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  • In The Campaign With The Administration Villages, With Mutual Consent, The Disputes Of 3563 Roads Have Been Ended, Now It Is Easy For The Villagers To Move In The Villages And Fields.

भाईचारे की राह:प्रशासन गांवों के संग अभियान में आपसी सहमति से 3563 रास्तों के विवाद खत्म किए, अब ग्रामीणों का गांव-ढाणियों व खेतों में आना-जाना हुआ आसान

जोधपुर2 महीने पहले
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शांति से मिला समाधान। - Money Bhaskar
शांति से मिला समाधान।

मगराज शर्मा | चामू प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान ग्रामीणों के भाईचारे का इससे बड़ा उदाहरण नहीं मिल सकता। 2 अक्टूबर से शुरू हुए शिविरों में अब तक ग्रामीणों ने आपसी सहमति से 3563 रास्तों का विवाद निपटाया है। इनमें बहुत से रास्तों से स्वत: अतिक्रमण हटाया, कइयों को प्रशासन को साथ मिलकर कब्जे हटाए तो अधिकांश ने मिलकर अपनी जमीन दी और फिर सरकारी रिकॉर्ड में कटाणी रास्ते दर्ज कराए। इससे न केवल सैकड़ों गांवों के लोगों को आने जाने में सुविधा मिलेगी बल्कि गांवों में शांति, सद्भाव व भाईचारा कायम रखने में बड़ी मदद मिलेगी। आने वाली पीढ़ियों तक रास्तों का विवाद नहीं होगा। अब तक रास्तों के विवाद में कई बार ग्रामीण आमने सामने हो जाते थे। इससे खून खराबे की नौबत तक आती रही है। ऐसे ही विवादों में बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कतें आती थी तो मरीज भी समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। एक साथ कई खातेदारों की जमीन होने से आम दिनों में यह विवाद बरसों से लटके हुए थे। प्रशासन गांवों के संग शिविर में सभी विभागों के अधिकारी ग्रामीण मौके पर ही होने से यह एक ही दिन में संभव हो रहा है। जबकि अभी तक जिले की बहुत सी पंचायतों में शिविर लगने बाकी है। ऐसे में उम्मीद की जा रही कि यह आंकड़ा कहीं आगे जाएगा। सेखाला पूरी पंचायत समिति क्षेत्र के शिविर चामू क्षेत्र के शिविर पूरे होने के बाद आयोजित किए जाएंगे।

{ लोड़ता अचलावता पंचायत में रामसर रोड से लादूसिंह की ट्यूबवेल तक सरकारी रास्ता नहीं था। देवजी की ट्यूबवेल 5 साल से बंद थी। इसे सुखचार के तहत खुलवाया गया। तहसीलदार सुमित्रा चौधरी व टीम ने रास्ते पर लोहे का गेट लगवाया। जिससे खेत मालिक को कोई नुकसान नहीं होगा। वहीं ट्यूबवेल मालिक के 5 साल बाद फिर से फसल लहलहाएगी। यह 15 किमी तक रास्ता खोला गया है। {रामसर पंचायत के भाड़ बेरा से बामणिया सुथारों की ढाणी तक जाने के लिए 15 किमी घूम कर जाना पड़ता था। अब मात्र सवा तीन किमी में ही सारा काम हो जाएगा। सरपंच प्रतिनिधि धीमाराम विश्नोई ने बताया कि अभियान में 13 खातेदारों ने मिलकर रास्ते का समाधान कर दिया। यह रास्ता मेघवालों, सुथारों, राजपूतों, कुम्भारों की ढाणी होते हुए डेडा चक की सरहद तक जाएगा। लगभग 30 वर्षों से बंद था।

{लोड़ता अचलावतां में भीलों की ढाणी के लिए खाली पगडंडी थी। अब 20 परिवारों को घर जाने का रास्ता मिला। सरपंच भंवरलाल जाणी ने बताया कि अभियान में 9 किमी की जगह 3 किमी रूपसिंह की गोलाई से गुडली नाडी तक रास्ता खुला। जिससे 60 घरों में जाना आसान हुआ। इसी तरह गुडली रोड से देवातू मार्ग 2.50 किमी तक रास्ता बनाया। इससे 70 घरों को रास्ते का फायदा मिलेगा। ग्रामीणों ने आभार जताया।
लंबी दूरी के रास्ते आपस में जुड़े
गांवों में जैसे जैसे सिंचित कृषि क्षेत्र का दायरा बढ़ा वैसे वैसे रास्तों के विवाद सामने आने लगे थे। एक दशक में यह समस्या ज्यादा बढ़ गई थी। कई गांवों में तो यह स्थिति थी कि 20-30 किमी दूर से आ रहे रास्ते भी आगे जाकर दो चार खेत मालिकों के विवाद में अटक गए थे। चूंकि ये शिविर भी बरसों बाद लग रहे हैं तो ग्रामीण विवाद निपटाना चाहते हैं।

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