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आजमगढ़ में दो शातिर साइबर अपराधी गिरफ्तार:यू-ट्यूब से सीखी ठगी, बायोमैट्रिक क्लोनिंग से खाते से निकालते थे पैसा, फिंगर प्रिंट का बना लेते थे क्लोन

आजमगढ़6 महीने पहले
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आजमगढ़ पुलिस ने दो शातिर साइबर ठगों को किया गिरफ्तार, बायोमैट्रिक क्लोनिंग के माध्यम से करते थे ठगी। - Money Bhaskar
आजमगढ़ पुलिस ने दो शातिर साइबर ठगों को किया गिरफ्तार, बायोमैट्रिक क्लोनिंग के माध्यम से करते थे ठगी।

आजमगढ़ जिले की पुलिस ने दो साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। ये ठग ग्राहक सेवा केंद्रों पर जाकर लोगों के अंगूठे का छाप लेकर उसकी बायोमैट्रिक क्लोनिंग के जरिए AEPS के माध्यम से बैंक खातों से लाखों रुपए निकाल लेते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बने हुए क्लोन फिंगर प्रिंट और फिंगर प्रिंट बनाने के उपकरण बरामद किए हैं।

इन आरोपियों पर आधार कार्ड के माध्यम से अंगूठे के फर्जी निशान बनाकर एक लाख 77 हजार रुपए निकालने का आरोप है। इसके बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने छानबीन के बाद ठगों को चिह्नित किया और उन्हें गिरफ्तार किया। अभियुक्तों की पहचान मनोज सरोज और उमेश सरोज के रूप में हुई है। दोनों बिलरियागंज थाने के रहने वाले हैं।

यू-ट्यूब से सीखी ठगी

जिले के एसपी ट्रैफिक सुधीर जायसवाल ने बताया कि पूछताछ में यह बात सामने आई कि दोनों अभियुक्तों ने ठगी का तरीका यू-ट्यूब से सीखा। बायोमेट्रिक क्लोनिंग करने के बारे में विडियो देखकर साइबर ठगी करते हैं। वे स्पाई कैमरे और मोबाइल फोन के जरिये ग्राहक सेवा केंद्रों में जाकर लोगों के रजिस्टर में लगे अंगूठे का फोटो खींच लेते थे। तहसीलों में जमा स्टांप पेपर से उनके अंगूठे का निशान आधार कार्ड और अन्य डिटेल ले लेते हैं।

इसके बाद उसी अंगूठे की निशान को बटर पेपर पर स्कैन कर लेते हैं। उसके बाद बटर पेपर को रबर पर रखकर थंब इंप्रेशन मशीन के माध्यम से इम्प्रेशन रबर या पॉलीमर पर निकाल लेते थे। इस तरह से उस व्यक्ति के अंगूठे का क्लोन फिंगरप्रिंट तैयार हो जाता है। उसके बाद AEPS बैंकिंग आईडी (निट्स पे) से क्लोन फिंगरप्रिंट के माध्यम से आधार कार्ड से लिंक बैंक खातों से रुपये निकाल लेते थे।

12 लाख से अधिक की कर चुके धोखाधड़ी

गिरफ्तार दोनों आरोपियों ने पूछताछ में इस बात को स्वीकार किया है कि दोनों ने ऐसे ही कई लोगों के फिंगरप्रिंट का क्लोन बनाकर बैंकिंग धोखाधड़ी कर ठगी की थी। बैंकिंग सॉफ्टवेयर से अपनी पहचान छुपाने के लिए वे कॉन्टेक्ट लेंस का प्रयोग करते थे, ताकि आंख के रेटिना स्कैन करके ओरोजिनल आधार कार्ड लिंक न हो पाए। अब तक करीब 12 लाख का धोखाधड़ी कर चुके हैं तथा 50 से अधिक क्लोन भी किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

यह हुआ बरामद
आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने दो लैपटॉप, फिंगर प्रिंट तैयार करने के लिए पाली स्टैंपर, तीन रबड़ सीट, सीट वाशिंग केमिकल, स्पाई कैमरा रिमोट के साथ, 18 फर्जी आधार कार्ड, छह रेटिना लेंस, मोबाइल फोन, ओटीजी कनेक्टर और डोंगल बरामद किया है। दोनों आरोपियों को जेल भेजा जा रहा है।

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