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स्याना के आमों पर मौसम की मार:इस बार 'आम' आदमी की पहुंच से दूर रहेगा, मौसम बदलाव के कारण कमजोर हुई फसल

स्यानाएक महीने पहले
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फलों का बादशाह कहा जाने वाला आम इस बार आम आदमी की पहुंच से दूर रहेगा। बड़े शहरों से लेकर विदेशों में धूम मचाने वाले स्याना फल पट्टी क्षेत्र की मशहूर दशहरी, लंगड़ा और चौसा आम की फसल पर इस बार समय से पहले तापमान बढ़ने के कारण संकट के बादल छाए हैं। शरद ऋतु के तुरंत बाद मौसम में बदलाव होने के कारण आम की फसल कमजोर हो गई है।

स्याना फल पट्टी क्षेत्र के आम बागानों में जमकर बोर आने के बावजूद फल नहीं बन सके हैं। मार्च और अप्रैल महीने में तापमान अधिक बढ़ जाने के कारण इसका असर आम बागानों पर पड़ा है। समय से पहले ही अधिक गर्मी होने के कारण बोर का परागण नहीं हो सका है।

मित्र कीटों ने बौर से दूरी बनाई
दरअसल, तापमान अधिक होने के कारण परागण कराने में सहायक मित्र कीटों ने बौर से दूरी बनाए रखी, जिसका असर फसल पर पड़ा। परागण नहीं होने के कारण बौर में अंडा नहीं पड़ा जिससे फलों का विकास ही नहीं हुआ है। फल पट्टी क्षेत्र में मात्र 30 से 35 प्रतिशत फसल होने का अनुमान है। फसल के कमजोर होने के कारण आम उत्पादकों से लेकर व्यापारी और आढ़ती दुविधा में है। देश के बड़े शहरों और विदेश से आम की भारी मांग होने के बावजूद अभी तक कोई अनुबंध नहीं हुआ है।

चिंतित हैं फल पट्टी क्षेत्र के आम उत्पादक
स्याना फल पट्टी क्षेत्र में फसल कमजोर रहने के कारण आम उत्पादक भारी चिंता में हैं। साल भर कड़ी मेहनत और खर्च करने के बाद भी मात्र 35 से 40 प्रतिशत फसल होने का अनुमान है। जिले के बड़े आम उत्पादक व प्रगतिशील किसान केदारनाथ त्यागी, आफाक उर्र रहीम खान, सीताराम अग्रवाल, चौधरी ऋषि पाल सिंह आदि ने बताया कि इस बार कमजोर है । आम बागानों में मात्र 35 से 40 प्रतिशत फसल बची है।

दुविधा में कंपनी, आम निर्यात करने के लिए नहीं हुआ अनुबंध
स्याना फल पट्टी क्षेत्र से गत वर्षो में हजारों कुंतल आम जापान और अन्य देशों में निर्यात हुआ है। लेकिन फसल के कमजोर रहने के कारण इस बार आम एक्सपोर्टर दूरी बनाए हुए हैं।

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