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8 परिवारों ने दवा खाने से किया था इंकार:बस्ती में फायदा बताया तो फाइलेरिया की दवा खाने को तैयार हो गए ग्रामीण

बस्तीएक महीने पहले
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बस्ती में विक्रमजोत ब्लॉक के शंकरपुर गांव में 8 परिवारों ने फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने से इंकार कर दिया था, लेकिन जब स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के फायदे गिनाए तो वह दवा खाने को तैयार हो गए।

12 मई से चलाए जा रहे मॉस ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम के तहत आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया की दवा डीईसी, पेट के कीड़े निकालने की दवा एल्बेंडाजोल का सेवन करा रही हैं। शंकरपुर की आशा कार्यकर्ता मंजू मौर्या का कहना है कि गांव के 8 परिवार ऐसे थे। जिन्होंने फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने से इनकार कर दिया था।

8 परिवारों ने किया था मना

उन्हें दवा खाने से दुष्प्रभाव का डर था। मंगलवार को आशा, एएनएम उषा रानी सिंह, स्वास्थ्य विभाग की सहयोगी संस्था प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल के एसएमसी आशीष कुमार सिंह गांव पहुंचे और परिवार के लोगों से संपर्क कर उन्हें फाइलेरिया से ग्रसित हाथीपांव के मरीजों की वीडियो, फोटो दिखाया।

बताया कि यह एक ऐसा मर्ज है जो एक बार हो जाने के बाद ठीक नहीं होता। जीवन दूभर हो जाता है। इसका प्रभाव आर्थिक, सामाजिक, मानसिक रूप से पड़ता है। साल में एक बार दवा का सेवन करने से फाइलेरिया रोग से बचाव होता है। टीम के समझाने के बाद गांव वाले खुशी-खुशी दवा खाने को तैयार हो गए।

फायदा बताने पर खाई दवा

गांव के चैतू मौर्या, रामशरण मौर्या, झिनका देवी, रामकुमार मिश्रा , मो. समीउल्लाह, कैथुलनिसा, मोहिउद्दीन, अब्दुल वहाब के परिवार के 64 लोगों ने टीम के सामने दवा का सेवन किया। कुदरहा ब्लॉक के माझाकला गांव में दवा खाने से इनकार करने वाले परिवार को एसएमसी प्रमेंद्र कुमार सिंह ने आशा की मदद से दवा खिलवाई।

जिला मलेरिया अधिकारी आईए अंसारी ने बताया कि जो लोग दवा खाने से इनकार कर रहे हैं, उन्हें दवा का महत्व बताया जा रहा है। विभाग का प्रयास है कि कोई भी परिवार दवा खाने से छूटने न पाए।

अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. एफ हुसैन ने बताया की 2 साल से कम उम्र बच्चों, गर्भवती व गंभीर बीमार लोगों को छोड़कर दवा सब के लिए सुरक्षित है।

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