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निपुण भारत मिशन:कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों में साक्षरता-संख्यात्मक कौशल विकसित करेंगे शिक्षक

हनुमानगढ़2 महीने पहले
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  • नई शिक्षा नीति के तहत जिले में काम शुरू, 2325 शिक्षकों को दी जा रही ऑनलाइन ट्रेनिंग, 4 चरण पूरे

नई शिक्षा नीति के तहत जिले भर के प्राइमरी स्कूलों में निपुण भारत मिशन का क्रियान्वयन शुरु हो चुका है। इस कवायद का उद्देश्य कक्षा पहली से तीसरी तक के बच्चों को बेसिक शिक्षा के साथ-साथ संख्यात्मक ज्ञान देना है। शिक्षा विभाग की तरफ से भी जिले से चयनित 2,325 शिक्षकों को ऑनलाइन ट्रेनिंग भी दी जा रही है। ट्रेनिंग के 4 चरण पूरे हो चुके हैं और अभी 12 चरणों में ट्रेनिंग पूरी होनी है।

इसका लाभ कक्षा 1 से 3 तक के 25 हजार बच्चों को मिलेगा। समग्र शिक्षा विभाग के अनुसार इस मिशन का उद्देश्य शिक्षा के साथ साक्षरता और संख्या ज्ञान के लिए सुलभ वातावरण बनाना है, ताकि साल 2026-27 तक हर बच्चा कक्षा तीन तक पढ़ाई, लिखाई और अंकों के ज्ञान में जरूरी निपुणता हासिल कर सके। निपुण भारत को स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा लागू किया जा रहा है। इसके तहत राज्य-जिला-ब्लॉक-स्कूल स्तर पर 5 स्तरीय कार्यान्वयन तंत्र स्थापित किया गया था।

12 चरणों में 2325 शिक्षकों की ट्रेनिंग होगी, 4 चरण पूरे हुए

निपुण भारत अभियान के तहत शिक्षकों की सघन क्षमता निर्माण से उन्हें सशक्त बनाया जाएगा और अध्यापन कला चुनने के लिए अधिक स्वायत्तता प्रदान की जाएगी। ट्रेनिंग के अभी 4 चरण पूरे हुए हैं और 12 चरण होने है। शिक्षा विभाग के अनुसार कम उम्र के बच्चों को जब इस तरह से शिक्षण दिया जाएगा तो बच्चे तेजी से सीखेंगे।

संख्यात्मक ज्ञान के चलते बच्चों की दिमागी क्षमता का भी भरपूर विकास होगा। दरअसल निपुण भारत नेशनल मिशन फाउंडेशन लिटरेसी एंड न्यूमरैसी का हिस्सा है, जिसे स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा लागू किया जाएगा। यह नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वन के लिए उठाए गए कदमों के तहत अहम कदम है।

निपुण भारत का मुख्य उद्देश्य बेसिक शिक्षा और संख्यात्मक ज्ञान वातावरण तैयार करना है। इसके तहत कक्षा पहली से तीसरी के बच्चों को पढ़ाने की ललक बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। इससे जिले के 25 हजार से अधिक बच्चों को फायदा मिलेगा। इसके साथ ही ब्लॉक स्तर पर 2325 शिक्षकों को ऑनलाइन ट्रेनिंग देने की प्रक्रिया भी युद्ध स्तर पर चल रही है। अभियान के जरिए बच्चों में विभिन्न माध्यमों से समझ विकसित करने, संख्यात्मक ज्ञान और पढ़ाई में बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी। जितेंद्र बठला, एपीसी, समग्र शिक्षा।

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