पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

पर्यटकों को लुभाती हैं हजारों अफ्रीकी कैटफिश:हमेरपाल तालाब में मछलियों का रोमांच, पर्यटक हाथों से खिलाते है दाना, शिकार पर रोक

राजसमंद/नाथद्वारा8 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
कुंभलगढ़ स्थित हमेरपाल तालाब में मछलियों का रोमांच, पर्यटक दाना डालते हुए।

जिले के कुंभलगढ़ क्षेत्र में स्थित हमेरपाल तालाब में अफ्रीकन कैटफिश प्रजाति की मछलियां पर्यटकों को रोमांचित करती हैं। कुंभलगढ़ घूमने आने वाले पर्यटक इस तालाब पर आकर मछलियों का रोमांच देख काफी खुश हो उठते हैं। सैलानी जैसे ही दाना डालते हैं तो मछलियां खाने के लिए पानी से उपर आ जाती हैं।

यह तालाब कुंभलगढ़ दुर्ग जाने वाले रास्ते के केलवाड़ा चौराहे से करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर है। इसका निर्माण 13वीं शताब्दी में राजा हमेरसिंह ने कराया था। इसलिए इस तालाब को हमेरपाल के नाम से जाना जाता है। इसके किनारे घाट बने हुए हैं। साथ ही भगवान लक्ष्मीनारायण का मंदिर बना हुआ है।

ग्रामीणों की आस्था, नहीं करने देते शिकार

तालाब में मछलियां पकड़ने पर पाबंदी है। ग्रामीण मछलियों की देखरेख करते हैं। ग्रामीणों के प्रयास से ही यहां मछलियों का शिकार नहीं हो पाता है। 12 साल पहले इस तालाब में मत्स्याखेट का ठेका पंचायत समिति की ओर से होना था, लेकिन ग्रामीणों ने पास में मंदिर बताते हुए ठेका निरस्त करवा दिया था। तब से यहां मछली पालन का ठेका नहीं होता है।

मछलियों की देखरेख करने के साथ ही शिकार नहीं हो, इसका ध्यान ग्रामीण रखते हैं।
मछलियों की देखरेख करने के साथ ही शिकार नहीं हो, इसका ध्यान ग्रामीण रखते हैं।

ग्रामीणों को मिला रोजगार
कुंभलगढ़ दुर्ग घूमने आने वाले सैलानी इस तालाब में मछलियों को देखने अवश्य आते हैं। तालाब में मछलियों की भरमार और देसी, विदेशी पर्यटक आने से स्थानीय ग्रामीणों को भी रोजगार मिलने लगा है। ग्रामीण तालाब के पाल पर बैठकर दाना, मुरमुरे, नमकीन आदि बेचते हैं।

12 साल पहले आई थी तालाब में मछलियां
ग्रामीण बताते हैं कि इस तालाब में किसी ने 12 साल पहले अफ्रीकी कैटफिश लाकर डाली थी। इसके बाद धीरे-धीरे तालाब में मछलियां बढ़ती गई। साथ ही ग्रामीणों का प्रेम भी मछलियों से बढ़ने लगा। तालाब में ज्यादा मछलियां हो जाने से पर्यटक भी आने लगे और दाना खिलाने लगे तो ग्रामीणों को रोजगार का नया साधन मिल गया। ग्रामीणों ने सर्वसहमति से निर्णय लेकर मछलियों के शिकार पर रोक लगा दी।