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अलीगढ़ के स्मार्ट ताले अब चीन को देंगे चुनौती:ताइवान की तकनीक से अलीगढ़ बनाएगा नेक्स्ट जेनरेशन लॉक, 4 हजार करोड़ का कारोबार

अलीगढ़9 महीने पहलेलेखक: रोहित शर्मा
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अलीगढ़ में अब नेक्स्ट जेनरेशन के स्मार्ट ताले बनेंगे, जो इंटरनेशनल मार्केट में चीन को टक्कर देंगे। इंटरनेशनल मार्केट में डिजिटल और बॉयोमैट्रिक ताले सप्लाई करने में अभी चीन का दबदबा है। जबकि अलीगढ़ में बनने वाले मैकेनिकल ताले ही विदेशों में सप्लाई किए जा रहे हैं, जिनकी मांग धीरे-धीरे घटती जा रही है। ताइवान की आधुनिक तकनीक से अब अलीगढ़ भी नेक्स्ट जेनरेशन के लॉक तैयार करेगा।

अब ताइवान की तकनीकी से बनेंगे सेंसर लॉक
नेक्स्ट जेनरेशन के ताले बनाने में ताइवान को महारथ हासिल है। इसके साथ दुनिया में यह तकनीकी भी सिर्फ ताइवान के पास ही है। आईआईए (इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन) के सचिव व एक्सपोर्टर मनीष बंसल ने बताया कि आईआईए ने ताइवान से तकनीक ट्रांसफर कराने को लेकर बातचीत शुरू की थी जिससे कि स्मार्ट सेंसर लॉक अलीगढ़ में तैयार किए जाएंगे। ताइवान का प्रतिनिधि मंडल 25 नवंबर यानी आज अलीगढ़ आएगा और तालानगरी में लगी विभिन्न यूनिटों का भ्रमण भी करेगा।

ताइवान की तकनीकी मिलने के बाद अब अलीगढ़ में भी तैयार होंगे स्मार्ट ताले।
ताइवान की तकनीकी मिलने के बाद अब अलीगढ़ में भी तैयार होंगे स्मार्ट ताले।

यह हैं नेक्स्ट जेनरेशन के स्मार्ट लॉ की खूबियां

  • स्मार्ट लॉक चिप बेस होते हैं और इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) तकनीकी पर काम करते हैं।
  • चाबी वाले स्मार्ट ताले सिर्फ अपनी चाभी से खुलते हैं, इनकी डुप्लीकेट चाभी तैयार नहीं हो सकती।
  • इन तालों को चाभी के अलावा स्मार्ट कार्ड, बॉयोमैट्रिक वैरिफिकेशन (चेहरे, फिंगर प्रिंट या फेस रीडिंग) के जरिए कंट्रोल किया जाता है।
  • स्मार्ट लॉक को यूजर अपने मोबाइल से भी कंट्रोल कर सकते हैं।
  • नेक्स्ट जेनरेशन तालों को लोग अपने घर से दूर होकर भी मोबाइल से कंट्रोल कर सकते हैं।
  • अगर इन तालों को कोई तोड़ने की कोशिश करता है तो यह जोरदार सायरन बजाते हैं, जिससे लोगों को इसका पता चल जाता है।
वर्तमान में चीन ने ताले एक्सपोर्ट करने में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया है।
वर्तमान में चीन ने ताले एक्सपोर्ट करने में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया है।

इंटरनेशनल मार्केट में चीन का है वर्चस्व
अलीगढ़ के ताले आज भी मैकेनिकल व हाथों से तैयार किए गए होते हैं। लेकिन चीन में तैयार होने वाले ताले आधुनिक तकनीकी के ट्यूबलर लॉक, स्मार्ट लॉक और वायर लॉक हैं। इसके साथ ही चीन ने अपने प्रोडक्ट काफी सस्ते में भी बाजार में उतारे हैं। जिसके कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग काफी बढ़ चुकी है। लेकिन अलीगढ़ में स्मार्ट लॉक्स बनने के बाद भारत भी चीन को बराबरी की टक्कर दे सकेगा।

