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सीएचसी रेवती का बहुचर्चित 'ठेले पर मरीज प्रकरण':बांसडीह में आज हालत बिगड़ने पर मरीज की मौत, तीन दिन पहले हुआ था डिस्चार्ज, दस दिन पूर्व पिता की हुई मृत्यु

बांसडीहएक महीने पहले
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बहुचर्चित "ठेले पर मरीज" मामले में गुरुवार को मरीज जितेंद्र की मौत हो गई। इससे पूर्व बीती 9 मई को मरीज के पिता की मौत हार्ट अटैक से मृत्यु हुई थी। बता दें कि 16 मई को जितेन्द्र वाराणसी से डिस्चार्ज होकर घर आया था। गुरुवार के दिन जितेन्द्र की तबियत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। परिजन आनन-फानन में जितेंद्र को वाराणसी लेकर जा रहे थे। इसी बीच रास्ते में उसकी मौत हो गई।

6 मई से ही जितेंद्र अस्पताल में था भर्ती
बीती 6 मई को तेज बुखार तथा सिर दर्द से पीड़ित नगर रेवती के वार्ड नं 10 निवासी जितेन्द्र तुरहा को परिजन एम्बुलेंस से लेकर सीएचसी रेवती गए। जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने जितेन्द्र को जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया था।

रेफर करने के बाद करीब डेढ़ घण्टे तक एम्बुलेंस नहीं मिलने पर परिजन मरीज को ठेले से बलिया लेकर चल दिए थे। इस प्रकरण को लेकर सीएचसी रेवती पर सीएचसी स्टाफ एवं ग्रामीणों ने एक दूसरे के विरोध में धरना प्रदर्शन भी किया था। मामले को संज्ञान में लेते हुए उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रकरण की जांच तथा दोषियों के विरुद्ध करने का आदेश सीएमओ बलिया को दिया था। बताया जाता है कि घटना के दिन ही जितेन्द्र के पिता 65 वर्षीय शिवजी तुरहा को माइनर हार्ट अटैक आया था, जिसका दवा चल रहा था।

हार्ट अटैक से हुई थी पिता की मौत
एक मात्र पुत्र के वाराणसी अस्पताल में जीवन-मृत्यु के बीच जंग का प्रभाव पिता शिवजी के ऊपर इतना पड़ा कि 9 मई को सुबह उनको मेजर हार्ट अटैक पड़ा। जिसकी वजह से शिवजी की मृत्यु हो गई। मृतक शिवजी की पत्नी का स्वर्गवास डेढ़ साल पहले ही हो चुका है। मृतक का एक मात्र पुत्र जितेन्द्र वाराणसी अस्पताल में भर्ती था, जिसकी आज मौत हो गई। जितेंद्र की चार बहनें हैं, जिनका विवाह हो चुका है।

मृतक जितेन्द्र के पांच बच्चे हैं। 10 वर्षीय पूजा, 7 वर्षीय पिंकी, 5 वर्षीय प्रियांशु, 3 वर्षीय प्रीति तथा 6 माह की अबोध गोल्डी है। बच्चों के लालन-पालन की जिम्मेदारी अब लक्ष्मी के ऊपर ही है, क्योंकि परिवार के रहे दो पुरुष की मौत हो चुकी है।

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