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भरतपुर, अलवर का एरिया कम होगा NCR से:एनसीआरपीबी की बैठक में ड्राफ्ट प्लान मंजूर, जियोग्राफिकल साइज 100 किलोमीटर के दायरे तक किया सीमित

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: दिनेश पालीवाल
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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शामिल राजस्थान के दो जिले अलवर, भरतपुर का एरिया आने वाले समय में बहुत कम हो जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) ने एनसीआर का जियोग्राफिकल साइज घटाकर 100 किलोमीटर के दायरे तक सीमित करने का निर्णय किया है। बोर्ड के इस निर्णय पर राजनीति भी शुरू हो गई है।

दरअसल पिछले दिनों एनसीआरपीबी की बैठक हुई, जिसमें ड्राफ्ट रीजनल प्लान-2041 को मंजूरी दी है। इसमें NCR के परिसीमन को लेकर सहमति बनी है कि इसका भौगोलिक आकार 100 किलोमीटर के दायरे का गोलाकार क्षेत्र होना चाहिए। फिलहाल NCR 150-175 किलोमीटर तक फैला हुआ है। इसमें कई जिले और उनके ग्रामीण हिस्से भी आते हैं।

13 हजार वर्ग किलोमीटर से ज्यादा का एरिया आता है
राजस्थान के अलवर, भरतपुर दोनों जिलों का अभी 13,447 वर्ग किलोमीटर का एरिया एनसीआर में आता है। अगर नया नियम लागू होता है तो अलवर, भरतपुर का जो वर्तमान एरिया आ रहा है, वह 50 फीसदी तक कम हो सकता है। NCR में अभी 5 राज्यों के 14 जिले शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा जिले हरियाणा के हैं। इन्हें NCR से बाहर करने की मांग हरियाणा ने ही प्रमुखता से उठाई थी।

राजस्थान के दो जिले अलवर, भरतपुर का एरिया आने वाले समय में बहुत कम हो जाएगा
राजस्थान के दो जिले अलवर, भरतपुर का एरिया आने वाले समय में बहुत कम हो जाएगा

ये होगा नुकसान
दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्र में बढ़ती औद्योगिक इकाइयों, जनसंख्या का डिसेंट्रलाइज (विकेन्द्रीकरण) करने के लिए एनसीआर क्षेत्र बनाकर इसका दायरा बढ़ाया था। एनसीआर एरिया में बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे पानी, बिजली, सीवरेज, ड्रेनेज के अलावा एजुकेशन, मेडिकल और रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए एनसीआरपीबी राज्यों को बहुत सस्ती दरों पर और लॉन्ग पीरियड के लिए लोन उपलब्ध करवाती है। इस लोन की दर सबसे कम होती है। इसके अलावा केन्द्र सरकार की ओर से एनसीआर क्षेत्र के लिए कोई योजना या बजट घोषित किया जाता है तो उसकी पैसा भी राज्यों को मिलता है।

हरियाणा सरकार के कहने पर ये किया: धारीवाल
नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल का आरेाप है कि केन्द्र सरकार ने हरियाणा सरकार के इशारे पर यह निर्णय किया है, ताकि हरियाणा सरकार के जिलों काे ज्यादा से ज्यादा फायदा हो सके। वर्तमान में हरियाणा के 13 जिले और उत्तर प्रदेश के 8 जिले इसमें शामिल है। धारीवाल ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे का विरोध भी किया था। अगली बैठक में फिर से इस मुद्दे पर केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय से बात करेंगे।

भरतपुर से अब तक एक भी प्रोजेक्ट नहीं
भरतपुर को साल 2013 में एनसीआर में शामिल किया गया था। तब से लेकर अब तक भरतपुर से एक भी प्रोजेक्ट तैयार करके एनसीआर बोर्ड में नहीं भेजा गया। इस मामले में धारीवाल ने कहा कि हम भरतपुर के लिए 2-3 प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। अगले कुछ महीनों में ये प्लान तैयार हो जाएंगे, जिन्हें बोर्ड में रखा जाएगा।

वहीं इस मामले में पूर्व चीफ टाउन प्लानर राजस्थान एच.एस. संचेती का कहना है कि एनसीआर एरिया का विस्तार करने का मुख्य कारण ही दिल्ली और उसके आस-पास के एरिया से जनसंख्या घनत्व को कम करना है। दिल्ली में पॉपुलेशन ज्यादा होने के कारण ट्रैफिक जाम, पॉल्यूशन जैसी बड़ी समस्या आ रही है। इसके अलावा नेचुरल रिसोर्स भी अब वहां सीमित हो रहे हैं। इसी कारण एनसीआर का दायरा 150 से 200 किलोमीटर तक बढ़ाने का निर्णय हुआ था। अब 100 किलोमीटर का दायरा करने से बोर्ड की वर्किंग शैली पर सवाल उठ रहे हैं।

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