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धान की नर्सरी को तैयार करने के टिप्स:धान की नर्सरी ऐसे करें तैयार, होगी बम्पर पैदावार, कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व अध्यक्ष ने बीज शोधन को बताया महत्वपूर्ण

सिकन्दरपुर, बलियाएक महीने पहले
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खरीफ की मुख्य फसल में शामिल धान के लिए नर्सरी डालने की प्रक्रिया कुछ ही दिनों में शुरु हो जाएगी। यदि धान की फसल को शुरू से ही ध्यान दिया जाए तो यह फायदेमंद साबित हो सकती है।

धान की खेती की शुरुआत नर्सरी से होती है। इसलिए बीजों का अच्छा होना जरुरी है। कई बार किसान महंगा बीज-खाद तो लगाते हैं, बावजूद सही उपज नहीं मिल पाती है। इसलिए बुवाई से पहले बीज व खेत का उपचार कर लेना चाहिए। आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज से सम्बद्ध कृषि विज्ञान केंद्र सोहांव के सेवानिवृत्त अध्यक्ष प्रोफेसर रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि बीज महंगा होना जरूरी नहीं है, बल्कि वे क्षेत्र विशेष की मिट्टी व जलवायु के मुताबिक होना चाहिए। इसलिए किसानों को अपने क्षेत्र के हिसाब से विकसित किस्मों की ही खेती करनी चाहिए।

नर्सरी से पहले बीज शोधन जरूरी

प्रोफेसर रवि प्रकाश ने बताया कि मई की शुरुआत से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। जिससे मानसून आते ही धान की रोपाई कर दिया जाए। लेकिन नर्सरी डालने से पहले बीज शोधन जरूरी है। इससे धान की फसल को कई तरह के रोगों से बचाया जा सकता है।

नर्सरी डालने का समय

मई के अंतिम सप्ताह मे नर्सरी डाल देनी चाहिए। यदि किसी कारण से ऐसा न हो तो जून के प्रथम पखवाड़े तक नर्सरी अवश्य डाल दे। वहीं सुगंधित किस्मों की नर्सरी जून के तीसरे हफ्ते में डालनी चाहिए। नर्सरी डालने से पहले स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत के साथ ट्रेट्रासाईक्लीन हाईड्रोक्लोराइड 10 फीसद की 4 ग्राम मात्रा 100 लीटर पानी के घोल में बीज को रात भर भिगो दें। दूसरे दिन बीज को छानकर गीले बोरे में लपेटकर ठंडे कमरें में रखना चाहिए। समय समय पर पानी का छींटा देते रहना चाहिए। लगभग 36-48 घंटे में बीज अंकुरित हो जाने पर बुवाई करना चाहिए। 21 से 25 दिन में रोपने योग्य नर्सरी तैयार हो जाएगी।

मई के अंतिम सप्ताह मे नर्सरी डाल देनी चाहिए। यदि किसी कारण से ऐसा न हो तो जून के प्रथम पखवाड़े तक नर्सरी अवश्य डाल दे।
मई के अंतिम सप्ताह मे नर्सरी डाल देनी चाहिए। यदि किसी कारण से ऐसा न हो तो जून के प्रथम पखवाड़े तक नर्सरी अवश्य डाल दे।

क्षेत्र कि हिसाब से करें धान की किस्मों का चयन

पूर्वांचल के लिये विकसित किस्मों में असिंचित क्षेत्र के लिए नरेन्द्र-118, नरेन्द्र-97, साकेत-4, बरानी दीप, शुष्क सम्राट, नरेन्द्र लालमनी प्रमुख है। वहीं सिंचित क्षेत्रों के लिए पूसा-169, नरेन्द्र-80, पंत धान-12, मालवीय धान-3022, नरेन्द्र धान-2065, सरजू-52, नरेन्द्र-359, नरेन्द्र-2064, पूसा-44, पीएनआर-381 आते हैं। इसके अलावा ऊसरीली भूमि के लिए नरेन्द्र -5050, नरेन्द्र-2008 किस्में ठीक हैं। इसके अलावा जलभराव क्षेत्र के लिये वीपीटी 5204, एएनडीआर-8002, स्वर्णा सब-1है। जबकि सुगंधित किस्मों में बासमती-370, पूसा बासमती-1, नरेन्द्र सुगंधा प्रमुख है।

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