवं कांस्टेबल 40 उपनिरीक्षक लगाए कम गए हैं।

लेजर लाइट के जरिए देवी देवताओं की आकृति को बनाया गया है। खासतौर पर राम, लक्ष्मण और सीता की आकृति दिखाई जा रही है।
लेजर लाइट के जरिए देवी देवताओं की आकृति को बनाया गया है। खासतौर पर राम, लक्ष्मण और सीता की आकृति दिखाई जा रही है।
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