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70 दिन में 14 हजार MT गेंहू की खरीद:बलिया को मिला था 97 हजार MT का लक्ष्य, खरीद के लिए खोले गए थे 53 क्रय केंद्र

बलिया6 महीने पहले
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बलिया में गेहूं खरीद के निर्धारित 97 हजार MT लक्ष्य के सापेक्ष महज 14 हजार 196 MT खरीद हुई है। यह निर्धारित लक्ष्य का करीब 14 फीसदी है। विपणन विभाग सहित अन्य विभागों के 53 केंद्रों पर एक अप्रैल से किसानों से गेहूं की खरीद शुरू हुई थी। लगभग 70 दिनों बाद 15 जून को खरीद की समय सीमा समाप्त हो गई।

हालांकि कम खरीद को देखते हुए मुख्यमंत्री ने 30 जून तक खरीदारी करने का निर्देश दिया है, लेकिन लिखित आदेश नहीं आने के चलते फिलहाल क्रय केंद्रों को बुधवार से बंद कर दिया गया। अफसरों का कहना है कि अगर खरीद की तिथि आगे बढ़ती तो आदेश मिलने के बाद दोबारा से खरीद शुरू की जाएगी। डिप्टी RMO अविनाश चंद्र सागरवाल का कहना था कि 15 जून तक खरीद करने का निर्देश था, लिहाजा तय समय पर क्रय केंद्रों को बंद कर दिया गया। अगर दोबारा लिखित आदेश मिलेगा तो खरीद चालू करायी जाएगी।

14 फीसदी खरीद कर टॉप पर पहुंचा जनपद
सरकारी क्रय केन्द्रों पर गेहूं खरीद के खस्ताहाल का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि लक्ष्य का मात्र 14 प्रतिशत खरीद होने के बावजूद बलिया प्रदेश में 5वें स्थान पर है। आजमगढ़ मंडल में तो बलिया टॉप पर है। खास बात यह कि पिछली बार 90 हजार MT खरीद के बाद भी जिले को प्रदेश में 21वां स्थान हासिल हुआ था, जबकि इस बार 14 हजार एमटी खरीद के बावजूद 5वां स्थान मिला है। सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 2015 रुपए निर्धारित करते हुए एक अप्रैल क्रय केंद्र खोलने का आदेश दिया था। जनपद में विपणन विभाग समेत अन्य विभागों के कुल 53 क्रय केंद्र खोले गए थे।

निजी कंपनियों ने की खरीदारी
पड़ोसी देश श्रीलंका, अफगानस्तिान, तुर्कस्तिान आदि देशों में रुस-यूक्रेन जंग के चलते गेहूं का आयात बंद हो गया है। युद्ध लंबा खींचने के चलते इन देशों में गेहूं की डिमांड बढ़ गई है। इस लिहाज से निजी कंपनियों ने मौके पर खूब चौका मारा। उन्होंने सरकार के समर्थन मूल्य के बराबर कीमत देकर गेहूं का स्टॉक जमा कर लिया।

गेहूं क्रय केंद्रों पर तमाम झंझटों को देखते हुए किसानों ने निजी व्यापारियों के हाथों ही अपनी उपज बेंच दी। इसका नतीजा यह हुआ कि सरकारी खरीद मात्र 14 प्रतिशत पर पहुंचकर सिमट गई। सूत्रों की मानें तो गेहूं खरीद में आई बेहद कमी का प्रभाव सरकार के खाद्यान्न वितरण पर भी पड़ने की संभावना बढ़ गई है।

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