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विवाद समाप्ति की ओर:अरोड़वंश ट्रस्ट के संविधान में किए गए संशोधन वापस लिए

श्रीगंगानगर4 महीने पहले
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  • संरक्षक मंडल व 21 सदस्यीय समन्वय समिति के आग्रह पर ट्रस्ट कार्यकारिणी ने लिया निर्णय

श्री अरोड़वंश सनातन धर्म मंदिर ट्रस्ट के संविधान में किए गए संशाेधन काे लेकर कई दिनों से चल रहा विवाद साेमवार काे ट्रस्ट कार्यकारिणी की ओर से लिए गए सकारात्मक निर्णय से अब समाप्त हाेने की ओर अग्रसर है। समाज के बुद्धिजीवियों की 21 सदस्यीय समन्वय समिति व ट्रस्ट के संरक्षक मंडल के आग्रह पर ट्रस्ट ने संशोधनों को वापस लिया है। इस संबंध में साेमवार शाम काे अरोड़वंश भवन (मुकेश ऑडिटोरियम) में आयाेजित सभा में अध्यक्ष कपिल असीजा ने संशाेधन वापस लेने का ऐलान किया।

हालांकि इन संशाेधनाें के विराेध में गठित की गई अराेड़वंश संघर्ष समिति ने ट्रस्ट के इस निर्णय से अनभिज्ञता जताते हुए कहा है कि अराेड़वंश मंदिर के समक्ष धरना मंगलवार काे भी जारी रहेगा। समिति सदस्य नरेश सेतिया ने बताया कि ट्रस्ट कार्यकारिणी की ओर से संघर्ष समिति के किसी सदस्य काे इस निर्णय के बारे में काेई जानकारी नहीं दी गई। इसलिए समिति का आंदाेलन जारी रहेगा।

उल्लेखनीय है कि अराेड़वंश ट्रस्ट जिले में अराेड़वंश समाज की सबसे बड़ी सामाजिक संस्था है। इसका राजनीति में भी विशेष प्रभाव रहता है। ट्रस्ट के संविधान में वर्तमान कार्यकारिणी की ओर से कुछ संशोधन किए, जिसके विराेध में समाज के एक पक्ष ने ट्रस्ट कार्यालय के समक्ष धरना शुरू कर दिया था।

विवाद के चलते समाज में बढ़ती फूट व अन्य समाजों मे जा रहे गलत संदेश को देखते हुए समाज के ही बड़े बुजुर्ग व बुद्धिजीवियों ने इस विवाद को निपटाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए थे। इस विषय कई बार वार्ता विफल भी हुई, लेकिन प्रबुद्धजनों ने प्रयास नहीं छोड़े। 15 दिनों के प्रयासों से आखिर मेहनत रंग लाई।

21 सदस्यीय समन्वय समिति के अध्यक्ष शंकर लाल बत्तरा ने वर्तमान कार्यकारिणी से संशोधन वापस लेने का आग्रह किया, जिसे ट्रस्ट कार्यकारिणी ने स्वीकार कर संशाेधन वापसी का एेलान कर दिया। समन्वय समिति ने ट्रस्ट की कार्यकारिणी की ओर से लिए गए निर्णय की मुक्त कंठ से प्रशंसा की व समय-समय पर उनके द्वारा प्रदत्त सहयोग की भी सराहना की।

अरोड़वंश समाज व ट्रस्ट के हित में किए गए थे संविधान में संशोधन, समाज के आग्रह पर वापस लिए:असीजा

​​​​​​​अरोड़वंश भवन में हुई सभा में समाज के बुजुर्गाें, बुद्धिजीवियाें, ट्रस्ट के संरक्षक मंडल व कार्यकारिणी सदस्यों व साथीगणों का मान-सम्मान रखते हुए उनके किए आग्रह को मानते हुए ट्रस्ट अध्यक्ष कपिल असीजा ने संशोधन वापस लेने की घोषणा की। असीजा ने कहा कि समाज को चुनावों की पीड़ा में न धकेला जाए व अध्यक्ष का सर्वसम्मति से मनोनयन होना चाहिए। जब-जब समाज के चुनाव हुए हैं तो समाज कई भागों में बंटा है व इन संशोधनों को समाज व ट्रस्ट के हित के लिए लिया गया था।

पुनः समाज के प्रबुद्धजनों व ट्रस्ट के संरक्षक मंडल के आग्रह पर इन्हें वापस लेने का निर्णय लिया गया है। पूर्व अध्यक्ष सोनू नागपाल ने किए गए संशोधनों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बताया कि कई वर्षाें से ट्रस्ट के राजनीतिकरण करने के प्रयास हो रहे थे।

सभा में ये लाेग शामिल हुए : सचिव दीपक मिढ्ढा ने बताया कि इस सभा में सूरजभान सरदाना, मांगूराम जसूजा, शंकरलाल बत्तरा, ओम असीजा, कश्मीरी लाल मिढ्ढा, जगदीश दावड़ा, जेएम कामरा, डॉ. दर्शन आहूजा, जुगल डूमरा, पूरनचन्द कालडा, सुदर्शन बत्तरा, मदन जसूजा, अशोक धींगड़ा, सोनू नागपाल, धीरज अदलखा, राजकुमार कक्कड़, रंजन जसूजा उपस्थित रहे।

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