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राजस्थान ने अक्टूबर में खरीदी 182 करोड़ की बिजली:केन्द्र सरकार से कोल इंडिया एग्रीमेंट निभाने और नई खदान को पर्यावरण क्लीयरेंस देने की मांग

जयपुरएक महीने पहले
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कालीसिन्ध पावर प्लांट,राजस्थान।

कोयले की कमी से राजस्थान में बिजली संकट का खतरा मंडरा रहा है। आगामी त्योहारों में बिजली आपूर्ति को देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बिजली विभाग और कंपनियों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। सीएम ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश में बिजली आपूर्ति बिना रुकावट के बनाए रखें और कोयले की आपूर्ति के लिए केन्द्र सरकार से लगातार कॉर्डिनेट भी करें। उन्होंने राजस्थान में बिजली प्रोडक्शन की कमी के कारण डिमांड और सप्लाई में अंतर पर चिंता जताई।

विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोयला कम मिलने के कारण बिजली कम जनरेट हो पा रही है। अक्टूबर महीने में अब तक करीब 182 करोड़ रुपए की बिजली एक्सचेंज से खरीदना पड़ी है। त्योहारों में मांग और बढ़ सकती है। कोल इंडिया से तय एग्रीमेंट के मुताबिक कोयले की रैक मिलने की जरूरत है, लेकिन अब भी 11 रैक की बजाय 5 से 6 रैक ही कोल इंडिया दे रही है, इसलिए भारत सरकार से कोयले की सप्लाई बढ़ाने के लिए फिर से मांग की गई है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बिजली विभाग और कंपनियों के अधिकारियों के साथ रिव्यू बैठक की।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बिजली विभाग और कंपनियों के अधिकारियों के साथ रिव्यू बैठक की।

1 से 16 अक्टूबर तक रोज औसत 800 मेगावाट बिजली खरीदनी पड़ी
राजस्थान में रोजाना औसत 800 मेगावाट बिजली 1 से 16 अक्टूबर तक खरीदी गई है। बिजली की डिमांड ज्यादा और प्रोडक्शन कम होने के कारण ऐसा करना पड़ा। बिजली कंपनियों के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि पहले रोजाना 2600 लाख यूनिट की मांग थी। हालांकि यह पिछले 3 दिन में घटकर 2400 लाख यूनिट तक आ गई है। इसलिए जो बिजली औसत तौर पर 10-12 रुपए यूनिट और पीक आवर्स में 18 से 20 रुपए के ऊंचे रेट्स पर मिल रही थी। अब औसत तौर पर 5-6 रुपए में बिजली मिल पा रही है, जो कुछ राहत की बात है।

कोल इण्डिया अब भी 11 में से 5-6 रैक कोयला ही दे रही ऊर्जा मंत्री डॉ.बीडी कल्ला ने कहा कि राज्य सरकार से हुए एग्रीमेंट के मुताबिक कोल इण्डिया लिमिटेड से कोयले के तय एग्रीमेंट के मुताबिक आपूर्ति होगी तो प्रदेश में बिजली प्रोडक्शन में कोई कमी नहीं रहेगी।उन्होंने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड की सब्सिडियरी कंपनी एनसीएल और एसईसीएल से अभी भी प्रदेश को अलॉट 11 रैक में से औसतन रोजाना 5-6 रैक ही कोयला मिल रहा है। इससे प्रदेश के थर्मल पावर प्लांट पूरी कैपेसिटी से बिजली पैदा नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन बिजली प्रोडक्शन बनाए रखने के लिए कोयले का पूरा स्टॉक होना जरूरी है।

कोल इण्डिया राजस्थान को 11 में से 5-6 रैक कोयला ही दे रही है। फाइल फोटो
कोल इण्डिया राजस्थान को 11 में से 5-6 रैक कोयला ही दे रही है। फाइल फोटो

पर्यावरण क्लीयरेंस में अटकी दूसरे चरण की कोयला माइनिंग
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बिजली विभाग और बिजली कंपनी, उत्पादन निगम और ऊर्जा विकास निगम के अधिकारियों को केन्द्रीय कोयला मंत्रालय और केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय से संपर्क कर प्रदेश को कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने पारसा कांटा कैप्टिव कोल ब्लॉक के दूसरे चरण के 1136 हैक्टेयर में माइनिंग शुरू करने के लिए केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय से बातचीत कर जल्द क्लीयरेंस लेने के भी निर्देश दिए। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री को पत्र लिखकर यह स्वीकृति जल्द से जल्द दिलाने की मांग की गई है। ताकि प्रदेश को आने वाले वक्त में जरूरत के मुताबिक कोयला मिल सके।

कैप्टिव कोल माइंस से 11 रैक रोजाना कोयला मिलने से कुछ राहत
मुख्यमंत्री की बिजली और कोयला को लेकर हुई रिव्यू बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश को अलॉट कैप्टिव कोल माइंस से अब बढ़कर 11 रैक रोजाना कोयला मिल रहा है। इससे पावर प्लांट चलाने में काफी राहत मिली है। कालीसिंध पावर प्लांट की 600 मेगावॉट क्षमता की बंद पड़ी यूनिट, सूरतगढ़ सुपर क्रिटिकल प्लांट की 660 मेगावॉट यूनिट, कोटा थर्मल की 195 मेगावॉट और सूरतगढ़ ओएण्डएम 250 मेगावॉट कैपिसिटी की यूनिट में हाल ही में प्रोडक्शन फिर से शुरू हुआ है। इससे पिछले कुछ दिनों में बिजली आपूर्ति में प्रदेश को काफी राहत मिली है।

ऊर्जा विभाग के एसीएस ने दिल्ली में उठाई मांग है।

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