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बदायूं में है शाहजहां की साली का मकबरा:आगरा के ताजमहल के 20 कमरों के रहस्य से पहले परवर खानम के मकबरे की स्टोरी पढ़िए

बदायूंएक महीने पहले
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मल्लिका-ए-हुस्न मुमताज महल के मकबरे को सारी दुनियां ताजमहल के नाम से जानती है। माना जाता है कि इसे मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम की याद में बनवाया था। दुनिया के आठ अजूबे में शामिल ताजमहल को देखने के लिए दुनियाभर के लोगों का तांता लगा रहता है।

लेकिन, ये बहुत कम लोग ही जानते हैं कि शाहजंहा की पत्नी मुमताज महल की सगी छोटी बहन शाह परवर खानम का बदायूं में मकबरा मौजूद है, जो आज खंडहर में तब्दील हो चुका है। पुरातत्व विभाग का ध्यान इन मकबरों की तरफ है ही नहीं। बदायूं के इन खंडहरों के इतिहास के थोड़े करीब हम आपको लिए चलते हैं...

मकबरे का निर्माण 1660 ईसवी में नवाब फरीद ने कराया था। बेगम परवर खानम नवाब फरीद की पत्नी थीं। नवाब का किला भी इसी के पास है। नवाब ने खुद व अपनी पत्नी के लिए अंतिम आरामगाह बतौर इसे बनवाया था। यहां उनकी कब्रें अभी भी मौजूद हैं, लेकिन मौजूदा वक्त में यह मकबरा खंडहर में तब्दील हो चुका है। इसके आसपास भी लोग दिन ढलने के बाद नहीं जाते। बताया जाता है कि शाहजहां खुद एक बार बदायूं इस मकबरे को देखने पहुंचे थे।

सटकर बह रही सोत नदी
इस मकबरे से सटकर सोत नदी बह रही है। मुरादाबाद की ओर से आ रही यह नदी बदायूं से होते हुए उसहैत और फिर गंगा में जा मिली है। खासियत यह है कि नदी के सोत उस वक्त खुले हुए थे और उन सोतों के जरिये यह पानी से लबालब रहती थी, लेकिन भूगर्भ जलस्तर गिरने के कारण सोत बंद हो गए और नदी की हजारों बीघा जमीन पर कब्जे हो रहे हैं।

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