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सीट बेल्ट नहीं लगाते रोडवेज बसों के चालक:परिवहन मंत्री के जिले में ही आदेश बेअसर, यातायात नियमों का उल्लंघन

बलिया2 महीने पहले
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बिना सीट बेल्ट लगाये बस चलाता बलिया डिपों का बस चालक - Money Bhaskar
बिना सीट बेल्ट लगाये बस चलाता बलिया डिपों का बस चालक

बलिया में रोडवेज के चालक बिना सीट बेल्ट के ही बस चल रहे हैं। यातायात नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। परिवहन विभाग के कानून के अनुसार वाहन चलाते समय सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य होता है। प्राइवेट वाहन चालकों पर सीट बेल्ट नहीं लगाने पर पुलिस और परिवहन विभाग जुर्माना वसूलता है, लेकिन उनका जोर रोडवेज के बस चालकों पर नहीं चलता है। सड़क सुरक्षा सप्ताह और सड़क सुरक्षा माह के तहत आम लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाता है। परिवहन विभाग आम लोगों को लगातार जागरुक करने का प्रयास कर रहा है। इसके बाद विभाग के ही लोग सड़क सुरक्षा के प्रति सजग नहीं हैं। ऐसे में उसकी कवायद का आम लोगों पर कितना असर होगा इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

परिवहन विभाग की बसों के चालक नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं और इनकी ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा। कार्रवाई के डर से निजी वाहनों के चालक तो कमोबेश सीट बेल्ट का इस्तेमाल करने लगे हैं। सरकारी बसों के चालक इससे बेफिक्र हैं।

बलिया रोडवेज डिपो में जनरथ समेत 80 बसों का बेड़ा है। बसों के साथ ही अन्य चार पहिया वाहनों को चलाते समय ड्राइवर को सीट बेल्ट लगाना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर जुर्माना व अन्य कार्रवाई का प्रावधान है। इसके अलावा बसों में फायर एक्सग्यूजर और फर्स्ट एड बाक्स की व्यवस्था रखना भी जरूरी है। पहले की बसों में सीट बेल्ट की व्यवस्था नहीं थी। आदेश के बाद आनन-फानन में वर्ष 2018 में सभी बसों में सीट बेल्ट लगाया गया। जारूकता के अभाव और चालकों की लापरवाही इस कदर है कि रोडवेज बसों का संचालन बिना सीट बेल्ट के ही करते हैं।

इस संबंध में एआरएम राकेश श्रीवास्तव का कहना है कि परिवहन निगम की अपनी 80 तथा अनुबंधित सभी बसों में सीट बेल्ट, फायर एक्सग्यूजर व फर्स्ट एड बॉक्स है। इसे हमेशा एक्सपर्ट चेक करते हैं। फायर एक्सग्यूजर के गैस खत्म होने पर गैस भरे रिफिल लगाये जाते हैं। खाली सिलेंडर को आजमगढ़ भेजकर भरवाया जाता है। फर्स्ट एड की भी सभी बसों में व्यवस्था है। लेकिन यात्री दवा, मलहम पट्टी आदि निकाल लेते हैं। चालकों को सीट बेल्ट लगाने का निर्देश है। ऐसा नहीं करने वालों पर कार्रवाई की जायेगी।

शोपीस बने एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र
परिवहन निगम की बसों में आपात स्थिति से निबटने के लिए अग्निशमन यंत्र लगे तो हैं लेकिन हो चुका है। वैसे ही फर्स्ट एड बॉक्स भी है, लेकिन उसमें फर्स्ट एड की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में खरोच आदि लगने पर भी उपचार के लिए बसों में कोई व्यवस्था नहीं है।
बस चालकों में जागरूकता का अभाव
बसों में सीट बेल्ट नहीं लगाने में चालकों में जागरूकता का अभाव प्रमुख है। वहीं रोडवेज की अधिकांश बसें पुरानी होने के चलते उनमें सीट बेल्ट है भी नहीं। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि सभी में सीट बेल्ट लगाया गया था। यात्रियों की सुरक्षा की और मुस्कान के साथ रोडवेज की यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए अभियान चलाकर रोडवेज चालकों को जागरूक करना होगा। इससे से बात नहीं बनने की स्थिति में निजी वाहनों की तरह जुर्माना लगाना होगा।