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एक नवंबर से कीजिए कतर्निया घाट की सैर:बहराइच के इस खूबसूरत जंगल में 34 हाथी, 32 बाघ और 270 तेंदुओं का है रोमांच, 5 हजार हिरन बढ़ाते हैं सुंदरता

बहराइच7 महीने पहले
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कतर्नियाघाट सेंचुरी नेपाल से सटी है। - Money Bhaskar
कतर्नियाघाट सेंचुरी नेपाल से सटी है।

बहराइच का कतर्निया घाट एक नवंबर से सैर सपाटे के लिए खोला जा रहा है। यहां का मौसम और बाघ-तेंदुओं का रोमांच लोगों को अपनी ओर खींच लाता है। यही वजह है कि इस साल भी पहले से ही बुकिंग शुरू हो गई है। बस अब इसके खुलने का पर्यटकों को बेसब्री से इंतजार है। तो चलिए, इस खूबसूरत जंगल की हम आपको सैर कराते हैं, जिसे देखकर आप बखूबी अंदाजा लगा सकेंगे कि सुहाने मौसम के बीच कितना सुकून भरा है यहां समय बिताना।

15 तस्वीरों में देखिए...कैसी है ये सेंचुरी

नए अंदाज में इस बार कतर्नियाघाट दिखेगा। थारू संस्कृति के साथ उनके पसंदीदा भोजन का स्वाद पर्यटक पा सकेंगे। इसके अलावा थारू हट और विश्राम गृह को नये रूप में आकार दिया जा रहा है। बुकिंग अभी भी चल रही है।
नए अंदाज में इस बार कतर्नियाघाट दिखेगा। थारू संस्कृति के साथ उनके पसंदीदा भोजन का स्वाद पर्यटक पा सकेंगे। इसके अलावा थारू हट और विश्राम गृह को नये रूप में आकार दिया जा रहा है। बुकिंग अभी भी चल रही है।
कतर्निया घाट के जंगल में 34 हाथी हैं, यह सभी नेपाली हैं। अक्सर झुंड के साथ टहलते हुए दिख जाते हैं। पर्यटकों को निराश नहीं होना पड़ता है।
कतर्निया घाट के जंगल में 34 हाथी हैं, यह सभी नेपाली हैं। अक्सर झुंड के साथ टहलते हुए दिख जाते हैं। पर्यटकों को निराश नहीं होना पड़ता है।
यहां मगरमच्छ और घड़ियाल भी हैं, जो पानी में तैरते हुए दिखते रहते हैं। रोमांच तो तब पैदा होता है, जब यह धूप सेंकने के लिए बाहर निकल आते हैं और घंटों बैठे रहते हैं।
यहां मगरमच्छ और घड़ियाल भी हैं, जो पानी में तैरते हुए दिखते रहते हैं। रोमांच तो तब पैदा होता है, जब यह धूप सेंकने के लिए बाहर निकल आते हैं और घंटों बैठे रहते हैं।
रंग-बिरंगे हिरन अपने आप में आकर्षण का केंद्र होते हैं। एक साथ झुंड में जब यह चहलकदमी करते हैं तो क्या कहने। पर्यटक के आनंद की सीमा नहीं रहती।
रंग-बिरंगे हिरन अपने आप में आकर्षण का केंद्र होते हैं। एक साथ झुंड में जब यह चहलकदमी करते हैं तो क्या कहने। पर्यटक के आनंद की सीमा नहीं रहती।

यह भी जानें

  • कतर्निया घाट में आने के लिए ऑनलाइन बुकिंग कराई जाती है।
  • सैर करने की टाइमिंग सुबह 10 से 12 बजे और शाम को 4 से 6 बजे तक है।
  • दोपहर में थारू संस्कृति से रूबरू होंगे और भोजन का भी यही समय रहता है।
  • मानसून में यह एरिया बंद कर दिया जाता है।
  • कतर्निया घाट का दायरा 551 वर्ग किलोमीटर का है।
अब जरा सोचिए। आप कतर्निया घाट में हैं और आपको बाघ यूं ही टहलते दिख जाएं। आपका रोमांच दोगुना बढ़ जाएगा। यहां 32 बाघ हैं। डरने की बात नहीं है, पर्यटकों को सुरक्षित और काफी दूर रखा जाता है।
अब जरा सोचिए। आप कतर्निया घाट में हैं और आपको बाघ यूं ही टहलते दिख जाएं। आपका रोमांच दोगुना बढ़ जाएगा। यहां 32 बाघ हैं। डरने की बात नहीं है, पर्यटकों को सुरक्षित और काफी दूर रखा जाता है।
हाथी किसका प्रिय नहीं होता। एक झलक देखने के लिए बच्चे क्या, बड़े भी बेताब रहते हैं। यहां 34 नेपाली हाथी हैं। जहां इधर-उधर टहलते दिख जाते हैं।
हाथी किसका प्रिय नहीं होता। एक झलक देखने के लिए बच्चे क्या, बड़े भी बेताब रहते हैं। यहां 34 नेपाली हाथी हैं। जहां इधर-उधर टहलते दिख जाते हैं।
कतर्निया घाट में गेस्ट हाउस भी है, लोग बुकिंग कराकर यहां आते हैं, और गेस्ट हाउस में रुकते हैं। सुहाने मौसम का मजा लेते हैं। अब तक लगभग 250 लोगों ने बुकिंग करा ली है।
कतर्निया घाट में गेस्ट हाउस भी है, लोग बुकिंग कराकर यहां आते हैं, और गेस्ट हाउस में रुकते हैं। सुहाने मौसम का मजा लेते हैं। अब तक लगभग 250 लोगों ने बुकिंग करा ली है।
हिरनों के इस झुंड को देखिए। भला किसका मन नहीं होगा, इन्हें पास से देखने का। यही तो यहां की खूबसूरती है, जो लोगों को अपनी आकर्षित कर लेती है। यहां लगभग 5 हजार हिरन हैं।
हिरनों के इस झुंड को देखिए। भला किसका मन नहीं होगा, इन्हें पास से देखने का। यही तो यहां की खूबसूरती है, जो लोगों को अपनी आकर्षित कर लेती है। यहां लगभग 5 हजार हिरन हैं।

