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विराेध:मीरा कन्या महाविद्यालय के कर्मचारियों को 97 माह से नहीं मिला 2 कराेड़ रुपए वेतन, कार्य बहिष्कार शुरू

संगरिया9 महीने पहले
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  • काॅलेज के 17 कर्मचारी 8 वर्ष से परेशान, छात्राओ के एडमिशन का काम राेका, एसडीएम काे बताई समस्या

मीरा कन्या महाविद्यालय के कर्मचारियों को 97 माह का वेतन नहीं मिला है। इससे परेशान कर्मचारियों ने अब काम नहीं करने का ऐलान कर दिया। खास बात यह है कि कॉलेज में काम कर रहे सभी 17 कर्मचारियों का 97 माह का वेतन लगभग दो करोड़ रुपए बताया जा रहा है। कर्मचारियों ने एकजुट होकर कहा कि जब तक उन्हें वेतन नहीं मिलेगा, तब तक छात्राओं के एडमिशन व अन्य कार्य नहीं करेंगे। सभी कर्मचारियों ने एसडीएम रमेश देव के नाम ज्ञापन साैंपा और काॅलेज की स्थिति के बारे में अवगत करवाया।

ज्ञापन में प्राचार्य हरमेंद्रसिंह गर्चा, व्याख्याता कृष्णा जैन, मनदीपकौर, सुमन, परमिंद्र कौर, मनीषारानी, ज्योति, कर्मचारी सीताराम, बैजनाथ, महेंद्र, शीला, संतोष, मनबहादुर आदि ने ज्ञापन में बताया कि 31 अगस्त 2013 से आज तक 97 महीने गुजर जाने के बाद भी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला। कर्मचारियों काे वेतन देने के संबंध में आयुक्त कॉलेज शिक्षा व नोडल अधिकारी प्राचार्य एनएम पीजी महाविद्यालय हनुमानगढ़ को लगातार पत्रों के माध्यम से अवगत करवाते रहे। शिक्षा सत्र 2021-22 के प्रवेश अभी तक नहीं हुए हैं।

बिना वेतन कार्य करना अब संभव नहीं। इसलिए कर्मचारियों अब निर्णय लिया है कि वेतन नहीं तो काम नहीं। कर्मचारियों ने बताया कि 29 नवंबर तक विश्वविद्यालय की पिछली परीक्षाएं कर्मचारियों ने संपन्न करवा दी। अब प्राचार्य, व्याख्यातागण व अन्य कर्मचारी कार्य बहिष्कार पर रहेंगे। प्राचार्य हरमेंद्रसिंह ने कहा कि बिना पैसे महाविद्यालय चलाना संभव ही नहीं है।

सरकारीकरण के साथ ही शुरू हुई समस्या

महाविद्यालय का सरकारीकरण 31 अगस्त 2013 को हुआ था। उसके पश्चात राज्य सरकार ने 26 सितंबर 2014 को डिनोटिफाई कर दिया। इसके खिलाफ राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में वाद दायर किया गया। हाईकाेर्ट एकलपीठ के निर्णय में महाविद्यालय काे पुन: राजकीय कर दिया गया। राज्य सरकार ने एकलपीठ के निर्णय के विरुद्ध अपील की।

हाईकाेर्ट ने 2 अप्रेल 2018 को दिए निर्णय में एकलपीठ के फैसले को बरकरार रखते हुए महाविद्यालय के अस्तित्व को राजकीय माना और व्यवस्था दी कि यदि राज्य सरकार चाहे तो महाविद्यालय को तीन माह के भीतर पत्र व्यवहार कर पुन: डिनोटिफाई किया जा सकता है। परंतु 2 जुलाई 2018 को तीन माह का यह समय बीतने के बावजूद इसे डिनोटिफाई नहीं किया गया। 10 जुलाई 2019 को बजट घोषणा में महाविद्यालय के अस्तित्व को पुन: सरकारी कर दिया गया। 3 सितंबर 2021 को काॅलेज का नाम मीरा कन्या राजकीय महाविद्यालय संगरिया कर दिया गया।

97 माह बिना वेतन गुजारे, अब मजबूरन कार्य बहिष्कार

कॉलेज के कर्मचारी 97 माह से बिना वेतन काम कर रहे हैं। अब कर्मचारियों ने फैसला लिया है कि वेतन नहीं तो काम नहीं। फिलहाल कर्मचारियों ने कार्य का बहिष्कार कर दिया है। सरकार से एडमिशन के लिए कोई भी दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। सरकार कर्मचारियों को वेतन और एडमिशन के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करे। -डॉ. हरमेंद्रसिंह गर्चा, प्राचार्य

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