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अमेठी में मनाई गई शास्त्री जी व बापू की जयंती:लोगों ने दोनों की प्रतिमाओं पर फूल चढ़ाकर किया नमन, सत्य-अहिंसा की राह पर तलने को किया प्रेरिच

अमेठी तहसील2 महीने पहले
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अमेठी के कई सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं और स्कूलों में महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाया गया। जहां कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने दोनों की प्रतिमाओं पर फूल चढ़ाकर नमन किया। दोनों के बताए गए मार्गों पर चलने के लिए लोगों को प्रेरित किया गया।

संस्थानों में झंडारोहण कर ,राष्ट्रगान किया गया। जिसके उपरांत गांधीजी व शास्त्री जी को नमन किया। रानी सुषमा देवी बालिका इंटर कॉलेज के सहायक अध्यापक रवि शंकर पांडे ने कहा कि गुजरात के पोरबंदर में एक वैष्णव अनुयायी परिवार में जन्मे गांधी जी के जीवन पर कठिन सिद्धांत वाले जैन धर्म का गहरा प्रभाव था। इस कारण सत्य, अहिंसा और आत्म शुद्धि के लिए उपवास आदि महान गुण इन्होंने आसानी से प्राप्त कर लिया।

त्याग, बलिदान के प्रतीक हरिश्चंद्र और भगवान राम को मानते थे नायक
त्याग और बलिदान के प्रतीक हरिश्चंद्र और भगवान श्रीराम जैसे पौराणिक नायक इनके आदर्श थे। इसीलिए गांधी जी के अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलनों में सत्याग्रह, अहिंसा और शांति का दर्शन होता है। अंततः अंग्रेज भारत छोड़ने को मजबूर हो गए। ऐसा उदाहरण विश्व के किसी भी देश के इतिहास में नहीं मिलता है। महात्मा गांधी को दुनिया ने सराहा। उन्होंने जीवन जीने का जो अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

आइंस्टीन ने कहा था कोई विश्वास नही करेगा कि ऐसा कोई धरती पर पैदा हुआ था
उसके लिए अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था कि आगे आने वाली पीढ़ियां बहुत मुश्किल से विश्वास कर पाएंगी कि कोई हड्डी मांस का ऐसा व्यक्ति भी इस धरती पर पैदा हुआ था। उनके सम्मान में संयुक्त राष्ट्र संघ ने 2 अक्टूबर को विश्व अहिंसा दिवस घोषित कर दिया।

छात्रा काव्या पांडे ने बहादुर शास्त्री जी के बारे में बतायाॉ​​​​​​
छात्रा काव्या पांडे ने बताया कि महान देशभक्त लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। ये गांधी जी के कई आंदोलनों के अहम हिस्सा रहे, जेल भी गए तथा बाद में स्वतंत्र भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री बने। इन्होंने कठिन समय जैसे 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश का उचित मार्गदर्शन किया और भारत को विजयश्री प्राप्त हुई।

प्रधानाचार्या ने प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की इमानदारी, सादगी व त्याग के बारे में बताया
प्रधानाचार्या ने कहा कि वर्तमान में देश में पिछले कुछ दशकों में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप नेताओं, मंत्रियों आदि पर लगते रहे हैं। परंतु इसी देश में, एक ऐसे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री भी हुए, जिन्होंने निर्धनता में भी ईमानदारी, त्याग वह सादगी की मिसाल कायम की। ऐसा हमारे बुजुर्ग व किताबें बताती हैं।

कार्यक्रम के अंत में लोगों को यातायात, स्वच्छता के नियमों का पालन करने को कहा गया
कार्यक्रम के अंत में उप प्रधानाचार्य विनोद कुमार तिवारी ने सभी अध्यापक-अध्यापिकाओं व छात्राओं को सड़क पर चलने के नियमों का पालन, नशा मुक्त रहने और अपने आसपास की स्वच्छता के संदर्भ में शपथ दिलाई और अपील करते हुए कहा कि विश्व के सभी लोगों को एक परिवार के रूप में एकजुटता के साथ गांधी व शास्त्री जी के बताए मार्ग पर चलना चाहिए। जिससे विश्व जिन समस्याओं से जूझ रहा है, उनका समाधान हो सके। कार्यक्रम का संचालन शारदा प्रसाद द्विवेदी जी ने किया।

अमेठी के रणवीर इंटर कॉलेज में मनाई गई शास्त्री और बापू की जयंती
अमेठी के रणवीर इंटर कॉलेज में अहिंसा के पुजारी, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और माटी के लाल, सादगी के प्रतिमूर्ति एवं विश्व को देश की शक्ति प्रदर्शित करने वाले स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की जयंती हर्षोल्लास से मनाई गई l इस कार्यक्रम में एन सी सी के बच्चों ने और स्कूलों के बच्चों भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। वहीं इस अवसर पर प्रधानाचार्य राजेश सिंह ने ध्वजारोहण कियाl छात्रों तथा छात्राओं ने निबंध लेखन, चित्रकला, कबड्डी, 100 मीटर दौड़,तथा वॉलीबॉल प्रतियोगिता में भाग लिया। एन.सी.सी. कैडेट्स एवं स्काउट प्रशिक्षणार्थियों के द्वारा विद्यालय परिसर की साफ- सफाई की गई।

प्रधानाचार्य राजेश सिंह ने गांधी जी व शास्त्री जी के बारे में छात्र-छात्राओं को बताया
इस अवसर पर प्रधानाचार्य राजेश सिंह ने बताया गांधी जी जब 1915 में आजादी की लड़ाई में शामिल हुए तब से उनके विभिन्न आंदोलनों ने अंग्रेजों को कई बार घुटने टेकने को मजबूर कर दिया। शास्त्री जी की नैतिकता का उदहारण देते हुए प्रधानाचार्य ने बताया की एक बार बार शास्त्री जी जब रेल मंत्री थे। तब उनके कार्यकाल में रेल दुर्घटना हुई। जिसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया। अतः हमे भी उनके जीवन से नैतिकता सीखनी चाहिए।

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