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81 लाख की लूट का मामला:​​​​​​​बाबल के कहने पर लूट में शामिल हुआ सुभाष, पुलिस को अब दोनों की तलाश

फलोदी2 महीने पहले
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11 नवंबर को बिजनेसमैन रमेश गोलेच्छा के साथ 81 लाख की लूट के मामले की सारी परतें खोल कर रख दी है। लूट की साजिश से लेकर इसके एक-एक किरदार की तस्वीर भी साफ हो चुकी है और अब केवल दो आरोपियों, वारदात में काम ली गई पिस्टल और 21 लाख रुपयों की बरामदगी बाकी है। आईओ फलोदी पुलिस थाना के इंचार्ज राकेश ख्यालिया बताते हैं कि बचे हुए दोनों आरोपी शातिर बदमाश हैं, इनकी गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस प्रयास कर रही है।

पुलिस रिमांड पर पूछताछ के दौरान मास्टर माइंड सुनील विश्नोई ने बताया कि लूट के लिए पहले उसने शातिर बदमाश ओपी बावल से बात की जो कि भवाद पुलिस थाना करवडा पुलिस आयुक्तालय जोधपुर का रहने वाला है, बावल ने उसे बताया कि वह इन दिनों किसी दूसरे मिशन पर लगा हुआ है, लेकिन उसके लिए एक आदमी का इंतजाम कर देगा। सुनील का ओपी बावल से पुराना याराना है और दोनों टोल नाका पर हुई डकैती की एक वारदात में साथ थे और दोनों ने एक साथ जेल भी काटी।

ओपी बावल ने सुभाष गोदारा विश्नोई को जोधपुर बुलाया और रात को दोनों ने मीटिंग की। बावल ने उसे लूट की वारदात में शामिल होने के लिए यह कहते हुए मना लिया कि सुनील उसका पुराना परिचित है, इसके बाद बावल ने सुनील को सुभाष के नंबर भेज दिए। दोनों ने मोबाइल पर बात की और वह साजिश में शामिल हो गया।

अब वारदात को अंजाम देने के लिए कार की जरूरत थी, कार का इंतजाम भी सुभाष ने किया और उसने ही कार मालिक अशोक से बात की। अशोक ने उससे साफ कह दिया कि डोडा पोस्त के मामले में मत फंसा देना। जिस पर सुभाष ने उसे विश्वास दिलाया कि यह काम नहीं करेंगे, कोई दूसरा ही काम करेंगे।

कार मालिक अशोक को सारी जानकारी थी इसके बाद भी उसने कार दी। इसलिए पुलिस ने उसे लूट कांड में आरोपी बनाया है। पिस्टल का इंतजाम भी सुभाष ने ही किया था। गोरधन और नरेश को सुनील पहले ही शामिल कर चुका था, सुभाष के आने से पूरा गिरोह तैयार हो गया और चारों ने मिल कर सनसनीखेज वारदात को अंजाम दे दिया।

उम्मीद से भी बड़ी लूट

बिजनेसमैन रमेश से नोटों से भरा लूटने के बाद लुटेरों ने रास्ते में कहीं कार नहीं रोकी। उस समय तक उनको अनुमान ही नहीं था कि लूट में कितने रुपए हाथ लगे। लूट के बाद भागने के बाद डेढ घंटे में वे जोधपुर के पास बम्बोर पहुंच गए। एक ओरण में उन्होंने कार को रोका और नोटों से भरा बैग खोला तो उनकी आंखे फटी की फटी रह गई। हिसाब लगाने में ही 15-20 मिनट लग गए। 81 लाख रुपए देख कर उनकी बांछें खिल गई और चारों ने ईमानदारी से लूट के रुपयों का बंटवारा किया। प्रत्येक के हिस्से में 20 लाख 25 हजार रुपए आए। वहां से सुभाष अपने हिस्से की रकम लेकर रवाना हो गया और यह तीनों जोधपुर आ गए। 12 की सुबह सुनील इनसे अलग हो गया और गुजरात के लिए रवाना हो गया।

गोरधन और राकेश ने 12 नवंबर को चार हजार रुपए महीने पर एक कमरा किराए पर लिया। दोपहर में नेशनल हैंडलूम पहुंचे और वहां से 1 गद्दा, 2 रजाई, एक पानी का कैंपर, ताला आदि लेकर कमरे पर आए। लूट के रुपए इन्होंने कैंपर में भर दिए और दबा कर कमरे से निकल गए। कमरे पर ताला लगाने के बाद एक चाबी इन्होंने वहीं छुपा दी तथा एक चाबी अपने पास रखी। वहां चाबी इसलिए छुपाई कि खुद वाली चाबी गुम हो जाए तो छुपाई हुई चाबी से कमरा खोल लें।

गोरधन, नरेश से पुलिस ने 40 लाख और सुनील से 20 लाख रुपए बरामद किए हैं, 21 लाख सुभाष से बरामद किए जाने हैं।

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