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सिखों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता:अलीगढ़ में आजादी के अमृत महोत्सव के पर विकास भवन में श्रीगुरु तेग बहादुर प्रकाश पर्व पर हुआ कार्यक्रम

अलीगढ़2 महीने पहले
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विकास भवन में कार्यक्रम के दौरान संबोधित करते वक्ता - Money Bhaskar
विकास भवन में कार्यक्रम के दौरान संबोधित करते वक्ता

भारत भूमि सिखों के बलिदान को कभी भुला नहीं सकती है। सिख धर्म का जन्म मानव सभ्यता की रक्षा के लिए हुआ था और जब भी जरूरत हुई, सिख गुरुओं ने मानवता की रक्षा के लिए अपने बच्चों तक की कुर्बानी दे दी है। सिखों के 9वें गुरु तेग बहादुर का जीवन भी देश, धर्म, मानवीय आदर्शों के लिए हमेशा समर्पित रहा। इसकी रक्षा करने के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। गुरु के इस बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। यह बात बुधवार को गुरु तेग बहादुर के प्रकाश पर्व के मौके पर विकास भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही गई।

चौरी चौरा शताब्दी समारोह पर आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर विकास भवन में श्रीगुरु तेग बहादुर के 400 प्रकाश पर्व पर जत्थेदार भूपेंद्र सिंह ने लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सिख धर्म किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। सिख धर्म का जन्म ही मानव जाति के उत्थान के लिए हुआ है। जब कभी भी धर्म की हानि हुई है, सिखों ने चार कदम आगे बढ़कर राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

गौरव की अनुभूति कराता है सिखों का इतिहास

जिला विकास अधिकारी भरत कुमार मिश्र ने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने धर्म की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था। सिख गुरु के बलिदान का इतिहास गौरव की अनुभूति कराता है। सिख गुरुओं का त्याग और बलिदान आज भी हर भारतीय के मन में श्रद्धा और सम्मान का भाव पैदा करता है। परियोजना निदेशक ग्राम विकास अभिकरण भालचंद्र त्रिपाठी ने कहा कि गुरु तेग बहादुर का सत्य, न्याय और धर्म के लिए दिया गया बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि खालसा पंथ का शौर्य, त्याग और पराक्रम का लंबा इतिहास रहा है। प्रमोद सिंह सेनानी ने कहा कि सिख धर्म मैं सदैव गुरु एवं शिष्य की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सदैव राष्ट्र को एक नई ऊर्जा दी है।

महामारी में सिखों की सेवा सराहनीय

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि कोरोना काल में भी सिख समाज सेवा कार्यों से पीछे नहीं हटा। लोगों के भोजन के लिए लंगर लगाए और ऑक्सीजन की कमी के दौरान लोगों की जान बचाने के लिए ऑक्सीजन के लंगर भी लगाए गए। कृष्णा गुप्ता ने कहा कि सिख धर्म त्याग से भरा हुआ देश भक्तों को समर्पित रहा है। उन्होंने विद्यालयों के पाठ्यक्रम में शहीदों के इतिहास को शामिल करने पर बल दिया।

शहीद-ए-आजम को किया गया याद

भारत माता के लिए हंसते हंसते फांसी पर चढ़ने वाले शहीद-ए-आजम भगत सिंह को भी कार्यक्रम के दौरान याद किया गया और उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। इंजी. वीके गुप्ता ने कहा कि बॉर्डर पर शहीद होने की प्रेरणा सिख गुरुओं से ही प्राप्त होती है। भगत सिंह को याद करते हुए कहा कि फांसी के वक्त उन्होंने अपनी माता से कहा था-मत रो माता, लाल तेरे बहुतेरे....। कर्नल जगरूप सिंह ने कहा कि सिखों के बलिदान से हमें सीखना भी चाहिए और हम सीखे भी हैं। सरहदों पर हमारा जवान यह तो तिरंगा लहरा कर आता है या फिर तिरंगे में लिपट कर आता है। वह खुशनसीब हैं जो तिरंगा लहरा कर आए और उनसे ज्यादा है वह खुशनसीब हैं जो तिरंगा लहराए भी और तिरंगे में लिपट कर भी आए।

शहर के विभिन्न गणमान्य व अधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम के दौरान शहर के विभिन्न गणमान्य, जनप्रतिनिधि व अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान अपर जिला विकास अधिकारी समाज कल्याण संध्या रानी बघेल, डीआईओ सन्दीप कुमार, योगेश प्रकाश, गौतम गुप्ता, राजेंद्र प्रसाद, अमित प्रसाद, नीरज कुमार, सार्जेंट मदन सिंह, चंद्रपाल सिंह, लेफ्टिनेंट जीसी वर्मा, ज्ञानेंद्र सिंह, विनय कुमार, राजेंद्र प्रसाद, गौरव गुप्ता, मोहम्मद शाह जफर, सोनपाल सिंह, राजेश कुमार, थान सिंह समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।