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बागपत में प्रशासन ने बेगुनाह के मकान को किया ध्वस्त:परिवार सहित खुले में रहने को मजबूर, न्याय नहीं मिला तो अंबेडकर की मूर्ति के नीचे आत्मदाह करने की दी चेतावनी

बागपतएक महीने पहले
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बागपत में बीते 7 मई को चर्मशोधन इकाइयों पर प्रशासन ने कार्रवाई की थी। जिसमें पुलिस पर ग्रामीणों ने पथराव भी कर दिया था। उसी में एक ऐसा मकान भी ध्वस्त करा दिया गया जिसका इससे कोई संबंध नहीं था। अब वो परिवार खुले में रहने को मजबूर है। पेट भरने के लिए भी दूसरों पर निर्भर होना पड़ा रहा है। पीड़ित परिवार की महिला ने चेतावनी दी है कि अगर तीन दिन के अंदर उन्हे न्याय नहीं मिला तो वह अंबेडकर की मूर्ति के नीचे बैठकर परिवार के साथ आत्मदाह कर लेगी।

सामान दबकर नष्ट हो गया
गांव में सात मई को एनजीटी के आदेश पर चर्मशोधन इकाइयों को बुलडोजर लगाकर ध्वस्त कराया गया था। लेकिन ध्वस्तीकरण की भेंट एक ऐसा परिवार भी चढ़ गया जिसका इस कार्य से कोई लेना देना ही नहीं था। विनोद पुत्र सीताराम का मकान ध्वस्त कर दिया गया। मकान में रखा सभी घरेलू सामान दबकर नष्ट हो गया। इस परिवार की महिला सुमित्रा आशा कार्यकत्री है। मौके पर अधिकारियों को समझाने की बहुत कोशिश की। लेकिन उलटा आरोप लगाते हुए परिवार के लोगों पर चालान कर दिया।

पीड़ित परिवार
पीड़ित परिवार

किसी तरह कर रहे गुजर बसर
परिवार में उस समय ये तीनों ही थे उनका बड़ा बेटा शुभम गाजियाबाद में रहता है। सुमित्रा ने बताया कि वह आशा कार्यकत्री है। उसका आरोप है कि कार्रवाई वक्त वो एक फॉर्म भर रही थी और उसी समय पुलिस उसे वहां से घसीटकर ले गई। उसने बताया कि छोटा बेटा रोशनी जलाकर पेड़ के नीचे रात मे बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर है। पति बीमार है इस स्थिति में दोबारा मकान बनाना उसके बस की बात ही नहीं है। साथ ही उसने चेतावनी दी है कि तीन दिन के अंदर उसके परिवार से केस वापिस और मकान बनवाने की समस्या का समाधान नहीं कराया गया तो अंबेडकर की मूर्ति के नीचे बैठकर परिवार के साथ आत्मदाह कर लेगी।

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