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आगरा के अधिवक्ता कश्मीरी छात्रों की पैरवी को तैयार:आल इंडिया लॉयर्स यूनियन की आगरा शाखा ने मुकदमा लड़ने का लिया निर्णय

आगरा:6 महीने पहले
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आल इंडिया लायर्स यूनियन की आगरा शाखा के सदस्य अधिवक्ताओं ने मंगलवार को तीनों छात्रों की पैरवी करने की बात कही। - Money Bhaskar
आल इंडिया लायर्स यूनियन की आगरा शाखा के सदस्य अधिवक्ताओं ने मंगलवार को तीनों छात्रों की पैरवी करने की बात कही।

टी-20 विश्वकप में पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाने के आरोप में जेल भेजे गए तीन कश्मीरी छात्रों का मुकदमा अब आगरा के अधिवक्ता लड़ने को तैयार हो गए हैं। आल इंडिया लायर्स यूनियन की आगरा शाखा के सदस्य अधिवक्ताओं ने मंगलवार को तीनों छात्रों की पैरवी करने की बात कही। संस्थान से इस तथ्य की पुष्टि होने के बाद कि कश्मीरी छात्रों ने न तो पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए, न ही भारत विरोधी नारे लगाए। उन्होंने छात्रों की पैरवी करने का निर्णय लिया है।

विधिक सहायता अभियुक्त का अधिकार
आल इंडिया लायर्स यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष अरुण सोलंकी एवं आगरा शाखा के वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेद्र रावत, अमीर अहमद व सतीश भदौरिया ने मंगलवार को बैठक की। उन्होंने अपने संयुक्त बयान में कहा कि सभी अधिवक्ता नियमों व पेशे के सिद्धांतों के अधीन अपने कर्तव्य का पालन करते हैं। ये नियम व सिद्धांत किसी भी अधिवक्ता संगठन या समूह को इस बात की इजाजत नहीं देते कि वह सामूहिक रूप से यह निर्णय लें व अन्य अधिवक्ताओं को बाध्य करें कि वे किसी अभियुक्त की न्यायालय में पैरवी न करें।

आल इंडियन लायर्स यूनियन के सदस्यों ने कहा कि किसी भी अधिवक्ता को ये अधिकार है कि वह किसी की पैरवी करने से इंकार कर सकता है। मगर, ऐसा निर्णय सामूहिक रूप से नहीं लिया जा सकता। न ही अन्य अधिवक्ताओं को ऐसा करने पर बाध्य ही किया जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय भी इस संबंध में निर्णय पारित कर चुका है। प्रत्येक अभियुक्त को विधिक सहायता प्राप्त होना उसका विधिक अधिकार है। इसमें किसी को बाधा डालने का अधिकार प्राप्त नहीं है।

कुछ अधिवक्तओं ने जो निर्णय लिया है कि वे इन छात्रों की पैरवी नहीं करेंगे, वह दुर्भाग्य पूर्ण है। यूनियन की आगरा शाखा के सदस्यों ने कहा कि इन छात्रों की ओर से हम लोगों की पैरवी के लिए अधिवक्ता नियुक्त किया जाता है तो वह उनकी ओर से मुकदमा लड़ने को तैयार हैं।

कई अधिवक्ता संगठनों ने किया था इंकार
देश विरोधी टिप्पणी के चलते आगरा के कई अधिवक्ता संगठनों ने सामूहिक रूप से कश्मीरी छात्रों का मुकदमा न लड़ने का निर्णय लिया था। अधिवक्ताओं के इस निर्णय पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर छात्र संगठन ने तीनों छात्रों के मुकदमे की पैरवी के लिए मथुरा के अधिवक्ता को चुना था।

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