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मॉकड्रिल : अस्पताल में व्यवस्था पूरी, कर्मचारियों की तैयारी अधूरी:कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय में हुआ मॉकड्रिल, आगरा से आए अधिकारियों ने जांची व्यवस्था

अलीगढ़8 महीने पहले
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मॉकड्रिल के दौरान मरीज को इलाज मुहैय्या कराता अस्पताल की चिकित्सीय टीम - Money Bhaskar
मॉकड्रिल के दौरान मरीज को इलाज मुहैय्या कराता अस्पताल की चिकित्सीय टीम

कोविड की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए शुक्रवार को शासन के निर्देशानुसार मॉकड्रिल किया गया। मॉकड्रिल में कोविड की तैयारियां तो दूरुस्त नजर आई पर स्टाफ तैयार नहीं दिखा। मरीज को भर्ती करने को लेकर स्टाफ में बेहद कंफ्यूजन की स्थिति रही। मॉकड्रिल के बाद नोडल अधिकारी संयुक्त निदेशक आगरा मंडल प्रदीप शर्मा ने स्टाफ की मीटिंग कर उन्हें हफ्ते में दो दिन पीकू वार्ड में काम करने सुझाव दिए।

इस बार एंबुलेंस में लाया गया मरीज

बीते 27 अगस्त को हुई मॉकड्रिल में न एंबुलेंस आई थी और न ही कर्मचारियों ने पीपीई किट पहनी थी। लेकिन इस बार विभाग ने इन कमियों को दूर किया। मरीज को एंबुलेंस से जिरियाट्रिक वार्ड के पास लाया गया। मरीज को स्ट्रेचर पर रखकर भर्ती डेस्क पर लाया गया। जहां बच्चे का तापमान और आक्सीजन सेचुरेशन चेक किया गया। जिसके बाद बच्चे को पीकू वार्ड में भर्ती करने के लिए भेजा गया।

दिखी लपरवाही, वजन जांचना भूले

मॉकड्रिल में कर्मचारियों की लापरवाही भी नजर आई। मरीज का वजन नापे बिना ही स्वास्थ्य कर्मी उसे इलाज देने लगे। जबकि विभागीय गाइडलाइन के अनुसार पीकू वार्ड में बच्चों भर्ती करने से वजन किया जाना चाहिए। शुक्रवार को जब बच्चे को भर्ती किया गया तो उसका वजन नहीं किया गया। जिस पर नोडल अधिकारी स्टाफ से सवाल किया, जिसके बाद गलती को सुधार करते हुए बच्चे का वजन चेक किया गया। जिसका वजन 14 किलो आया। वहीं बच्चे को बेड पर सिफ्ट कर कैनुला ड्रिप आदि लगाने की प्रक्रिया करनसी थी। लेकिन गैलरी में ही कैनुला और ड्रिप लगाने लगे। बेड पर कैनुला खोल के रखने पर नोडल अधिकारी दूसरा लगाने का निर्देश दिया।

नर्स नहीं दे पाई वार्मर की जानकारी

पीकू वार्ड में चार दस बेड का एनआईसीयू वार्ड बनाया गया है, जिसमें नवजात बच्चों के लिए चार वार्मर रखे गए है। नोडल अधिकारी ने स्टाफ नर्स से वार्मर को चालू कराया और बच्चों को थर्मामीटर कहां लगाना, कैसे लगाना है, तापमान कैसे मेंटेन रखना आदि की जानकारी मांगी जिसपर स्टाफ नर्स जानकारी नहीं दे पाई। उन्होंने कहा कि वार्मर को ऑटोमैटिक ही रहने दे, मैनुअल कभी न करें। नहीं तो बच्चा जल भी सकता है।

ऑक्सीजन प्लांट का नहीं हुआ निरीक्षण

मॉकड्रिल के तहत सऑक्सीजन प्लांट का निरीक्षण किया जाना था। लेकिन नोडल अधिकारी द्वारा ऑक्सीजन प्लांट का निरीक्षण नहीं किया गया। साथ ही बच्चे को करने के दौरान कई कमियों पर नोडल अधिकारी डॉक्टर स्टाफ नर्स को टोका।

27 अगस्त को अधूरी थी तैयारियां

इससे पहले शासन के निर्देशानुसार 27 अगस्त को मॉक ड्रिल हुआ था। उस समय विभाग की तैयारियां अधूरी थी और अस्पताल में कुछ आवश्यक दवाइयों की भी कमी थी। जिसके बाद शासन से आए अधिकारियों ने दवाइयों की डिमांड बनाकर भेजने के निर्देश दिए थे।

यह तैयारियां दिखी दुरुस्त

-पीपीई किट में तैनात रहे स्टाफ

-तापमान और ऑक्सी मीटर रहा मौजूद

-एंबुलेंस में आया मरीज

-इमरजेंसी ट्रे सिक्वेंस में थी दवाएं

-मरीज की पूरी डिटेल पर्चे पर लिखी गई

-वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की पूरी रही व्यवस्था

इन सुधारों की दिखी जरूरत

-स्टाफ को और ट्रेनिंग की जरूरत

-ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का डिस्पले

-कौन सा मरीज कहा भर्ती होगा स्पष्ट हो

-ऑक्सीजन पल्स कम होने पर आईसीयू या एचडीयू में भर्ती होगा मरीज

-लॉजिस्टक कहां है स्टाफ को पूरी जानकारी

-स्टाफ की कमी को सुधारा जाए