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दस फोटो में देखें तमसा किनारे मुरारी बापू की रामकथा:बोले,परमात्मा दर्शन का सबसे सहज साधन है प्रसन्न चित्त रहना,मानस के हर कांड में विशिष्ट रस का बखान

अयोध्या2 महीने पहले
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तमसादी के तट पर रामकथा के तीसरे दिन की कथा कहते राष्ट्रीय संत मुरारी बापू - Money Bhaskar
तमसादी के तट पर रामकथा के तीसरे दिन की कथा कहते राष्ट्रीय संत मुरारी बापू

श्रीरामचरित मानस के विशिष्ट वक्ता मुरारी बापू द्वारा ने श्रीराम वनगमन के तीर्थों पर कही जा रही नौ दिवसीय कथा के तीसरे सत्र में तमसा के तट पर 'मानस-अयोध्याकांड' की व्याख्या कीl बताते चले कि श्रीराम के अपने वन गमन में यहीं पर प्रथम दिवस विश्राम किया था।

भक्त ने सिर पर मानस को रखकर बापू को मंच के पास ले जाकर दिया
भक्त ने सिर पर मानस को रखकर बापू को मंच के पास ले जाकर दिया
कथा कहने के लिए जाते मुरारी बापू
कथा कहने के लिए जाते मुरारी बापू
ड्रोन की नजर में तमसा का वह तट जहां बापू ने सोमवार को रामकथा कही
ड्रोन की नजर में तमसा का वह तट जहां बापू ने सोमवार को रामकथा कही
रामभक्तों को अपने हाथों से प्रसाद परोसते बापू
रामभक्तों को अपने हाथों से प्रसाद परोसते बापू
रामकथा के पहले रामचरित मानस की वंदना
रामकथा के पहले रामचरित मानस की वंदना
बापू की रामकथा के दौरान मनमोहक संगीत
बापू की रामकथा के दौरान मनमोहक संगीत
भक्तों को दिए जाने वाले प्रसाद की गुणवत्ता खुद बापू ने देखी
भक्तों को दिए जाने वाले प्रसाद की गुणवत्ता खुद बापू ने देखी
जमीन पर बैठकर रामकथा का आनंद लेते भक्तगण
जमीन पर बैठकर रामकथा का आनंद लेते भक्तगण
अयोध्या हो या तमसा का तट भक्तों का साथ हर समय बापू के साथ
अयोध्या हो या तमसा का तट भक्तों का साथ हर समय बापू के साथ
रामकथा के दौरान भावपूर्ण मुद्रा में मुरारी बापू
रामकथा के दौरान भावपूर्ण मुद्रा में मुरारी बापू

दर्शन के चार अन्य द्वार को बापू ने भगवान के नाम,रूप,लीलाऔर धाम को बताया

इस अवसर पर बापू ने कहा कि परमात्मा के दर्शन के लिए सबसे सहज साधन है प्रसन्नचित्त रहनाlआदि गुरु भगवान शंकराचार्य ने अपने सूत्र में कहा है कि प्रसन्नचित्त दशा परमात्मा के दर्शन का द्वार है।भगवान के दर्शन के चार अन्य द्वार बताते हुए बापू ने भगवान के नाम,रूप,लीलाऔर धाम का वर्णन किया।प्रथम द्वार नाम की व्याख्या में ' बंदउँ नाम राम रघुवर को और ' कहौ कहां लगि नाम बड़ाई,राम न सकहिं नाम गुन गाई को बताया।

बापू कलह से मुक्त काया को अयोध्या बताया

बापू ने परमात्मा के दूसरे द्वार रूप ' भय प्रगट कृपाल दीनदयाला को गाते हुए कहा कि परमात्मा के दर्शन में द्वार और दीवार बाधक नही हैं मात्र हमारी ओर से देरी ही एकमात्र बाधा है।तीसरा द्वार लीला है 'कीजै शिशु लीला अति प्रिय शीला.' और चौथा द्वार धाम है। धाम की व्याख्या करते हुए बापू कलह से मुक्त काया को अयोध्या बताते हैं।जहाँ युद्ध नही,संघर्ष नहीं,कलह नहीं वह काया अयोध्या की भांति ही धाम हैl

बापू ने राम तत्व की व्याख्या की

मुरारी बापू ने कहा कि रामनाम परम मंत्र है,महामंत्र है,मंत्रराज हैl इसमें जो रकार है वह ईश्वर परक हैlजो मकार है वह जीव परक है और जो बीच का अकार है वह सेतुपरक हैlजो जीव और ईश्वर के मिलन का सेतु बनता है।बापू मानस के हर कांड के विशिष्ट रस का बखान करते हुए बताते हैं कि बालकांड में हास्य-विनोद रस हैlअयोध्याकांड में करुण रस की प्रधानता हैlअरण्यकांड में भयानक रस,किष्किन्धाकांड में वीर रस,सुंदरकांड में शांत रस,लंकाकांड में वीर और वीभत्स रस और उत्तरकांड में अद्भुत रस की प्रधानता हैl

काशी के महामंडलेश्वर संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा सहित अनेक धर्माचार्यों की मौजूदगी रही

बापू रामकथा को प्रेमयज्ञ कहकर 'रामहिं केवल प्रेम पियारा और मानस को अखिल ब्रह्मांड का हाइवे बताकर अपनी बात 'सकल लोक जग पावनि गंगा.'गोस्वामी जी की पंक्तियों से पुष्ट करते हैं।तीसरे दिवस तमसा तट पर बापू ने भगवान के जन्म से बालकांड की समाप्ति पर्यंत और अयोध्याकांड में वनगमन और तमसा तट पर भगवान के प्रथम दिवस विश्राम तक कथा सुनाई। इस अवसर पर काशी के महामंडलेश्वर संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा सहित अनेक धर्माचार्यों की मौजूदगी रहीl

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