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आजमगढ़-रामपुर उपचुनाव से दूर अखिलेश यादव:भाजपा बोली- उनके पास बताने को कुछ नहीं, हार रहे चुनाव; सपा का जवाब- हमारी सेना मजबूत

आजमगढ़2 महीने पहलेलेखक: अजय कुमार मिश्र
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आजमगढ़ और रामपुर में 23 जून को होने वाले लोकसभा उपचुनाव का प्रचार थम चुका है। दोनों सीटों पर सभी की निगाहें सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव पर थीं। लोग अखिलेश के आने का इंतजार कर रहे थे। मगर, उन्होंने दोनों जिलों में आने से परहेज किया। अब भाजपा अखिलेश को घेरने में लगी है। भाजपा का कहना है कि अखिलेश के पास बताने के लिए कुछ है ही नहीं। यही वजह है कि वो प्रचार करने नहीं आए। वो नहीं चाहते हैं कि हार का ठप्पा उन पर लगे।

वहीं सपा का कहना है कि सेना जब कमजोर होती है, तब सेनापति आता है। हमारी सेना मजबूती के साथ लड़ रही है। बता दें कि आजमगढ़ से अखिलेश के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई इस सीट पर सपा ने धर्मेंद्र यादव को मैदान में उतारा है। जबकि रामपुर में आजम खान के करीबी आसिम राजा को सपा ने प्रत्याशी बनाया है। इसीलिए इन दोनों सीटों के लिए अखिलेश के प्रचार न करने से सियासत गर्मा गई है।

आजमगढ़ और रामपुर में हो रहे लोकसभा उपचुनाव में अखिलेश यादव के न आने से तेज हुई सियासत।
आजमगढ़ और रामपुर में हो रहे लोकसभा उपचुनाव में अखिलेश यादव के न आने से तेज हुई सियासत।

जानिए 7 कारण, क्यों नहीं आए अखिलेश

  1. अखिलेश आजमगढ़ से इस्तीफा देकर चले गए, जबकि यहां की जनता ने उन्होंने सांसद बने रहने की बात कही थी।
  2. जिले में बड़े नेताओं के घर पर हुई मौत पर ही वह यहां आएं। मगर, जिस समय यहां लोग करीब डेढ़ महीने पानी में डूबे रहे, उस समय अखिलेश ने न तो एक भी ट्वीट किया और ना ही उनका दुख-दर्द बांटा।
  3. बिलरियागंज में NRC को लेकर धरना प्रदर्शन हुआ। प्रियंका गांधी ने आकर लोगों का दुख-दर्द जाना। मगर, अखिलेश यादव ने यहां की जनता के बीच आना उचित नहीं समझा।
  4. कोरोना संक्रमण के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 3 बार आजमगढ़ के दौरे पर तीन बार आए। मगर, अखिलेश यादव यहां नहीं आए।
  5. जिले में जहरीली शराब से 13 से अधिक मौत का मामला हो या मुबारकपुर में डायरिया से हुई मौतों का मामला, अखिलेश यादव ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी।
  6. प्रदेश की छोटी-छोटी समस्याओं पर ट्वीट करने वाले अखिलेश यादव ने आजमगढ़ की किसी भी समस्या को लेकर कभी ट्वीट नहीं किया।
  7. 2019 से लेकर 2022 तक जिले में दो बार अखिलेश यादव के लापता होने के पोस्टर भी लगे थे।
भाजपा विधायक शलभमणि त्रिपाठी ने कहा, 'अखिलेश से जनता की हिसाब करने को तैयार बैठी है।,
भाजपा विधायक शलभमणि त्रिपाठी ने कहा, 'अखिलेश से जनता की हिसाब करने को तैयार बैठी है।,

भाजपा का वार- अखिलेश ने सांसद रहते हुए कुछ नहीं किया
भाजपा विधायक शलभमणि त्रिपाठी ने कहा, 'अखिलेश यादव के पास बताने के लिए कुछ भी नहीं है। उन्होंने यहां से सांसद रहते कुछ नहीं किया। जब यहां की जनता कोरोना से जूझ रही थी, तो वह नदारद थे।' उन्होंने कहा, 'अखिलेश को पता चल गया है कि वह इन सीटों पर चुनाव हार रहे हैं। इसीलिए वह नहीं चाहते कि हार का ठप्पा उनके ऊपर लगे। भाजपा ने एयरपोर्ट, विश्वविद्यालय और पूर्वांचल एक्सप्रेस देने का काम किया है। ऐसे में जिले की जनता हिसाब करने को तैयार बैठी है।'

सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा, 'जब सेना कमजोर होती है, तब सेनापति को आना पड़ता है।'
सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा, 'जब सेना कमजोर होती है, तब सेनापति को आना पड़ता है।'

सपा का पलटवार- हमारी सेना विरोधियों को हारने में सक्षम
सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा, 'हमारी पूरी तैयारी हो गई है। भाजपा के लोग झूठ बोलने और बात गढ़ने में नंबर वन हैं। इसका वर्ल्ड कप हो, तो भाजपा के लोग वर्ल्ड कप लेकर जाएंगे।' उन्होंने कहा, 'सेनापति तब आता है, जब सेना कमजोर होती है। हमारी सेना खुद लड़ रही है और विरोधियों को परास्त करने में सक्षम है।' सपा जिलाध्यक्ष ने सवाल करते हुए कहा, 'नरेंद्र मोदी क्यों नहीं आए? हमारी टीम सहयोगी दलों के साथ काम कर रही है। यह सब भ्रम फैलाया जा रहा है, जो टूट जाएगा।'

राजनीतिक चिंतक राम अवध यादव ने कहा, 'अखिलेश आश्वस्त हैं, उन्हें धोखा नहीं मिलेगा'
राजनीतिक चिंतक राम अवध यादव ने कहा, 'अखिलेश आश्वस्त हैं, उन्हें धोखा नहीं मिलेगा'

पॉलिटिकल एक्सपर्ट बोलें- अखिलेश ने नहीं निभाई सांसद की जिम्मेदारी
पॉलिटिकल एक्सपर्ट राम अवध यादव ने कहा , 'निश्चित रूप से लड़ाई सपा और भाजपा के बीच है। अखिलेश को एक सांसद के रूप में जो जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी, उसे नहीं निभाया। बिलरियागंज में NRC को लेकर हुए बवाल में प्रियंका गांधी आई थीं, पर अखिलेश यादव नहीं आए। संकट के समय उन्होंने यहां की जनता की सुध नहीं ली।' उन्होंने कहा, 'एक सांसद के रूप में उन्हें आना चाहिए था। जनता के सुख-दुख में शामिल होने के मामले में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव शून्य रहे। जिले में प्रचार इसलिए करने नहीं आए कि अखिलेश यादव पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि उन्हें धोखा नहीं मिलेगा। अखिलेश यादव को दोनों उपचुनाव वाली सीटों पर पूरा भरोसा है।'

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