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सड़क निर्माण का बोर्ड नहीं लगाना पड़ा भारी:हादसे में बेटे की मौत के बाद पिता ने भारत माला प्रोजेक्ट के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज कराया मामला

जोधपुर2 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Money Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।

सड़क निर्माण कार्य के साथ ही हाइवे पर खतरनाक स्थान पर चिह्नित किए गए स्थानों पर चेतावनी के बोर्ड नहीं लगवाना संबंधित विभाग के जिम्मेदार लोगों को अब भारी पड़ सकता है। जोधपुर-जैसलमेर रोड पर ढांढणिया गांव की सरहद में दो दिन पूर्व हुए एक सड़क हादसे में युवा व्यवसायी की मौत हो गई थी। इस मामले में मृतक के पिता राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ने भारतमाला प्रोजेक्ट के अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही बरतने का मामला दर्ज कराया है। अमूमन इस तरह के मामले सामने नहीं आते है। उन्होंने जिन धाराओं में मामला दर्ज कराया है उनमें तीन माह से दो साल तक की सजा का प्रावधान है।

जोधपुर के युवा व्यवसायी रजनीश गुप्ता दो दिन पूर्व जैसलमेर से जोधपुर लौट रहे थे। जोधपुर से चालीस किलोमीटर पहले ढांडणिया गांव की सरहद पर उनकी कार एक खतरनाक मोड़ पर पलटी खा गई। इस हादसे में रजनीश की मौत हो गई। जबकि कार में उनके साथ सवार एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। इस मामले में मृतक के पिता राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एनपी गुप्ता ने मामला दर्ज कराया है।

बालेसर थाने में दर्ज मामले में कहा गया है कि क्षेत्र में भारत माला प्रोजेक्ट की तरफ से सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के अधिकारियों ने लापरवाही बरतते हुए न तो हादसा स्थल पर न ही अन्य स्थान पर निर्माण कार्य जारी रहने की चेतावनी देते हुए बोर्ड लगवाए। वहीं खतरनाक मोड़ पर भी चेतावनी देने वाला ऐसा कोई बोर्ड तक नहीं लगवाया। प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों की लापरवाही की वजह से मेरे पुत्र की कार पलट गई। जिस कारण उसकी मौत हो गई। उन्होंने भारतीय दंड संहिता की धारा 336, 337 व 304 ए के तहत मामला दर्ज कराया है।

इन धाराओं में यह है सजा का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 336 के अनुसार, जो कोई भी उतावलेपन या उपेक्षापूर्वक ऐसा कोई कार्य करे, जिससे मानव जीवन या किसी की व्यक्तिगत सुरक्षा को ख़तरा हो, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे तीन महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्थिक दण्ड जो ढ़ाई सौ रुपए तक हो सकता है, या दोनों से दण्डित किया जाएगा। यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह समझौता करने योग्य नहीं है।

धारा 337

किसी व्यक्ति को उपहति कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

धारा 304 ए

उपेक्षा द्वारा मृत्यु कारित करना-जो कोई उतावलेपन के या उपेक्षापूर्ण किसी ऐसे कार्य से किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करेगा, जो आपराधिक मानववध की कोटि में नहीं आता, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

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