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सत्ताधारी पार्टी में सियासी धमाके का अंदेशा:यूपी के नतीजों से तय होगा विपक्षी पार्टी का चेहरा; खास को छुड़ाने गए नेताजी खुद पहुंचे जेल

जयपुर7 महीने पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी
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  • हर शनिवार पढ़िए और सुनिए ब्यूराक्रेसी और राजनीति से जुड़े अनसुने किस्से

सत्ताधारी पार्टी में खेमेबंदी और सियासी शह मात का खेल जारी है। फिलहाल ऊपरी तौर पर सब कुछ शांत लग रहा है, लेकिन ऐसा है नहीं। एक खेमा सियासी धमाका होने की बात कह रहा है। दिल्ली से लेकर जयपुर तक इसकी चर्चा है। सियासी धमाके को फूलप्रूफ बनाने के लिए दिल्ली में व्यूह रचना तैयार की जा रही है। सियासी धमाके की तीव्रता पांच राज्यों के चुनाव परिणामों पर निर्भर करेगी। अंदरखाने बहुत कुछ पक रहा है जो इस साल के बीतने से पहले सामने आएगा।

स्वजातीय को छुड़ाने गए नेताजी खुद हवालात पहुंच गए
पूर्वी राजस्थान के संभाग मुख्यालय वाले जिले में विपक्षी पार्टी के एक नेताजी को स्वजातीय के प्रति स्नेह भारी पड़ गया। सिम्को रेल फैक्ट्री में दो कर्मचारी फर्जी दस्तावेजों से नौकरी करते पाए गए, पुलिस ने दोनों को हवालात में बंद कर दिया। दोनों विपक्षी पार्टी के जिलाध्यक्ष रहे नेताजी के स्वजातीय थे। नेताजी दोनों को छुड़ाने थाने पहुंच गए और हंगामा खड़ा कर दिया। पुलिस ने नेताजी को ही शांति भंग के आरोप में बंद कर दिया। देर रात बड़ी मुश्किल से नेताजी को छोड़ा गया। यह बात सियासी हलकों में आग की तरह फैली। नेताजी मजदूर हितों के लिए लड़ते रहे हैं, लेकिन मजदूर हित और फर्जीवाड़े से नौकरी करने वालों के हित में फर्क करना भूल गए और हवालात पहुंच गए।

मंत्रियों के लिए पुत्र बने समस्या

सियासत में बेटा-बेटी फैक्टर ने अब तक कई लोगों का नुकसान किया है। सरकार के कई मंत्रियों के पुत्र ट्रबल शूटर की जगह ट्रबल क्रिएटर बने हुए हैं। मारवाड़ से लेकर राजधानी जयपुर तक यही हाल है। पिता विवादों से दूर ही रहते हैं,लेकिन यह कमी बेटे पूरी कर देते हैं। एक मंत्री पुत्र ने तो ऐसी पिच बनाई कि बिना खेले ही आउट हो गए, मामला धार्मिक आस्थाओं से लेकर परंपरागत वोट बैंक को नाराज करने तक पहुंच गया। विवाद अब भी जारी है। दूसरे मंत्री पुत्र भी हर महीने कोई न कोई विवाद खड़ा कर रहे हैं। कई मंत्री पुत्रों के विवाद कभी भी सिर उठा सकते हैं।

कोरोना गाइडलाइन और मंत्रियों की बात पिटने का रिकॉर्ड

मंत्री कोई बयान दे दे तो उसे सरकार की ही घोषणा मानकर विश्वास किया जाता है, लेकिन कोरोना काल में इसकी गारंटी नहीं है कि मंत्री कहे वह होगा ही। पिछले दिनों हेल्थ डिपार्टमेंट वाले मंत्रीजी ने बयान दिया कि स्कूल बंद करने की आवश्यकता नहीं है। बयान के अगले ही दिन गाइडलाइन जारी कर सरकार ने 12 वीं तक स्कूल बंद कर दिए। शिक्षा महकमे वाले मंत्रीजी ने प्रैक्टिकल परीक्षाएं करवाने की घोषणा की, इसके तीसरे ही दिन स्थगित करनी पड़ी। कोरोना काल में सारे आदेश एक ही जगह से आते हैं। अगर किसी ने बीच में अपनी चलाने की जरा भी कोशिश की तो बात पिटना तय है। पुराने शिक्षा मंत्री दूसरी लहर के खत्म होने के बाद स्कूल खोलने की घोषणा करके इसका एहसास कर चुके हैं।

