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चित्रकूट के लिए रवाना हुई भरत यात्रा:भगवान राम की स्मृतियों को याद कर भावुक हुए भक्त, अयोध्या लौटने के लिए मनाने निकले भरत

अयोध्या10 महीने पहले
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14 साल की वन यात्रा पर चित्रकूट पहुंचे भगवान श्रीराम को मनाकर अयोध्या वापस लाने के लिए यात्रा  रवाना हुई। - Money Bhaskar
14 साल की वन यात्रा पर चित्रकूट पहुंचे भगवान श्रीराम को मनाकर अयोध्या वापस लाने के लिए यात्रा रवाना हुई।

14 साल की वन यात्रा पर चित्रकूट पहुंचे भगवान श्रीराम को मनाकर अयोध्या वापस लाने के लिए भरत संतों संग यात्रा लेकर अयोध्या से रवाना हुए। भगवान श्रीराम को मनाने के लिए अयोध्या के मणिराम दास जी की छावनी से रविवार को सुबह चित्रकूट के लिए भरत यात्रा रवाना हो गई।

यात्रा को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के आशीर्वाद के बाद उनके उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास शास्त्री ने पूजन कर रवाना किया। इस अवसर पर त्रेता में भगवान श्रीराम और भरत के भाई-भाई के प्रेम मानों आज जीवंत हो उठा।

भरतजी काे चित्रकूट जाते देख भावुक हो उठे छावनी के वरिष्ठ संत कृपालुराम दास उर्फ पंजाबी बाबा।
भरतजी काे चित्रकूट जाते देख भावुक हो उठे छावनी के वरिष्ठ संत कृपालुराम दास उर्फ पंजाबी बाबा।

भरत का राम के प्रति अगाध प्रेम को याद कर संत हुए भावुक
भरत यात्रा चित्रकूट के लिए रवाना हुई तो भगवान की वन यात्रा और भरत का उनके प्रति अगाध प्रेम को याद कर संत भावुक हो उठे। इससे पहले वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच भरत और शत्रुघ्न के स्वरूप का पूजन महंत कमलनयन दास और कृपालुराम दास उर्फ पंजाबी बाबा ने किया। यात्रा में अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष और सनकादिक आश्रम के महंत कन्हैया दास रामायणी बीमार होने के कारण शामिल नहीं हो सके। महंत रामशरण दास व्यास ने बताया कि यात्रा के साथ दो बसों में 100 संत रवाना हो रहे हैं। यात्रा रवाना होने से पहले मणिराम दास जी की छावनी में भजन और शंखनाद भी हुआ। समाजसेवी और भाजपा नेता विनोद कुमार वैश्य ने भरत और संतों की आरती की।

यात्रा रवाना होने से पहले भजन और शंखनाद हुआ। ढोल-नगाड़ों की धुन से दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे।
यात्रा रवाना होने से पहले भजन और शंखनाद हुआ। ढोल-नगाड़ों की धुन से दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे।

25 नवंबर तक चलेगी यात्रा
यात्रा व्यवस्थापक स्वामी विमलकृष्ण दास और महंत परमात्मा दास ने बताया कि भरत यात्रा से 48 वर्षों से धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन होता आ रहा है। पिछले वर्ष कोरोना महामारी के कारण यात्रा में व्यवधान आ गया था। इस बार यह यात्रा प्रारंभ होकर 25 नवंबर तक चलेगी।

संतों के साथ रामभक्तों ने भी किया भरत और शत्रुघ्न के स्वरूपों का पूजन। जगह-जगह हुई पुष्प वर्षा।
संतों के साथ रामभक्तों ने भी किया भरत और शत्रुघ्न के स्वरूपों का पूजन। जगह-जगह हुई पुष्प वर्षा।

भगवान श्रीराम के उदात्त चरित्र से मिलती है प्रेरणा
महंत कमलनयन दास ने बताया कि वर्तमान में भारतीय संस्कृति और परंपराओं पर सर्वत्र प्रहार हो रहा है। पारिवारिक विषमताएं चरम सीमा तक पहुंच चुकी हैं। ऐसे समय भगवान श्रीराम के उदात्त चरित्र से सभी को प्रेरणा मिलती है। पारस्परिक भातृभाव, गुरुजनों का आदर एवं मर्यादा, मानव धर्म की पूर्ण शिक्षा भगवान श्रीराम के आदर्शों से मिलती है। इसी लक्ष्य को लेकर प्रभुदत्त ब्रम्हचारी महाराज की प्रेरणा से भरत यात्रा चली आ रही है। इस वर्ष की यात्रा में महंत कमलनयन दास, महंत रामशरण दास रामायणी, महंत रामगोपाल दास आदि संत-महात्माओं का मार्गदर्शन मिलेगा।

नयागांव चित्रकूट में भरतयात्रा का होगा विश्राम
भरत यात्रा श्री मणिरामदास जी की छावनी से प्रस्थान करने के बाद पहला विश्राम भरत हनुमान मिलन मंदिर नन्दिग्राम में होगा। जहां महंत परमात्मा दास संतों का स्वागत करेंगे। दूसरे दिन यह यात्रा सीताकुंड-सुल्तानपुर से सुबह शनिदेव के लिए प्रस्थान करेगी। दोपहर शनिदेव मंदिर से श्रृंगेश्वर पुर धाम रवाना होगी।

अगले दिन यह यात्रा चित्रकूट पहुंचेगी, जहां श्री बजरंग गोशाला, नयागांव चित्रकूट में भरतयात्रा का विश्राम होगा। बुधवार को कामदगिरि परिक्रमा श्री भरत मिलाप, देव स्थानों का दर्शन कर रामघाट पर रात्रि भोजन होगा। गुरुवार को भरतकूप समेत मुख्य स्थानों का दर्शन कर यात्रा अयोध्या प्रस्थान के लिए वापसी करेगी।

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