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भारत-पाक बॉर्डर पर युद्ध सा नजारा:पाकिस्तान सीमा के पास हरक्यूलिस विमान से नीचे उतरे 400 कमांडो, हेलिकॉप्टर ध्रुव ने ड्रोन को मार गिराया

जयपुर/जैसलमेर7 महीने पहलेलेखक: ​​​​​​​डीडी वैष्णव
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भारत की पश्चिमी सीमा जैसलमेर में युद्धाभ्यास दक्षिण शक्ति के दौरान शुक्रवार को भविष्य के हाईब्रिड युद्ध का नजारा भारत ने दिखा दिया। यह युद्धाभ्यास एक महीने से चल रहा था। इस युद्धाभ्यास में तीनों सेनाओं की इकट्‌ठी ताकत दिखी। सेना ने स्पेस टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से भविष्य में हो सकने वाले युद्ध की झलक दिखाई।

इसके साथ ही स्वदेसी लड़ाकू हेलिकॉप्टर ध्रुव ने ड्रोन को मार गिराने की प्रैक्टिस की। थार के रेगिस्तान, रण ऑफ कच्छ, समुद्र और क्रीक इलाके में अलग-अलग फेज में पांच से छह एजेंसियों ने साथ में युद्धाभ्यास किया। पाकिस्तान से सटी सीमा पर यह पहला अवसर है जब सेना इस नए तरीके को आजमा रही है। आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे शुक्रवार को इस युद्धाभ्यास का साक्षी बने। उन्होंने जवानों व पैरा कमांडों से बातचीत की और उनका हौसला अफजाई की।

हेलिबोर्न ऑपरेशन से 400 से ज्यादा कमांडों उतरे
कोविड के बाद पहली बार कमान स्तर पर आयोजित इस युद्धाभ्यास में सेना ने आक्रामकता का प्रदर्शन किया। दक्षिण कमान के अधीन 21 स्ट्राइक कोर व कोणार्क कोर के जवान इस प्रैक्टिस में शामिल हुए। एयरफोर्स की दक्षिण पश्चिमी कमान, नैवी की वेस्टर्न कमान के अलग अलग हिस्सों से जवान व विमानों ने भाग लिया। युद्धाभ्यास के दौरान 130 जे सुपर हरक्यूलिस विमान से तीनों फोर्स के 400 से ज्यादा कमांडों को दुश्मन की जमीन पर उतारने की प्रैक्टिस की गई। जब सेना पर ड्रोन के समूह से हमला किया गया तो एक साथ स्वदेशी ध्रुव हेलिकॉप्टर को उतारा गया। हेलिकॉप्टर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से निगरानी, रैकी और अटैक कर ड्रोन को मार गिराने की प्रैक्टिस की। इंफैन्ट्री, मैकेनाइज्ड इंफैन्ट्री के अलग अलग फॉर्मेशन व समूहों में हमारे जांबाजों ने दुश्मन को चौंका दिया।

फोटो में देखिए कैसे सेना के जवानों ने पाकिस्तान बॉर्डर पर किया युद्धाभ्यास...

दक्षिण शक्ति नाम के इस युद्धाभ्यास में करीब 30 हजार सैनिकों ने हिस्सा लिया।
दक्षिण शक्ति नाम के इस युद्धाभ्यास में करीब 30 हजार सैनिकों ने हिस्सा लिया।
युद्धाभ्यास के आखिरी दिन सेना ने हेलिकॉप्टर, आसमान से पैरा जंप के जरिए कमांडोज का फ्री-फाल और स्वार्म-ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
युद्धाभ्यास के आखिरी दिन सेना ने हेलिकॉप्टर, आसमान से पैरा जंप के जरिए कमांडोज का फ्री-फाल और स्वार्म-ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
इस दौरान जवानों का हर निशाना अचूक था। हर बुलेट, हर तोप के गोले का अपना टारगेट था।
इस दौरान जवानों का हर निशाना अचूक था। हर बुलेट, हर तोप के गोले का अपना टारगेट था।
इस युद्धभ्यास का करीब 30 हजार सैनिक और पुलिसकर्मी हिस्सा बने।
इस युद्धभ्यास का करीब 30 हजार सैनिक और पुलिसकर्मी हिस्सा बने।
भारतीय सेना अधिकारियों की मौजूदगी में गुजरात में कच्छ के रण से लेकर राजस्थान के मरुस्थल तक चल रहे सैन्य अभ्यास का प्रदर्शन किया गया।
भारतीय सेना अधिकारियों की मौजूदगी में गुजरात में कच्छ के रण से लेकर राजस्थान के मरुस्थल तक चल रहे सैन्य अभ्यास का प्रदर्शन किया गया।
थार के रेगिस्तान, रण ऑफ कच्छ, समुद्र और क्रीक इलाके में अलग-अलग फेज में युद्ध पांच से छह एजेंसियों ने साथ में युद्धाभ्यास किया।
थार के रेगिस्तान, रण ऑफ कच्छ, समुद्र और क्रीक इलाके में अलग-अलग फेज में युद्ध पांच से छह एजेंसियों ने साथ में युद्धाभ्यास किया।
दो दिन तक थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे भी इस युद्धाभ्यास की समीक्षा की। शुक्रवार को युद्धाभ्यास के समापन में भी थलसेना प्रमुख मौजूद रहे।
दो दिन तक थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे भी इस युद्धाभ्यास की समीक्षा की। शुक्रवार को युद्धाभ्यास के समापन में भी थलसेना प्रमुख मौजूद रहे।
हरक्युलिस से तीनों फोर्स के 400 से ज्यादा कमांडों को उतारा गया।
हरक्युलिस से तीनों फोर्स के 400 से ज्यादा कमांडों को उतारा गया।
इस एक्सरसाइज में भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के साथ साथ कोस्टगार्ड, पुलिस, बीएसएफ और खुफिया एजेंसियां शामिल हुई।
इस एक्सरसाइज में भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के साथ साथ कोस्टगार्ड, पुलिस, बीएसएफ और खुफिया एजेंसियां शामिल हुई।
थार के रेगिस्तान, रण ऑफ कच्छ, समुद्र और क्रीक इलाके में अलग अलग फेज में युद्ध पांच से छह एजेंसियों ने साथ में युद्धाभ्यास किया।
थार के रेगिस्तान, रण ऑफ कच्छ, समुद्र और क्रीक इलाके में अलग अलग फेज में युद्ध पांच से छह एजेंसियों ने साथ में युद्धाभ्यास किया।
दक्षिण कमान के अधीन 21 स्ट्राइक कोर व कोणार्क कोर के जवान शामिल हुए।
दक्षिण कमान के अधीन 21 स्ट्राइक कोर व कोणार्क कोर के जवान शामिल हुए।
आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे दूसरे दिन इस युद्धाभ्यास के साथी बने। जवानों व पैरा कमांडों से बातचीत की और उनका हौंसला अफजाई की।
आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे दूसरे दिन इस युद्धाभ्यास के साथी बने। जवानों व पैरा कमांडों से बातचीत की और उनका हौंसला अफजाई की।
सेना अधिकारी के अधिकारियों ने सेना के जवानों के साथ फोटोशूट भी करवाया।
सेना अधिकारी के अधिकारियों ने सेना के जवानों के साथ फोटोशूट भी करवाया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से निगरानी, रैकी और अटैक ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से निगरानी, रैकी और अटैक ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।