सत्ताधारी पार्टी को बंगला अलॉट करने का ऑर्डर बैकडेट में
सत्ताधारी पार्टी को भी अस्पताल रोड के पॉश इलाके में दफ्तर के लिए बंगला आवंटित करने की खूब चर्चा है। बंगला आवंटित करने से ज्यादा अलॉटमेंट का ऑर्डर चर्चा में है। बंगला अलॉट करने वाले महकमे ने हाल ही अपनी वेबसाइट पर ताजा अपडेट की लिस्ट में सत्ताधारी पार्टी को बंगला अलॉट करने का ऑर्डर अपलोड किया। इसे देख हर कोई हैरान था, उस पर फरवरी 2021 की तारीख थी। 11 महीने पहले का अलॉटमेंट ऑर्डर अब ताजा बताकर सार्वजनिक करने पर सियासी और प्रशासनिक गलियारों में पूछताछ होने लगी। पूछताछ और चर्चा ज्यादा बढ़ी तो महकमे ने वह ऑर्डर ही वेबसाइट से हटा लिया। बताया जाता है कि सत्ताधारी पार्टी ने ही पहले ऑर्डर सार्वजनिक करने की मांग की थी, लेकिन मामला बैकडेट में होने से विवाद की आशंका थी। फिलहाल सरकारी खर्चे पर बंगले का रिनोवेशन जारी है।

दो क्षेत्रीय क्षत्रपों में कड़वाहट का ऑडियो वायरल
कभी सीएम के खिलाफ एक साथ संघर्ष करने वाले पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के दो क्षत्रपों के रिश्ते भी अब दो दिशाओं की तरह ही हो चुके हैं। कड़वाहट का स्तर इतना बढ़ गया है कि सोशल मीडिया पर समर्थक एक दूसरे को गिराने लगे हैंं। पूर्वी राजस्थान वाले क्षत्रप का पूर्व सीएम के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर पश्चिमी राजस्थान वाले क्षत्रप को जच नहीं रहा है। पश्चिमी राजस्थान वाले क्षत्रप ने नाराज होकर ऐसी ऐसी बातें कह दीं जिन्हें लिखा नहीं जा सकता, लेकिन उसका ऑडियो वायरल हो गया। इसी ऑडियो पर अब दोनों के समर्थक आमने-सामने हैं। एक ही धारा के इन क्षत्रपों के बीच पहली बार इस स्तर की कड़वाहट देखी गई हैं,लेकिन यह भी सच है कि सियासतदां परिस्थितियों के दास होते हैं, इसलिए कोई स्थायी दोस्त-दुश्मन नहीं होता।

चेयरमैन रहे नेताजी के बॉस बने अफसर

सत्ताधारी पार्टी के पिछले टर्म में चेयरमैन रहे एक नेताजी के साथ सरकार ने कलाकारी दी। प्रदेश के मुखिया के खास नेताजी को कलाकृतियों की परख कर उन्हें खरीदने वाली एक कमेटी का मेंबर बनाया है। इस कमेटी में महकमे के प्रमुख सचिव अध्यक्ष हैं। इस नाते बॉस तो अफसर ही हुए। सियासी जानकार भी हैरान हैं कि ऐसा कैसे हो गया? क्या इसे कोई संकेत माना जाए? इस नियुक्ति ने आस लगाए बैठे कई नजदीकियों की भी चिंता बढ़ा दी हैं। इस नियुक्ति को देखकर कई अनुभवी नेता भी कह रहे हैं कुछ तो सीनियरिटी का ख्याल रखते।

यूपी चुनाव का परिणाम तय करेगा विपक्षी पार्टी का चेहरा
यूपी के चुनाव में बीजेपी की हार-जीत का प्रदेश की सियासत पर बड़ा इम्पैक्ट होने वाला है। विपक्षी पार्टी में सीएम के दावेदारों पर अब तक भारी पड़ते रहे चेहरे की किस्मत इसी चुनाव से तय होने वाली है। फिलहाल दर्जन भर चेहरों को जोर आजमाइश की छूट है। सबसे भारी चेहरे ने अपने समर्थकों को वैट एंड वॉच का मैसेज दे रखा है। आगे यूपी नतीजों के बाद उन्हें सिग्नल मिलेगा। इतना तय है विपक्षी पार्टी में यह साल खूब उथल-पुथल वाला रहने वाला है।

इलेस्ट्रेशन : संजय डिमरी

वॉइस ओवर: प्रोड्यूसर राहुल बंसल

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