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बदायूं में अनदेखी से मर रहे बेजुबान:बीमारी से 100 से ज्यादा पशुओं की मौत, बिना पोस्टमार्टम के दफनाए; ग्रामीण बोले- इलाज नहीं मिल रहा

बदायूं2 महीने पहले
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बिरियाडांडा के ग्रामीणों ने बताया कि उनके पास खेती अधिक न होने की वजह से वह भैंस पालकर ही अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। - Money Bhaskar
बिरियाडांडा के ग्रामीणों ने बताया कि उनके पास खेती अधिक न होने की वजह से वह भैंस पालकर ही अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं।

बदायूं में बेजुबानों से क्रूरता का मामला सामने आया है। बीमारी से हो रही मौत के बावजूद अभी डॉक्टर इलाज के लिए नहीं पहुंचे हैं। इस अनदेखी से सैकड़ों से पशुओं ने दम तोड़ दिया जबकि अभी कुछ बीमार भी हैं।

बिरियाडांडा गांव में अज्ञात बीमारी के कारण आठ दिन से अब तक 100 से अधिक भैंसों व अन्य जानवरों की मौत हो गई है। ग्रामीण जब डॉक्टर से इलाज कराते हैं तो कोई उन्हें निमोनिया बताया जाता है। कोई गला घोंटू बताता है, तो कोई पका नाम की बीमारी बताता है। लेकिन इलाज कराने के बाद भी पशुओं की मौत हो जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को जानकारी भी दी गई, लेकिन अभी तक कोई भी सरकारी डॉक्टर उनके गांव में पशुओं का इलाज करने नहीं पहुंचा है।

खाना पीना बंद कर रहे पशु
बिरियाडांडा गांव के रहने वाले दर्जनों ग्रामीण जिनमें दुर्वेश, बालक राम, महेश, रामवीर, अनुज, रतिराम के जानवरों की मौत हुई है। गांव के लोगों को कहना है कि पशुओं को पहले हल्का बुखार आता है। उसके बाद में पशु खाना पीना बंद कर देते हैं, जब डॉक्टर को दिखाते हैं, उसके 1 घंटे बाद मौत हो जाती है।

बोले ग्रामीण, भैंस पालकर ही होता है गुजारा
बिरियाडांडा के ग्रामीणों ने बताया कि उनके पास खेती अधिक न होने की वजह से वह भैंस पालकर ही अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। लेकिन एक एक परिवार में 4-4 भैंसों की मौत हो गई। अब इन लोगों को अपने परिवार के पालन पोषण की भी चिंता सता रही है।

जिला पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एके जादौन से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि उनके पास तक अभी किसी भी ग्रामीण में कोई जानकारी नहीं दी है। गांव में पशुओं को दवाएं उपलब्ध कराई है और कैंप लगाकर पर बीमार पशुओं का इलाज भी करा रहे हैं। जिला पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि वहां कुछ जानवरों की मौत हुई है ग्रामीण जो संख्या बता रहे हैं, वह गलत है।

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