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वेस्ट यूपी में सपा-रालोद गठबंधन के वोटों की गणित:2017 में सपा-कांग्रेस गठबंधन में रालोद शामिल होती तो 7 सीटों का होता फायदा

बागपत2 महीने पहले
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यूपी में आगामी चुनाव को लेकर सपा और रालोद में गठबंधन हो गया है। बताया जा रहा है कि सपा रालोद को पश्चिमी यूपी की 40 सीटें देने पर राजी हुई है। इसमें से 4 पर रालोद के प्रत्याशी सपा के सिंबल साइकिल पर चुनाव लड़ेंगे। 2017 में सपा ने कांग्रेस से गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। वेस्ट यूपी में सपा गठबंधन को 20 सीट मिली थी। जबकि वोट शेयर 25.95% था। वहीं, रालोद 1 सीट के साथ 5.85% वोट शेयर लेकर आई थी। भाजपा का वोट शेयर 42% था। सपा और रालोद का वोट शेयर लगभग 16% था। यदि 2017 में सपा-कांग्रेस गठबंधन और रालोद को मिले वोटों के आंकड़ों को देखें तो सपा को 7 सीटों पर ही फायदा होता दिख रहा है।

2017 में पश्चिम के 23 जिलों में 100 सीट पर लड़ी थी रालोद

  • 2017 विधानसभा चुनाव में रालोद का न तो सपा ने हाथ थामा था न ही कांग्रेस ने, ऐसे में गुस्साए अजीत सिंह ने प्रदेश की 277 विधानसभा सीटों पर अपने कैंडिडेट खड़े कर दिए थे।
  • हालांकि, पश्चिमी यूपी के 25 जिलों की 130 सीटों में से उन्होंने 23 जिलों की 100 सीटों पर ही कैंडिडेट खड़े किए थे। एटा और कासगंज में रालोद ने कैंडिडेट ही नहीं उतारे थे।
  • इन 100 सीटों में से रालोद को सिर्फ बागपत की छपरौली सीट ही मिली। यहां से सहेंद्र सिंह रामाला जीते। जिन्हें 65,124 वोट मिले थे। छपरौली रालोद की पारंपरिक सीट है।
  • 4 सीटों पर रालोद सेकंड नंबर पर रही, जबकि 13 में तीसरे नंबर की पार्टी रही। यही नहीं, पूरे वेस्ट यूपी में 85 सीटों पर उसकी जमानत भी जब्त हो गई थी।

सपा के साथ आती तो भी नहीं होता कमाल

  • 2017 विधानसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। पश्चिमी यूपी में जब हमने इन आंकड़ों को रालोद के चुनावी नतीजों के आंकड़ों के साथ मिलाकर देखा तो भी सपा को कुछ खास हासिल होता हुआ नहीं दिखा।
  • रालोद 100 सीटों पर 2017 में लड़ी थी। इसमें से सपा और रालोद के आंकड़ों को देखें तो यह गठबंधन 2017 में 27 सीटों पर ही आगे जाता है, जबकि 73 पर भाजपा काबिज होती। हालांकि, इनमे कुछ सीटें कांग्रेस के खाते में गई थी। ऐसे में उसके वोटों को सपा की जगह जोड़ा गया है।
  • हालांकि, सपा-कांग्रेस गठबंधन और रालोद के अलग अलग आंकड़ों को देखे तो 14 सीटों पर रालोद सपा-कांग्रेस गठबंधन से भी आगे हैं।

कौन-कौन से जिले पश्चिमी यूपी में है शामिल
आगरा, पीलीभीत, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, सहारनपुर, मुरादाबाद, अमरोहा, गौतमबुद्ध नगर, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, बदायूं, बरेली, बागपत, मुजफ्फरनगर, संभल, बिजनौर, रामपुर, शामली और हापुड़ समेत 25 जिले पश्चिमी यूपी में आते हैं। रालोद ने 2017 में इनमें से एटा और कासगंज में अपने प्रत्याशी नहीं उतारे थे।

*नोट: नीचे दिए गए आंकड़े 2017 के हैं। इनमे सपा +कांग्रेस गठबंधन और रालोद के मिले वोट को ही गठबंधन बताया गया है।