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आगरा...पेपर लीक करने वाले कॉलेज की कारगुजारी:पहले इंटर फेल को प्राचार्य बनाकर पेपर लीक कराया, फिर किसान को बना दिया कार्यवाहक प्राचार्य

आगराएक महीने पहले
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आगरा के डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की परीक्षा का पेपर लीक करने वाले कॉलेज में नियमों को ताक पर रख दिया गया। - Money Bhaskar
आगरा के डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की परीक्षा का पेपर लीक करने वाले कॉलेज में नियमों को ताक पर रख दिया गया।

आगरा के डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की परीक्षा का पेपर लीक करने वाले कॉलेज में नियमों को ताक पर रख दिया गया। पेपर लीक होने के बाद जब पुलिस कॉलेज में जांच को पहुंची तो पता चला कि कॉलेज का प्राचार्य तो किसान है। उसे पहले वाले इंटर फेल को प्राचार्य बना रखा था। एक के बाद एक गड़बड़ी सामने आने के बाद विश्वविद्यालय ने कॉलेज की संबद्धता समाप्त कर दी है।

आगरा कॉलेज के बाहर 11 मई को छात्र-छात्राओं को बीएससी जूलॉजी और गणित का पेपर सॉल्व करते हुए देखा गया था। इस संबंध में कॉलेज की ओर से थाना लोहामंडी में मुकदमा दर्ज कराया गया था। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने पेपर लीक होने पर नाराजगी जताते हुए पुलिस को 48 घंटे में आरोपियों को पकड़ने का अल्टीमेटम दिया था।

पेपर लीक करने वाला इंटर फेल प्राचार्य अनेक सिंह।
पेपर लीक करने वाला इंटर फेल प्राचार्य अनेक सिंह।

इस मामले पुलिस को छानबीन में पेपर लीक होने के तार अछनेरा के श्रीहरचरण लाल महाविद्यालय से जुड़े मिले। इसमें पहले एक शिक्षक अनेक सिंह का नाम सामने आया। जब उसके बारे में छानबीन की गई तो पता चला कि वो इंटर फेल है और कॉलेज का प्राचार्य है। कॉलेज प्रबंधन ने भनक लगने पर अपने आप को बचाने के लिए अनेक सिंह को निलंबित कर दिया।

किसान को बना दिया प्राचार्य
लोहामंडी थना प्रभारी देवेंद्र शंकर पांडेय ने बताया कि 16 मई को टीम जब कॉलेज पहुंची तो वहां पर अनेक सिंह की जगह जगवीर मिला। उसने पुलिस को बताया कि वो कॉलेज का प्राचार्य है। पुलिस ने जब उससे पेपर लीक होने के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसे कोई जानकारी नहीं है। उसे एक दिन पहले ही कार्यवाहक प्राचार्य बनाया गया है। उनकी शैक्षिक योग्यता पूछी तो उसने बताया कि वो एमए पास है। वो कॉलेज प्रबंधक अशोक कुमार के गांव का है। गांव में ही खेती करता है। प्रबंधक ने उसे प्राचार्य पद पर नियुक्त करने का पत्र भी जारी किया था।

विवि ने समाप्त की संबद्धता
पेपर लीक होने के बाद विवि की ओर से कॉलेज की संबद्धता को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया गया है। सवाल विवि की कार्यशैली पर भी खडे़ हो रहे हैं। आखिर विवि प्रशासन ने कॉलेज में काम करने वाले शिक्षकों की पात्रता की जांच क्यों नहीं की।

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