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एसएमएस में बची जान:19 साल के युवक का हार्ट तीन गुना फूला था, 30 फीसदी ही काम रहा था,ऑपरेशन के बाद मरीज स्वस्थ

जयपुरएक महीने पहले
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हार्ट तीन गुना फूल कर फुटबॉलनुमा हो गया था, जिससे मरीज की सांसें भी फुल रही थी। - Money Bhaskar
हार्ट तीन गुना फूल कर फुटबॉलनुमा हो गया था, जिससे मरीज की सांसें भी फुल रही थी।
  • 19 साल के नाइजीरियन मरीज काे बिना हड्डी काटे हार्ट वॉल्व बदलकर दी नई जिंदगी

हार्ट के मरीज के छोटे चीरे से छाती की बिना हड्डी काटे और पांव में बिना चीरा लगाए बाइपास सर्जरी करने के बाद एसएमएस अस्पताल के डॉक्टरों ने एक ओर कदम आगे बढ़ाया है। अस्पताल के कार्डिक थोरोसिक विभाग के चिकित्सकों ने कार्डिक थोरोसिक विभाग के पूर्व एचओडी डॉ अनिल शर्मा के नेतृत्व में एक नाइजीरियन मरीज का हृदय के वॉल्व का ऑपरेशन कर उसे नई जिन्दगी दी है।

इसमें अच्छी बात यह है कि बिना हड्डी काटे मरीज का ऑपरेशन किया गया है, जिसके चलते ऑपरेशन के दूसरे दिन ही मरीज चलने फिरने लगा है। चिकित्सकों के मुताबिक नाईजीरिया के गोम्बी के 19 साल अब्दुल्ला का हार्ट महज 30 फीसदी काम कर रहा था। इसके अलावा उसका हार्ट तीन गुना फूल कर फुटबॉलनुमा हो गया था, जिससे मरीज की सांसें भी फुल रही थी।

मरीज ने पहले दिल्ली के अस्पतालों में दिखाया जहां जान के खतरे के साथ इलाज का खर्चा 8 से 10 लाख रुपए बताया गया। जिसके बाद मरीज एम्बेसी के जरिए एसएमएस अस्पताल लाया गया। एसएमएस अस्पताल में पहले मरीज की सभी जांच की गई और जांच में पाया कि मरीज को सीवीयर माइट्रल रीगर्जीटेशन और ट्राइकसपिड वाल्व में भी मोडरेट रीगर्जीटेशन था।

ऐसे में मरीज के लिए माइट्रल वॉल्व रिप्लेसमेंट का प्लान किया गया और साथ ही बिना हड्डी काटे छोटे चीरे द्वारा मरीज का ऑपरेशन किया गया। मरीज अब्दुल्ला अभी लैब टेक्नीशियन की पढाई कर रहा है। मां भी डॉक्टर है। ऑपरेशन के बाद अब्दुल्ला पूरी तरह से स्वस्थ्य है और चलने फिरने भी लग गया है। नित नए चिकित्सकीय कीर्तिमानों के चलते अब एसएमएस अस्पताल में अब सात समुंदर पार से भी मरीज ट्रीटमेंट के लिए आने लगे हैं।

अच्छा वॉल्व डाला है, मरीज खेलकूद भी सकेगा
मरीज को दुनिया का सबसे अच्छा वॉल्व डाला है। आने वाले दिनों में मरीज खेलकूद भी आसानी से कर पाएगा। इस तरह के केस से राजस्थान में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
-डॉ.अनिल शर्मा, कार्डिक थोरोसिक विभाग के पूर्व एचओडी

हार्ट बड़ा होकर फुटबॉलनुमा हो गया था इसके बाद भी डॉक्टरों ने किया सफल ऑपरेशन
डॉक्टरों ने बताया कि मरीज को करीब छह माह से सांस फूलने की बीमारी थी। जांच में पता चला कि मरीज का हार्ट सिर्फ 30 फीसदी ही काम कर रहा है। इसके साथ ही मरीज को सीवीयर माइट्रल रीगर्जीटेशन की बीमारी ट्रेस की गई। मरीज के ट्राइकसपिड वाल्व में भी मोडरेट रीगर्जीटेशन मिला।

गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मरीज का हार्ट बड़ा होकर फुटबॉलनुमा हो चुका था। उसका END SYSTOLIC VOLUME करीब 180 के आसपास था, जिसके चलते वो काफी गंभीर हालात में पहुंच चुका था।

मरीज की ऐसे बचाई जान : जांच के दौरान मरीज की बीमारी की गंभीरता को देखते हुए माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट का प्लान किया गया। चिकित्सकों की टीम ने बिना हड्डी काटे छोटे चीरे से मरीज का ऑपरेशन किया। बगैर हड्डी काटे ऑपरेशन के चलते मरीज दूसरे दिन ही पूरी तरह स्वस्थ हो गया है, चिकित्सकों के मुताबिक उसे एक-दो दिन में अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। वॉल्व का ऑपरेशन करने में कार्डिक थोरोसिक विभाग के पूर्व एचओडी डॉ.अनिल शर्मा के निर्देशन में डॉ.सुनील दीक्षित, डॉ.मोहित शर्मा, डॉ.सौरभ मित्तल, डॉ.जमना राम, डॉ.जील, डॉ.अंजुम का सहयोग रहा।

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