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रवींद्र मंच पर बेफिक्री के रंग:विवादों का पगला घोड़ा; मंच पर बीड़ी फूंकी, दर्शक बोले- कैरेक्टर के लिए यह जरूरी था क्या

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: सुनील शर्मा
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बादल सरकार लिखित नाटक, निर्देशन साबिर खान ने किया। प्रस्तुति सार्थक थियेटर ग्रुप की थी। कलाकार- कार्तिक (आरिफ खान), सातू (महिपाल सिंह राजावत), शशि (पंकज चौहान), हिमाद्री (भूपेंद्र सिंह), लड़की (यूथिका अग्रवाल बक्शी)। - Money Bhaskar
बादल सरकार लिखित नाटक, निर्देशन साबिर खान ने किया। प्रस्तुति सार्थक थियेटर ग्रुप की थी। कलाकार- कार्तिक (आरिफ खान), सातू (महिपाल सिंह राजावत), शशि (पंकज चौहान), हिमाद्री (भूपेंद्र सिंह), लड़की (यूथिका अग्रवाल बक्शी)।

रवींद्र मंच के स्टूडियो थिएटर में सोमवार को बांग्ला नाटक ‘पगला घोड़ा’ के हिन्दी रूपांतरण के मंचन के दौरान कुछ दृश्यों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मंच पर ताश खेलते कलाकारों को बीच-बीच में ड्रिंक करते और असली बीड़ी पीते दिखाया गया। इस दौरान कोई संवैधानिक चेतावनी भी जारी नहीं की गई। इस पर ऑडियंस ने आपत्ति जताई। अनलॉक-2 के बाद रवींद्र मंच पर यह दूसरा मौका है, जब नाटक में बिना चेतावनी के कलाकार मंच पर धूम्रपान करते नजर आए।

मंचन धुंधली रोशनी के बीच हुआ। शुरुआत श्मशान के दृश्य से हुई। इसमें साउंड के माध्यम से लाश जलने का आभास कराया गया। नाटक में लाइट जलते ही चार पुरुष चरित्र कार्तिक (कंपाउंडर), शशि (पोस्ट मास्टर), हिमाद्री (शिक्षक) और सातू (पंडित) मंच पर दिखते हैं। वे एक लड़की का अंतिम संस्कार करने श्मशान घाट पहुंचते हैं। सभी मंच पर ताश खेलते हुए और बीच-बीच में बीड़ी पीते, ड्रिंक करते दिखाए देते हैं। इस बीच वह लड़की पहुंचती है, जिसकी लाश जल रही है।

एक-एक कर सभी से उनकी प्रेम कहानी पूछती है। सभी शराब पीते हैं और नशे में एक-एक कर अपनी प्रेम कहानी बयां करते हैं। सभी प्रेम में व्यर्थ हैं और उनकी वजह से उनकी प्रेमिकाओं को जान देनी पड़ती है। उन्हें सभी आदर्शवादी कहते हैं, लेकिन उनके भी प्रेम में महिला को प्रताड़ित करने की बात उभरती है। ‘पगला घोड़ा’ यहां ‘पुरुष के प्रति स्त्री के प्रेम भाव’ का द्योतक है, जिसकी लगाम स्त्री के हाथ में नहीं बल्कि पुरुष के हाथ में हुआ करती है। जो उसे रौंद कर आगे बढ़ जाता है।

बंगला बाल-कविता...

आम का पत्ता जोड़ा-जोड़ा,
मारा चाबुक दौड़ा घोड़ा।
छोड़ रास्ता खड़ी हो बीबी,
आता है यह ‘पगला घोड़ा’।
(चिता पर जलती लड़की की आत्मा इस कविता का प्रयोग करती और स्त्री को ‘प्रेम-ज्वार’ यानि पगले घोड़े के रास्ते में न आने की चेतावनी देती प्रतीत होती है)

थिएटर मतलब रियलिटी। बीड़ी असली थी लेकिन ड्रिंक चाय के पानी से बनी थी। फिल्म की तरह प्ले में बार-बार चेतावनी नहीं दे सकते। -साबिर खान, निर्देशक

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