कतर्निया घाट तक ऐसे पहुंचें

  • बाराबंकी होते हुए जिला मुख्यालय बहराइच पहुंचिए।
  • बहराइच से सीधे 80 किमी. की दूरी तय कर मोतीपुर वन बैरियर पहुंचिए।
  • यहां वन विभाग द्वारा वाहन पास का निर्धारित शुल्क देने के बाद जंगल मे प्रवेश करिए।
  • जंगल में पहुंचने पर गाइड द्वारा पर्यटकों को भ्रमण कराया जाएगा।
  • लखीमपुर व बरेली से आने वाले पर्यटकों को सीधे कैलाशपुरी बैरियर पहुंचना होगा।
  • यहां भी निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद जंगल भ्रमण कर सकेंगे।
बाघ और तेंदुओं के बीच यहां दो गैंडे भी हैं। इन्हें भी देखने के लिए आपको कोई खास मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। घूमते हुए आसानी से देखे जा सकते हैं।
बाघ और तेंदुओं के बीच यहां दो गैंडे भी हैं। इन्हें भी देखने के लिए आपको कोई खास मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। घूमते हुए आसानी से देखे जा सकते हैं।
कतर्नियाघाट सेंक्चुरी क्षेत्र सात वन रेंजों में विभक्त है। जंगल में कतर्नियाघाट के अलावा सुजौली, मुर्तिहा, मोतीपुर, ककरहा, निशानगाड़ा और धर्मापुर रेंज शामिल हैं।
कतर्नियाघाट सेंक्चुरी क्षेत्र सात वन रेंजों में विभक्त है। जंगल में कतर्नियाघाट के अलावा सुजौली, मुर्तिहा, मोतीपुर, ककरहा, निशानगाड़ा और धर्मापुर रेंज शामिल हैं।
जंगल की सैर करने के लिए आपको जिप्सी, नाव और स्टीमर मिलती है। सुबह और शाम दोनों ही समय घूमने के यह साधन उपलब्ध रहते हैं।
जंगल की सैर करने के लिए आपको जिप्सी, नाव और स्टीमर मिलती है। सुबह और शाम दोनों ही समय घूमने के यह साधन उपलब्ध रहते हैं।
डीएफओ ने बताया कि इस बार जंगल में 15 वर्ष पुराने वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा जो नियम बनाए गए हैं, उसका पालन पर्यटकों से कराया जाएगा।
डीएफओ ने बताया कि इस बार जंगल में 15 वर्ष पुराने वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा जो नियम बनाए गए हैं, उसका पालन पर्यटकों से कराया जाएगा।
जंगल क्षेत्र में दुर्लभ बाघ, तेंदुआ के साथ अन्य जंगली जीव विचरण करते हैं। इसके अलावा गांगेय डॉल्फिन, कछुआ, मरगमच्छ, घड़ियाल समेत अन्य जलीय जीव काफी मात्रा में संरक्षित वन क्षेत्र से बहने वाली नदियों में रहते हैं। जंगली और जलीय जीव पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
जंगल क्षेत्र में दुर्लभ बाघ, तेंदुआ के साथ अन्य जंगली जीव विचरण करते हैं। इसके अलावा गांगेय डॉल्फिन, कछुआ, मरगमच्छ, घड़ियाल समेत अन्य जलीय जीव काफी मात्रा में संरक्षित वन क्षेत्र से बहने वाली नदियों में रहते हैं। जंगली और जलीय जीव पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि कोरोना संक्रमण अभी कम हुआ है, लेकिन पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में पर्यटन पर आने वाले लोगों को बिना मास्क के प्रवेश नहीं दिया जाएगा। साथ ही इनकी संख्या दो से पांच के बीच ही होनी चाहिए।
प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि कोरोना संक्रमण अभी कम हुआ है, लेकिन पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में पर्यटन पर आने वाले लोगों को बिना मास्क के प्रवेश नहीं दिया जाएगा। साथ ही इनकी संख्या दो से पांच के बीच ही होनी चाहिए।
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