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अखिलेश के मंदिर वाले बयान पर केंद्रीय मंत्री का पलटवार:बोले- सपा अध्यक्ष बताएं वो किस धर्म के हैं, उनकी दिक्कत है कि वो खुद को सीएम समझते हैं

आगराएक महीने पहले
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केंद्रीय राज्यमंत्री ने अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार किया है। उनका कहना है कि अखिलेश का बयान हिंदू धर्म का अपमान है। - Money Bhaskar
केंद्रीय राज्यमंत्री ने अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार किया है। उनका कहना है कि अखिलेश का बयान हिंदू धर्म का अपमान है।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के हिंदू धर्म में पेड़ के नीचे पत्थर रखने और लाल झंडा लगाने पर मंदिर बनाने के बयान पर केंद्रीय कानून राज्यमंत्री व आगरा के सांसद प्रो. एसपी सिंह बघेल ने पलटवार किया है। उन्होंने अखिलेश यादव से सवाल किया है अखिलेश बताएं कि वो किस धर्म के हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के साथ दिक्कत है कि वो अभी तक मानसिक रूप से अपने आप को मुख्यमंत्री ही मानते हैं।

केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के साथ केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल।
केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के साथ केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल।

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या में बयान दिया था कि हिंदू धर्म में कहीं भी पीपल के पेड़ के नीचे पत्थर रख दो। उस पर एक लाल कपड़ा लगा तो वो मंदिर बन जाता है। उनके इस बयान पर केंद्रीय मंत्री ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि अखिलेश यादव ये बताए कि वो किस धर्म से हैं। वो भी हिंदू समाज से हैं।

उन्हें ऐसी बात नहीं करनी चाहिए। उनका ये बयान हताशा और निराशा भरा है। उनके इस बयान की निंदा करते हैं। ये बयान हिंदू सनातन धर्म का अपमान हैं। हिंदू समाज में किसी भी जगह मंदिर नहीं बनाया जाता। इसके लिए बकायदा मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। केवल पजेशन के लिए हिंदुओं ने कभी भी मूर्ति को नहीं रखा है।

अखिलेश खुद को सीएम समझते हैं
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के साथ एक बड़ी समस्या है कि 2012 में जब से वो मुख्यमंत्री बने तब से वो मानसिक रूप से अभी तक अपनी कुर्सी से हटे नहीं है। वो 2017 और 2022 में हार चुके हैं। इसके बाद भी अभी भी उनको लगता है कि वो मुख्यमंत्री ही हैं।

वहीं, उन्होंने ओवैसी पर भी निशाना साधा। उन्होंने ज्ञानवापी में ओवैसी के अब एक इंच जमीन न देने के बयान पर कहा कि ओवैसी लेने और देने वाले कोई नहीं होते हैं। ये देश भीड़तंत्र से नहीं बल्कि लोकतंत्र से चलेगा। अगर उन्हें कोई दिक्कत है तो उच्च न्यायालय जा सकते हैं। ये देश धमकियों से नहीं बल्कि कानून से चलेगा।

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