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खुफिया इकाइयों को बांग्लादेशी महिला घुसपैठिया ने दिया चकमा:पति ने फर्जी कागजातों पर बनवाया पासपोर्ट, पुलिस ने दोनों को भेजा जेल

बरेली2 महीने पहले
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बरेली के अलीगंज में पकड़ी जाने वाली बांग्लादेशी घुसपैठिया महिला विंसी विवा उर्फ विनती और उसके पति समरेंद्र मंडल को पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि उसका पति मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। उसे विंसी के बांग्लादेशी होने की जानकारी थी।

फर्जी कागजात और दस्तावेज बनवाकर बरेली से पत्नी का भारतीय पासपोर्ट बनवाने में उसका भी हाथ था। इसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पड़ताल के दौरान सामने आया कि विंसी और उसका पति बरेली की स्थानीय पुलिस के साथ सभी खुफिया इकाइयों को भी चकमा देने में कामयाब रहा।

बांग्लादेश के सतखीरा जिला की है रहने वाली
पुलिस ने जब विंसी पर सख्ती की, तो उसने बताया कि वह मूल रूप से बांग्लादेश के सतखीरा जिला के श्यामनगर क्षेत्र के मुंशीपुर की रहने वाली है। उसकी नानी का घर पश्चिम बंगाल में था। वह बंग्लादेश के पासपोर्ट के जरिए भारत आई थी। उसके बाद वह बांग्लादेश वापस नहीं गई और बंगाल के ही रहने वाले समरेंद्र मंडल से शादी कर ली।

इसके बाद वह कुछ दिन तक बंगाल में रही। जब उसे पता चला कि पुलिस उसे खोज रही है, तो वह पति के साथ पश्चिम बंगाल से भाग निकली और बरेली में आकर बस गई।

बदायूं फिर आंवला, उसके बाद अलीगंज बना ठिकाना
पुलिस की पड़ताल में पता चला कि विंसी अपने पति समरेंद्र मंडल के साथ बदायूं पहुंची। वहां दवा आदि का काम शुरू किया। दोनों को बदायूं ठीक जगह नहीं लगी, तो दोनों बरेली आ गए और आंवला में अपना ठिकाना बनाया। कुछ महीने रहने के बाद दोनों अलीगंज थाने के पास मुहम्मद उमर के यहां किराए पर रहने लगे।

इस दौरान उसके दो बच्चे भी हो गए। विंसी ने अलीगंज में ही कुछ फर्जी कागजात बनवाकर अपना और पति के नाम पर वोटर आईडी कार्ड बनवाया। इसके बाद आधार कार्ड भी बनवा लिया। इसके बाद अलीगंज से ही हाईस्कूल की परीक्षा पास की और कुछ अन्य कागजात बनवाकर गलत तरीके से पासपोर्ट भी बनवा लिया।

बांग्लादेश में पिता से मिलने जाने का किया प्रयास
पुलिस ने जब विंसी से बांग्लादेश दोबारा जाने की बात पूछी, तो उसने बताया कि उसके पिता बांग्लादेश में ही है। उनके कहने पर ही वह भारत आ गई और यहां बस गई। वह पिता से मिलने के लिए परेशान थी। बांग्लादेश बॉर्डर पर वह पुलिस की चेकिंग में संदिग्ध मिलने पर पकड़ी गई थी। उसके बाद से छोड़ दिया गया लेकिन बॉर्डर पुलिस ने संदिग्ध और कागजात फर्जी होने की गोपनीय रिपोर्ट अलीगंज पुलिस को सौंप दी थी।

इसके बाद अलीगंज पुलिस ने विंसी मंडल को उठाया तो पता चला कि वह बांग्लादेशी घुसपैठिया है। इसी दौरान पता चला कि फर्जी कागजात और गलत तरीके से पासपोर्ट बनवाने में उसके पति का भी हाथ था। पुलिस ने उसका भी मुकदमे में नाम जोड़ दिया और दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

पुलिस से लेकर खुफिया विभाग पर उठे सवाल
बता दें कि पासपोर्ट आवेदन के दौरान जरूरी डॉक्यूमेंट्स की जांच सबसे पहले पुलिस करती है। अलीगंज पुलिस ने विंसी के कागजातों का वैरिफिकेशन किया। भौतिक सत्यापन पुलिस ने नहीं किया था। इसी तरह एलआईयू और इंटेलिजेंस विंग ने भी विंसी के कागजातों का लगाए गए डॉक्यूमेंट के आधार पर वैरिफिकेशन कर दिया।

अगर भौतिक सत्यापन किया गया होता, तो पासपोर्ट बनने के दौरान ही विंसी की पोल खुल जाती। इसके चलते अब पुलिस के साथ खुफिया ईकाइयों की कार्य प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

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