अलीगढ़ में अभी तैयार होते हैं मैकेनिकल ताले
अपने तालों की मजबूती के लिए देश विदेश में ख्याती प्राप्त अलीगढ़ में वर्तमान में सिर्फ मैकेनिकल ताले तैयार किए जाते हैं। ये ताले फिजिकल होते हैं और इन्हें चाभी से ही बंद और खोला जाता है। जबकि अब नेक्स्ट जेनरेशन लॉक्स यानी डिजिटल व बॉयोमैट्रिक लॉक्स का समय आ चुका है।

बड़े मेट्रो शहर, महानगर, पांच व सात सितारा होटल, बिजनेस कार्यालयों में अब इन मैकेनिकल तालों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। जिसके कारण देश के अंदर तो इन तालों की मांग घटी है। इसके साथ तालानगरी अलीगढ़ का वर्चस्व अंतर्राष्ट्रीय बाजार में लगातार कम हो रहा है और तालों का एक्सपोर्ट भी घट रहा है।

सुनीत दत्ता, जनरल सेक्रेट्री, तालानगरी औद्योगिक विकास एसोसिएशन।
सुनीत दत्ता, जनरल सेक्रेट्री, तालानगरी औद्योगिक विकास एसोसिएशन।

1990 के बाद एक्सपोर्ट में आने लगी कमी
अलीगढ़ के तालानगरी औद्योगिक विकास एसोसिएशन के जनरल सेक्रेट्री सुनील दत्ता ने बताया कि 1990 तक अलीगढ़ के तालों का सारी दुनिया में वर्चस्व था। अलीगढ़ के ताले इंग्लैंड, अमेरिका, जर्मनी, इटली, फ्रांस समेत दुनिया के कई देशों में एक्सपोर्ट किए जाते थे। लेकिन इसके बाद धीरे धीरे यहां से होने वाला एक्सपोर्ट कम होने लगा। 2005 आते आते चाइनीज माल बाजार में आने लगा और चाइना के तालों ने 40 प्रतिशत बाजार को कब्जे में ले लिया। धीरे धीरे यह बढ़ता गया और आज स्थिति काफी ज्यादा खराब हो चुकी है। इसका कारण यह है कि अलीगढ़ के ताले आज भी मैकेनिकल ही हैं।

4000 करोड़ का टर्नओवर, एक्सपोर्ट सिर्फ 5 फीसदी
एसोसिएशन के जनरल सेक्रेट्री सुनील दत्ता ने बताया कि अलीगढ़ में 6000 जीएसटी नम्बर धारक व्यापारी है, जो ताले बनाते हैं। जिससे ताला उद्योग का सालाना टर्नओवर लगभग 4000 करोड़ रुपए का है। लेकिन इसकी तुलना में एक्सपोर्ट 5 प्रतिशत भी नहीं बचा है। जिसके चलते अब आईआईए ने ताइवान की मदद से स्मार्ट लॉक तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है।

वर्तमान में अलीगढ़ में मैकेनिकल ताले बनते हैं। कुछ बड़े उद्यमी स्मार्ट लॉक्स बनाते हैं, लेकिन उसके सारे पार्ट्स दूसरे देशों से आते हैं, जिन्हें अलीगढ़ में सिर्फ एसेंबल ही किया जाता है। वर्तमान में स्मार्ट लॉक बनाने की अपनी तकनीकी नहीं है।
वर्तमान में अलीगढ़ में मैकेनिकल ताले बनते हैं। कुछ बड़े उद्यमी स्मार्ट लॉक्स बनाते हैं, लेकिन उसके सारे पार्ट्स दूसरे देशों से आते हैं, जिन्हें अलीगढ़ में सिर्फ एसेंबल ही किया जाता है। वर्तमान में स्मार्ट लॉक बनाने की अपनी तकनीकी नहीं है।

जानिए इतिहास: मुगल काल से बनते हैं अलीगढ़ में ताले
अलीगढ़ में बनने वाले तालों के इतिहास पर जाए तो इसका कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है। लेकिन यह माना जाता है कि अलीगढ़ में मुगल काल से तालों का निर्माण किया जा रहा है। वहीं कुछ का कहना है कि जब अंग्रेज यहां आए तो उन्होंने यहां जॉनसन कंपनी की स्थापना की जो इंग्लैंड से ताला इंपोर्ट कर यहां बेचती थी। जिसके बाद यहां 1890 में ताला बनाने के लिए कारखाने की स्थापना की गई। यहां के विंटेज ताले भी दुनिया भर में अपनी आकर्षक खूबियों के लिए जाने जाते हैं।

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