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पेयजल संकट के मुहाने पर जोधपुर:12 दिन का ही पानी बचा, क्लोजर की अवधि दो दिन बढ़ाई, जलदाय विभाग की सांसें फूली

जोधपुरएक महीने पहले
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राजीव गांधी लिफ्ट नहर। - Money Bhaskar
राजीव गांधी लिफ्ट नहर।

इंदिरा गांधी नहर में चल रहे मरम्मत कार्यों के समय पर पूरा नहीं होने कारण क्लोजर की अवधि को बढ़ाना पड़ा रहा है। दो दिन के लिए बढ़ाई गए क्लोजर ने जलदाय विभाग के सारे समीकरण गड़बड़ा कर रख दिए है। क्लोजर की बढ़ी अवधि ने जोधपुर को पेयजल संकट के मुहाने पर ला खड़ा किया है।

सरहिंद फीडर पर मरम्मत का कार्य पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में अब इंदिरा गांधी नहर में 21 के बजाय 23 मई को पानी छोड़ा जाएगा। इस पानी के तीस मई तक जोधपुर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। वहीं दूसरी तरफ जोधपुर के जलाशयों में तीस मई तक का ही पानी उपलब्ध है। ऐसे में यदि एक दिन भी पानी विलम्ब से आया तो शहर में संकट खड़ा हो जाएगा।

क्लोजर की अवधि दो दिन बढ़ाने की जल संसाधन विभाग से सूचना मिलते ही जलदाय विभाग के आला अधिकारियों की मीटिंग बुलाई गई। सभी अधिकारियों की यह मीटिंग अभी तक जारी है। मीटिंग में अगले दस दिन के भीतर जोधपुर शहर में दो से तीन शट डाउन अर्थात जलापूर्ति रोकने के बारे में फैसला लिया जाएगा। ताकि पानी पहुंचने में यदि विलम्ब होता है तो संकट खड़ा नहीं हो।

यह है संकट का कारण
राजीव गांधी लिफ्ट नहर से जोधपुर सहित पांच अन्य छोटे शहर के अलावा 1430 गांवों की जलापूर्ति निर्भर करती है। इंदिरा गांधी नहर में पॉडिंग कर रखे गए पानी की आवक 17 मई से बंद हो गई। इसके बाद जोधपुर सहित अन्य कस्बों व गांवों की जलापूर्ति पूरी तरह से कायलाना, तखतसागर व सुरपुरा बांध के साथ विभिन्न स्थान पर बनी 12 डिग्गियों पर निर्भर है। सुरपुरा व डिग्गियों में अगले 11 से 13 दिन का पानी उपलब्ध है। तखतसागर व कायलाना में आज से 12 दिन का यानि तीस मई तक का पानी उपलब्ध है।

क्लोजर बढ़ा तो खड़ा हो जाएगा संकट
यदि क्लोजर की अवधि में एक दिन भी बढ़ गया तो जोधपुर शहर में संकट खड़ा हो जाएगा। इंदिरा गांधी नहर में 23 मई को पानी छोड़े जाने की स्थिति में इसके राजीव गांधी लिफ्ट नहर तक पहुंचने में पांच दिन लगेंगे। यानि यह पानी 28 मई तक लिफ्ट नहर के मुहाने तक पहुंचेगा। लिफ्ट नहर के जरिये 204 किलोमीटर तक का सफर तय कर पानी को जोधपुर पहुंचने में तीन दिन का समय लगने की उम्मीद है। ऐसे में यह पानी तीस मई तक जोधपुर पहुंच सकेगा। यदि इस पानी के जलदाय विभाग के अनुसार आगे बढ़ने की गति धीमा रही तो पानी यहां विलम्ब से पहुंच पाएगा।

यह कर रहे जुगत
क्लोजर की अवधि बढ़ने के साथ ही जलदाय विभाग के अधिकारियों की सांसें फूलना शुरू हो गई। आनन-फानन में सारे आला अधिकारियों की बैठक बुलाई गई। बैठक में पानी बचाने व वितरण व्यवस्था का नए सिरे से योजना बनाई जा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि अगले दस दिन में दो से तीन शट डाउन लेकर जलदाय विभाग कुछ पानी बचा कर रखेगा। ताकि जोधपुर तक पानी पहुंचने में यदि किसी कारणवश विलम्ब हो जाए तो यहां जल संकट खड़ा नहीं हो।

बाड़मेर-जैसलमेर में भी रहेगा संकट
जोधपुर के समान ही बाड़मेर-जैसलमेर शहर व जिलों में भी इंदिरा गांधी नहर का पानी विलम्ब से पहुंच पाएगा। पोकरण-फलसूंड-बालोतरा-सिवाना जलप्रदाय योजना से दो शहर व 441 गांव, बाड़मेर लिफ्ट परियोजना से दो शहर व 420 गांव के अलावा जैसलमेर में 133 गांव इस नहर के पानी पर निर्भर है। इन सभी स्थान पर जलापूर्ति को बरकरार रखने के लिए नए सिरे से मशक्कत की जा रही है।