पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX57858.150.64 %
  • NIFTY17277.950.75 %
  • GOLD(MCX 10 GM)486870.08 %
  • SILVER(MCX 1 KG)63687-1.21 %

अयोध्या में माता सीता की कुलदेवी छोटी देवकाली के दर्शन:मां पार्वती के विग्रह को साथ लाईं थीं सीताजी, राजा दशरथ ने कराया था भव्य मंदिर का निर्माण, दर्शन से पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं

अयोध्या3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
अयोध्या में माता सीता की कुलदेवी के रूप में विराजमान हैं छोटी देवकाली।

नवरात्र में दैनिक भास्कर रोजाना आपको UP में स्थित माता के शक्तिपीठों और प्रमुख मंदिरों के दर्शन करा रहा है। इसी कड़ी में आज हम आपको अयोध्या में माता सीता की कुलदेवी के रूप में विराजमान मां छोटी देवीकाली के दर्शन करा रहे हैं। मान्यता है कि शादी के समय सीताजी अपने मायके मिथिला से मां पार्वती के इस विग्रह को साथ लाई थीं। इन्हीं की पूजा अर्चना से भगवान राम उन्हें वर के रूप में प्राप्त हुए थे।

राजा दशरथ ने अयोध्या में भव्य मंदिर का निर्माण कराकर इस विग्रह को स्थापित कराया था। यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का मेला लगता है। नवरात्र में यहां भक्त विशेष रूप से माता के दर्शन करने पहुंचते हैं।

मां सीता की कुलदेवी।
मां सीता की कुलदेवी।

अन्यंत पौराणिक महत्व है इस मंदिर का

राजा दशरथ ने अयोध्या में सप्तसागर के ईशान कोण पर मां छोटी देवकाली का भव्य मंदिर बनवाया था। यहां सर्वमंगला पार्वती मां सीता की कुलदेवी के रूप में छोटी देवकाली के रूप में विराजमान हैं। बताते हैं कि माता सीता यहां नित्य पूजा अर्चना करती थीं। पौराणिक आख्यानों में अत्रि संहिता के मिथिला खंड में मिथिला की ग्राम देवी के रूप में छोटी देवकाली का उल्लेख है। अयोध्या में भी इन्हें ग्राम देवी का स्थान मिला। यही जनकपुर की सर्वमंगला पार्वती हैं जो विवाह के बाद सीता जी के साथ अयोध्या आईl इन्हीं के आशीष से सीता जी को श्रीराम के रूप में मनचाहे वर की प्राप्ति हुई l

यहां पूजा करने से पूरी होती हैं समस्त मनोकामनाएं

धार्मिक मान्यता है कि लक्ष्मीस्वरूपा माता सीता रोजाना अपने निवास कनक भवन से आकर मां छोटी देवकाली का पूजन करती थीं। महर्षि वेदव्यास ने रुद्रयामल तंत्र व स्कंदपुराण में ईशानी देवी के नाम से छोटी देवकाली मंदिर का वर्णन किया है। स्कंदपुराण में ’विदेह कुलदेवी च सर्वमंगलकारिणी श्लोक में इसका उल्लेख है। इस श्लोक में विस्तार से बताया कि इन सर्वमंगलकारिणी, स्कंदमाता, शिवप्रिया भवानी का पूजन करने से समस्त प्रकार के इष्ट पूरे होते हैं। रुद्रयामल तंत्र में सीता द्वारा प्रतिदिन छोटी देवकाली मंदिर में पूजन का उल्लेख हैं।

मंदिर में नवरात्र पर्व पर सुबह से लोगों की भीड़ उमड़ती है।
मंदिर में नवरात्र पर्व पर सुबह से लोगों की भीड़ उमड़ती है।

चीनी यात्री ह्वेनसांग हुआ था प्रभावित
चीनी यात्री ह्वेनसांग भी अयोध्या में स्थित मां छोटी देवकाली मंदिर की भव्यता, पौराणिकता, विशेषता और वैभव से अत्यंत प्रभावित हुआ था। उसने अपनी पुस्तक में इसकी जिक्र किया है। ह्वेनसांग ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि इस मंदिर में पहुंचकर उसे जो शांति और आनंद अनुभव हुआ है, उसे वह शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता है। फाहियान आदि विदेशी यात्रियों ने भी मां छोटी देवकाली की महत्ता का वर्णन अपनी पुस्तकों में किया है।

6 माह तक दर्शन करने से पूरी होती है इच्छा

साधकों का अनुभव है कि इस मंदिर में किया गया जप,तप, हवन व अनुष्ठान शीघ्र फलदाई होता है। माता के दर्शन मनुष्य को सभी मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। तथा उसका जीवन सुखमय हो जाता है। ऐसी मान्यता है कि निरंतर छह माह तक इस मंदिर में दर्शन करने से मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। माता छोटी देवकाली का स्थान अयोध्या के प्रमुख पौराणिक स्थान में से एक है। अयोध्या तथा आस पास के क्षेत्रों में परम्परा के अनुसार विवाह के बाद वर-वधुओं को भगवान राम की कुलदेवी के साथ यहां का भी दर्शन करवाया जाता है।

मंदिर में दूर दराज से तमाम लोग पहुंचते हैं।
मंदिर में दूर दराज से तमाम लोग पहुंचते हैं।

हुण और मुगलों के आक्रमण में दो बार ध्वस्त हुआ मंदिर

इस प्राचीन मंदिर को हुण और मुगलों के आक्रमण के दौरान दो बार ध्वस्त कर दिया गया था। पहली बार ध्वस्त होने पर इसका पुनर्निर्माण महाराज पुष्य मित्र ने कराया था। जबकि दूसरी बार मुगलों द्वारा ध्वस्त किए जाने पर बिंदू संप्रदाय के महंत ने छोटी देवीकाली मंदिर के स्थान पर एक छोटी सी कोठरी का निर्माण कराया था।

खबरें और भी हैं...