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रामसनेहीघाट में तेंदुए का आतंक:पारसोला गांव के युवक पर किया हमला, तीन दिन पहले दरियाबाद में देखा गया था

रामसनेही घाटएक महीने पहले
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तेंदुए के हमले के बाद घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीण - Money Bhaskar
तेंदुए के हमले के बाद घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीण

रामसनेहीघाट इलाके में तेंदुआ का आतंक बरकरार हैं।रविवार को उसने पारसोला गांव में खेतों में काम कर रहे युवक पर हमला कर दिया। जिससे वह गंभीर रुप से घायल हो गए। आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इलाके के जंगलों में तेंदुआ चार दिनों से घूम रहा है।इससे पहले वह इलाक़े के दरियाबाद गाँव में देखा गया था। जिससे क्षेत्रवासी डर के साए में जीने को मजबूर हैं। वन विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद वह उनकी पकड़ से दूर बना हुआ है।

दोबारा शुरू की गई कांबिग

रामसनेहीघाट के पारसोला गांव में मनोज रविवार को अपने खेतों में काम कर रहे थे। तभी अचानक तेंदुए ने उन पर हमला बोल दिया।उनके चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण इकट्ठा हो गए और लाठी डंडा लेकर तेंदुए की तलाश में जुट गए। इसके बाद घटना सूचना स्थानीय पुलिस और वन विभाग की टीम को दी गई ।वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। क्षेत्रीय वन अधिकारी मोहित श्रीवास्तव ने बताया कि तेंदुए की तलाश में दोबारा कांबिंग शुरू कर दी है। घटनास्थल पर पिंजरा लगाया गया है। वन विभाग की टीम उसकी निगरानी कर रही है। इसके साथ ही ग्रामीणों अकेले खेतों में न जाने की सलाह दी गई है।

चार दिन में 15 किमी दूर पहुंचा

तीन दिन पहले इलाके के दरियाबाद गाँव में तेंदुए के पैरों के निशान देखे गए थी।वहीं, कई ग्रामीणों ने उसे खेतों में देखने का दावा भी किया था। इसकी सूचना वन विभाग की टीम को भी दी गई थी। जिसके बाद टीम ने यहाँ कांबिग शुरू कर दी थी। लेकिन तीन दिन तक उसका कोई सुराग नहीं लगा। जिसके चलते दरियाबाद से कल तेंदुए को पकड़ने के लिए रखे गए पिंजरे भी हटा दिए गए थे। इसके बाद आज तेंदुआ दरियाबाद से लगभग 15 किलोमीटर दूर परसौल गांव में देखा गया।

डर के साए में जीने को मजबूर ग्रामीण

परसोला के ग्रमीणों का कहना है कि गाँव में तेंदुए की सूचना के बाद से वे डरे हुए हैं। ग्रामीण संदीप ने बताया कि इस समय पिपरमिंट की पैदावार का पीक सीजन है।गर्मी के दिनों में अगर फसल में पानी नहीं लगाया गया तो वह सूख जाएगी। लेकिन, गाँव में तेंदुआ होने की सूचना को बाद से खेतों में जाने से डर लग रहा है। ग्रामीण पुरोषोत्तम ने बताया कि इस बार गेहूं की पैदावार कम हुई है। जिससे भूसा भी पर्याप्त मात्रा में नहीं हुआ है। ऐसे में जानवरों के लिए करबी काटने खेतों पर जाना पड़ता है। लेकिन, तेंदुआ होने के बावजूद वहाँ जाना खतरे से खाली नहीं है।

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