पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

मंत्री नहीं बनाने पर भड़के 6 बार के MLA दयाराम:CM को लिखा लेटर, बोले- मंत्री बनने की योग्यता बताएं; मेरा स्टूडेंट सुखराम मंत्री, मैं नहीं

उदयपुर9 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
दयाराम परमार। - Money Bhaskar
दयाराम परमार।

राजस्थान में मंत्रिमंडल गठन के बाद कांग्रेसी विधायकों में असंतोष के स्वर फूटने लगे हैं। उदयपुर से खेरवाड़ा के विधायक दयाराम परमार को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। अब उनका दर्द सामने आया है। उन्होंने रविवार को मंत्रिमंडल गठन के बाद सीएम अशोक गहलोत को लेटर लिखकर पूछा है कि मंत्री बनने के लिए क्या योग्यता जरूरी होती है, यह बताया जाए? परमार ने पूछा कि ऐसा लगता है कि मंत्री बनने के लिए कोई विशेष योग्यता की जरूरत होती है। कृपया हमें बताने की कृपा करें कि वह विशेष काबिलियत क्या है? ताकि उसे हासिल करके भविष्य में मंत्री बनने की कोशिश की जा सके।

दयाराम परमार 6 बार के विधायक रहे हैं। अशोक गहलोत की 1998 और 2008 सरकार में परमार राज्यमंत्री रहे थे। मगर इस बार उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। 2018 विधानसभा चुनाव में परमार ने 26 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी। परमार 1965 में सरपंच बने थे।

दयाराम परमार का मुख्यमंत्री को पत्र।
दयाराम परमार का मुख्यमंत्री को पत्र।

वनमंत्री सुखराम विश्नोई मेरे छात्र रहे हैं
भास्कर से बातचीत में परमार ने कहा कि मुझे मंत्री नहीं बनाया गया, इसका मुझे अफसोस नहीं। बांसवाड़ा जिले से दो मंत्री बने हैं और भी कई मंत्री हैं। मुझे कम से कम यह तो बताया जाए कि मंत्री बनने की क्या योग्यता होती है? क्या वो मुझमें नहीं है? परमार ने कहा कि वनमंत्री सुखराम विश्नोई मेरे छात्र रहे हैं। वो मंत्री हैं, उन्हें मैंने पढ़ाया है।

जौहरीलाल मीणा ने भी किया था विरोध
अलवर ग्रामीण सीट से कैबिनेट मंत्री बनाए गए टीकाराम जूली के विरोध में कांग्रेस के ही अलवर के रामगढ़-लक्ष्मणगढ़ से वरिष्ठ विधायक जौहरीलाल मीणा खुलकर सामने आए थे। जौहरीलाल मीणा ने टीकाराम जूली पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाए जाने पर अलवर के लिए काला दिवस बताया था। जौहरीलाल ने कहना था कि हमें पार्टी और लीडर से कोई नाराजगी नहीं है। मंत्री से नाराजगी है।