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अंबेडकरनगर में राइस मिलर्स की हड़ताल:किसानों ने कहा- एक हफ्ते से क्रय केंद्र के बाहर खड़े हैं, नहीं की जा रही तौल

अंबेडकरनगर2 महीने पहले
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अंबेडकरनगर में राइस मिलर्स की हड़ताल। - Money Bhaskar
अंबेडकरनगर में राइस मिलर्स की हड़ताल।

अंबेडकरनगर जिले में बीते एक कई महीने से आंदोलन कर रहे राइस मिलरों के हड़ताल पर चले जाने के बाद धान खरीद पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। इसकी वजह से जिले के अधिकतर खरीद केंद्रों पर धान की तौल बंद है। जिसकी वजह से धान लेकर मंडी पहुंचे किसान अपनी तौल का इंतजार कर रहे हैं।

अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं राइस मिलर्स

हड़ताल कर रहे राइस मिलरों का आरोप है कि प्रशासन जबरन मिलों पर जाकर फोटो खींच कर जियो टैगिंग कर रहा है और राइस मिलरों को धमका रहा है। राइस मिलरों के मुताबिक, क्रय केंद्रों पर जो धान खरीदा जाता है, उस धान में 56 से 60% ही चावल की रिकवरी होती है और सरकार राइस मिलरों से 67% चावल की रिकवरी ले रही है। जिससे राइस मिलरों का काफी नुकसान हो रहा है और राइस मिलर घाटे में जा रहा है।

महंगाई बढ़ी, लेकिन नहीं बढ़ाई गई प्रोत्साहन राशि

बीते दो साल से सरकार की तरफ से प्रति क्विंटल धान की कुटाई में 20 रुपए प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। जबकि 20 वर्षों से लेबर चार्ज, बिजली की कीमत डीजल की कीमत और मिल के पुर्जों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। ऐसे में जो प्रोत्साहन राशि मिल रहीं है वह अनलोडिंग, चावल की भराई एवं लोडिंग में खर्च हो जाता है। इसलिए धान की कुटाई 250 रुपए प्रति क्विंटल की जाए।

राइस मिल का बकाया है भुगतान

बीते कई सालों से विभिन्न एजेंसियां राइस मिलर का भुगतान दबाए बैठी हैं। हड़ताल पर गए राइस मिलर गोविंद अग्रवाल ने कहा कि जब तक मांगें नहीं पूरी होंगी, तब तक सरकारी धान की कुटाई नहीं करेंगे। अब ऐसे में सरकार और राइस मिलरों की लड़ाई में आम किसान परेशान होने को मजबूर हो रहा है। किसान राजेश पांडेय ने कहा कि वह करीब एक हफ्ते से खड़े हैं, लेकिन तौल नहीं की जा रही है।