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बीबीएमबी बैठक:आईजीएनपी में 31 दिसंबर तक 7750 क्यूसेक मिलेगा पानी, 3 में से 1 ग्रुप में चलेगी नहरें, सरसों-गेहूं को लाभ

हनुमानगढ़9 महीने पहले
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  • भाखड़ा में 1200, गंग कैनाल में 1800 और नोहर-सिद्धमुख परियोजना में 500 क्यूसेक मिलेगा पानी

इंदिरा गांधी नहर परियोजना में 31 दिसंबर तक 7750 क्यूसेक पानी मिलेगा। इससे आईजीएनपी की नहरों को तीन में से एक ग्रुप में चलाया जाएगा। वर्तमान में चल रहा रेगुलेशन यथावत रहने से किसानों को राहत मिली है। यह निर्णय मंगलवार को रणजीत सागर बांध स्थित कमेटी रूम में हुई भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) टेक्नीकल कमेटी की बैठक में हुआ। बैठक में राजस्थान का प्रतिनिधित्व जल संसाधन उत्तर हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता अमरजीतसिंह मेहरड़ा ने किया। सबसे पहले बांधों के जल स्तर की समीक्षा की गई। इसके बाद सभी राज्यों की डिमांड पर चर्चा की गई।

मुख्य अभियंता अमरजीतसिंह मेहरड़ा ने दिसंबर माह में भी इंदिरा गांधी नहर परियोजना के लिए 7750 क्यूसेक पानी देने की डिमांड रखी। उन्होंने कहा कि आईजीएनपी में वर्तमान में दिया जा रहा पानी का शेयर यथावत रखना जरूरी है। काफी चर्चा के बाद बीबीएमबी की टेक्नीकल कमेटी के सदस्यों ने डिमांड स्वीकार कर ली। इससे काश्तकारों को बड़ी राहत मिली है। इसके साथ भाखड़ा प्रणाली में 1200 क्यूसेक, गंग कैनाल में 1800, नोहर-सिद्धमुख फीडर में 500 और खारा प्रणाली में 250 क्यूसेक पानी मिलेगा। बैठक में तय हुए पानी के शेयर से सबसे ज्यादा राहत आईजीएनपी के किसानों को मिली है। तीन में से एक ग्रुप में पानी मिलने से काश्तकार गेहूं-सरसों की फसलों में प्रथम सिंचाई कर सकेंगे।

क्लोजर के बाद आने वाले दूषित पानी के मुद्दे को बीबीएमबी ने गंभीरता से लिया

जल संसाधन उत्तर जोन हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता ने प्रत्येक वर्ष इंदिरा गांधी नहर परियोजना में आने वाले दूषित पानी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आईजीएनपी के माध्यम से राजस्थान के 10 जिलों के लगभग 2 करोड़ लोगों को पेयजल आपूर्ति होती है। क्लोजर के बाद जब जलापूर्ति शुरू होती है तो पानी इतना दूषित होता है कि पेयजल के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इस मुद्दे को बीबीएमबी के अधिकारियों ने गंभीरता से लिया। उन्होंने बताया कि आईजीएनपी में बंदी के दौरान हर साल बांध से जलापूर्ति बंद कर दी जाती है, जिस कारण रोपड़ के पास पानी एकत्रित होता रहता है। जब दाेबारा पानी छोड़ा जाता है, तो यह पानी आईजीएनपी में प्रवाहित होता है। अगले वर्ष बंदी के दौरान बांध से जलापूर्ति जारी रखी जाएगी, ताकि रोपड़ के पास पानी एकत्रित न हो पाए।

बीबीएमबी की बैठक में राजस्थान को डिमांड के अनुसार मिला पानी

बीबीएमबी की टीसीएम में राजस्थान की नहरों के लिए पानी की जितनी डिमांड की थी, उतना पानी मिल गया। आईजीएनपी में 31 दिसंबर तक 7750 क्यूसेक पानी मिलेगा। इस कारण वर्तमान में चल रहा रेगुलेशन यथावत रहेगा।
अमरजीतसिंह मेहरड़ा, चीफ इंजीनियर, जल संसाधन उत्तर, हनुमानगढ़

चिंता इसलिए...भाखड़ा व पौंग बांध में पानी की आवक से ज्यादा निकासी, निरंतर घट रहा है दोनों डैम का जल स्तर

भाखड़ा व पौंग बांध में आवक से ज्यादा पानी की निकासी हो रही है। इस कारण दोनों डैम का जल स्तर लगातार घट रहा है। मंगलवार को भाखड़ा बांध का जल स्तर 1633.94 फीट दर्ज किया गया, जबकि पानी की आवक 7 हजार 40 क्यूसेक व निकासी 14 हजार 840 क्यूसेक हो रही थी। पौंग बांध का जल स्तर 1346.20 फीट दर्ज किया गया। पौंग में पानी की आवक मात्र 1587 क्यूसेक थी, जबकि निकासी 4 हजार 3 क्यूसेक हो रही थी। पानी की आवक काफी कम होने के कारण जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की भी चिंता बढ़ती जा रही है। अगर मावठ अच्छी नहीं हुई तो स्थिति चिंताजनक हो सकती है।

आगे क्या...बांधों में आवक नहीं बढ़ी तो 12 जनवरी के बाद शेयर में कटौती की आशंका, फसलों को नुकसान होगा

भाखड़ा और पौंग बांध में दिसंबर में पानी की आवक नहीं बढ़ी तो जनवरी में राज्य के शेयर में कटौती की जा सकती है। अभी इंदिरा गांधी नहर परियोजना में 12 जनवरी 2022 तक सिंचाई पानी का रेगुलेशन बनाया है। 12 जनवरी के बाद बांधों के जल स्तर की समीक्षा के बाद ही सिंचाई के लिए पानी मिल पाएगा। आम तौर पर दिसंबर व जनवरी में मावठ की बरसात होती है। 12 जनवरी के बाद मावठ पर ही निर्भर करेगा कि किसानों को सिंचाई के लिए कितना पानी मिलेगा। गत वर्ष दिसंबर व जनवरी में मावठ नहीं होने के कारण बांधों में पानी की आवक नाममात्र हुई। इसके बाद इस साल मानसून अवधि में भी बांध भरे नहीं। इस कारण सिंचाई पानी का संकट है। ​​​​​​​

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