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बबेरु में पुलिस अमानवीय बर्बरता की सभी हदें किया पार:अधिवक्ता के परिजनों के साथ किया मारपीट, जिसमें अधिवक्ता संघ ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

बबेरूएक महीने पहले
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ज्ञापन सौंपते हुए। - Money Bhaskar
ज्ञापन सौंपते हुए।

बबेरु तहसील बार एसोसिएशन ने बबेरू पुलिस द्वारा अमानवीय बर्बरता की सभी हदें पार कर दी। अधिवक्ता तथा उसके परिवार को झूठी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की जांच सीबी सीआईडी से जांच कराकर दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर निलंबित कर कानूनी कार्रवाई करने हेतु प्रदेश के मुख्यमंत्री से कार्यवाही किए जाने की मांग की है।

आरोप है की नोटिस तामील करने के बहाने करने लगे अभद्रता

तहसील बार एसोसिएशन बबेरू के अध्यक्ष राम शरण प्रजापति एडवोकेट व महासचिव रामचंद्र यादव एडवोकेट ने प्रदेश के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित पांच सूत्रीय ज्ञापन उप जिलाधिकारी को सौंपकर बताया कि बबेरू पुलिस द्वारा पूर्व नियोजित योजना के अनुसार चार पुलिसकर्मी सादी वर्दी में मौजा पंडरी निवासी केशव प्रसाद यादव एडवोकेट के घर पहुंच कर नोटिस तामील कराने के बहाने अभद्रता करने लगे। यहां तक बहू बेटियों बुजुर्ग महिलाओं को भी नहीं छोड़ा। इसी बात को लेकर गांव के तमाम लोग आ गए और कहासुनी होने लगी।

पुलिसकर्मी ने उक्त घटना का बहाना लेकर अधिवक्ता तथा अन्य परिजनों की पिटाई की

मौके का लाभ उठाकर बाहर से किसी ने एक ईंटा फेंका जिससे एक पुलिसकर्मी को चोट लग गई। चोटिल पुलिसकर्मी सुखबीर थाना से अवकाश पर रवाना हो गया था। फिर तामील कराने कैसे गया। पुलिसकर्मी ने उक्त घटना का बहाना लेकर बांदा स्थित मकान में पहुंचकर अधिवक्ता तथा अन्य परिजन जिनमें पुत्र बहू बेटियां शामिल थी। बेरहमी से पिटाई किया और सभी को बबेरू कोतवाली लाकर पुनः मारपीट कर बेदम कर दिया। तथा संगीन धाराओं में चालान कर दिया। घटना से जहां एक ओर आम जनता का पुलिस से विश्वास हट गया है। घटना से अधिवक्ता सहित आम जनता में भी रोष व्याप्त है और अधिवक्ता गण आंदोलन की राह पर है।

अधिवक्ता संघ ने की पुलिसकर्मी के खिलाफ की कार्रवाई की मांग

अधिवक्ता संघ ने मांग की है कि दोषी पुलिस कर्मियों की रिपोर्ट दर्ज करके निलंबन कर घटना की जांच जिला पुलिस से हटाकर सीबी सीआईडी से जांच कराने की मांग की गई। जिससे इस घटना का सच सामने आ सके और पुलिस का असली चेहरा बेनकाब हो सके। यदि कार्यवाही ना की गई। तो मजबूर होकर अधिवक्ताओं को लोकतांत्रिक ढंग से अनिश्चितकालीन आंदोलन करने को बाध्य होना पड़ेगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी।

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