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बाल संरक्षण आयोग से बच्चों की शिकायतें:​​​​​​​ मम्मी-पापा के झगड़े से घर में घुटन होती है, तनाव से पढ़ भी नहीं पा रहे, इन्हें समझाओ

जोधपुर4 महीने पहलेलेखक: शाना
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​​​​​​​हेल्पलाइन पर ऐसी शिकायतों के 80 पत्र व डेढ़ हजार कॉल, पैरेंट्स पर काउंसलिंग का भी असर नहीं - Money Bhaskar
​​​​​​​हेल्पलाइन पर ऐसी शिकायतों के 80 पत्र व डेढ़ हजार कॉल, पैरेंट्स पर काउंसलिंग का भी असर नहीं

मेम, प्लीज पुलिस काे मेरे घर भेजाे... मम्मी-पापा बहुत झगड़ते हैं... इनकी लड़ाई में मैं पढ़ भी नहीं पा रहा... घर में घुटन होती हैं... रात में नींद में भी उनकी लड़ाई की बातें याद आने से सो भी नहीं पा रहे...। बाल अधिकार संरक्षण आयोग के हेल्पलाइन पोर्टल पर जब 8 साल के मासूम का ऐसा पत्र आया तो सभी चकित रह गए। आयोग के इस पाेर्टल पर ऐसी शिकायतों के अब तक 80 पत्र और डेढ़ हजार से अधिक कॉल आ चुके हैं, जिसमें 8 से 13 साल तक के बच्चों घर से परेशान होना बताया है। कई बच्चियों ने ऑनलाइन पढ़ाई की बजाए परिजनों द्वारा किचन में झाेंकने की शिकायतें भी की हैं।

आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल ने बताया कि कई बच्चाें ने अपने पत्रों में घर में पर भी जेल जैसा महसूस होने की बात लिखी हैं। ऐसे मामलों का आना ना सिर्फ परिवार बल्कि समाज के लिए भी गंभीर समस्या है। आयोग की अध्यक्ष बताती हैं कि सबसे अधिक गंभीर बात ये है कि पैरेंट्स की पंद्रह दिन से लेकर एक माह तक काउंसलिंग करने के बावजूद उसका असर तीन दिन तक ही रहता है। इसके बाद घरों से फिर इस प्रकार के मामले आने लगते हैं, जो बच्चों के मन-मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं।

अधिकतर बच्चे घर में रहना ही नहीं चाह रहे, जबकि एक बच्चे के लिए घर से ज्यादा आरामदायक, सुकून और अपनी इच्छाओं को पूरी करने जैसी कोई और जगह नहीं है। इन मुद्दों को लेकर जब विभाग ने बच्चों की काउंसलिंग की तो पाया कि उन्हें स्कूल में जो कुछ अच्छे संस्कार दिए गए उनके जीवन पर उनका असर तो कम पैरेंट्स के व्यवहार का ज्यादा असर दिखाई दिया। जब बच्चियों को व्यवहार आधारित प्रश्नों की सूची देकर जवाब मांगे गए तो 60 प्रतिशत बच्चियां पैरेंट्स द्वारा किए जा रहे अच्छे व बुरे व्यवहार को ही लिखती मिली।

20 प्रतिशत बच्चे कन्फ्यूज्ड व डर से चुप्पी साधे रहे। आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान में ऐसे 30 बच्चों की काउंसलिंग की जा रही है। 20 केसाें को सुलझाया गया, लेकिन अधिकतर में काउंसलिंग का असर कुछ ही दिन देखा गया। सिर्फ गिने-चुने केसाें में ही पूरी तरह सुधार देखने को मिला।

दिमाग पर इतना बुरा असर कि पढ़ा हुआ याद तक नहीं रख पा रहे बच्चे
बच्चों ने यह भी बताया कि वे एकाग्रता से पढ़ाई नहीं कर पा रहे। जो कुछ याद करते हैं भूल जाते हैं। नया कुछ भी पढ़ते हैं तो पीछे का याद नही रहता। आयोग अध्यक्ष ने बताया कि बच्चों की अलग से काउंसलिंग की तो उन्होंने यह भी कहा कि वे दिन में पैरेंट्स की लड़ाई फेस कर रहे हैं और रात को पूरी नींद नहीं ले पाते, क्योंकि दिमाग में लड़ाई की बातें घूमती रहती है। जबकि डॉक्टर्स की मानें तो इस उम्र में इतना तनाव लेने से शारीरिक विकास नहीं हो पाता। इस उम्र में अच्छी डाइट के साथ एंजॉय, रिलेक्स करना व प्ले फुल एनर्जी बहुत जरूरी है।

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