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ब्लड बैंकों पर कोई कंट्रोल नहीं:44 प्राइवेट ब्लड बैंकों से हर साल एकत्र होने वाले एक लाख यूनिट ब्लड पर नहीं सोसायटी का कंट्रोल

जयपुरएक महीने पहले
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ब्लड बैंक वाले न तो सोसायटी को कैंप की सूचना दे रहे हैं और न ही ब्लड यूज होने की जानकारी। बैंक मनमर्जी से कैंप लगाते हैं। लोगों का ब्लड लेते हैं। - Money Bhaskar
ब्लड बैंक वाले न तो सोसायटी को कैंप की सूचना दे रहे हैं और न ही ब्लड यूज होने की जानकारी। बैंक मनमर्जी से कैंप लगाते हैं। लोगों का ब्लड लेते हैं।
  • ब्लड बैंकों पर कंट्रोल करने वाली राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी बे-कंट्रोल

प्रदेश में ब्लड बैंकों को कंट्रोल करने के लिए सरकार ने राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी बना रखी है। ताकि डोनेट होने वाले ब्लड पर कंट्रोल रहे, लेकिन हो रहा है उल्टा। सोसायटी का ब्लड बैंकों पर कोई कंट्रोल नहीं है। ब्लड बैंक वाले न तो सोसायटी को कैंप की सूचना दे रहे हैं और न ही ब्लड यूज होने की जानकारी। बैंक मनमर्जी से कैंप लगाते हैं। लोगों का ब्लड लेते हैं।

मोटे दाम में मरीजों को बेच रहे हैं। ब्लड बैंकों ने सेवा की अपेक्षा ब्लड बेचने काे बिजनेस बना लिया है। कैंपों में आने वाला ब्लड किसे चढ़ रहा है, किसे नहीं। ये सब जानकारी सोसायटी के पास होनी चाहिए, लेकिन सोसायटी के पास कोई जानकारी नहीं है।

राजधानी में कुल 53 ब्लड बैंक है। इसमें से 44 प्राइवेट और 9 सरकारी हैं। 44 प्राइवेट ब्लड बैंकों के माध्यम से करीब 1 लाख ब्लड यूनिट एकत्रित किया जाता है, लेकिन इसका लेखा-जोखा सोसायटी के पास नहीं है।

ये हैं नियम : नियमों के तहत ब्लड डोनेशन कैंप लगाने वाली संस्था और ब्लड बैंक को राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी और सीएमएचओ को सूचना देनी होती है। सूचना के बाद स्वीकृति लेनी होती है। स्वीकृति के बाद ही कैंप का आयोजन कर सकते हैं। सोसायटी के अफसरों को कैंप का निरीक्षण करना होता है। कैंप लगाने वाली संस्था और बैंक को डोनेट होने ब्लड की सूचना हर महीने सोसायटी को देनी चाहिए।

हो ये रहा है : ब्लड बैंक और संस्था बिना सूचना के मनमर्जी से कैंपों का आयोजन कर रहे हैं। सोसायटी को डोनेट होने वाले ब्लड और यूज होने की सूचना भी नहीं देते। एकत्रित होने वाले ब्लड को 1200 रुपए प्रति यूनिट दूसरे बैंकों की बेच सकते हैं, लेकिन मरीजों को 5 हजार रुपए यूनिट में ब्लड बेच रहे हैं।

प्रदेश की आबादी 8 करोड़, हर साल 8 लाख यूनिट खून की जरूरत
प्रदेश की आबादी करीब 8 करोड़ है। एक प्रतिशत लोगों को हर साल ब्लड की जरूरत होती है। इस हिसाब से हर साल 8 लाख यूनिट ब्लड की जरूरत होती है। राजधानी को 2.50 लाख यूनिट ब्लड की जरूरत होती है। 2.50 लाख में से 1.50 ब्लड तो सरकारी ब्लड बैंकों से आ रहा है।

कैंप लगाने के लिए संस्था और ब्लड बैंकों को सोसायटी और सीएमएचओ से परमिशन लेनी होती है, लेकिन कोई भी ब्लड बैंक आवेदन ही नहीं करता। इतना ही नहीं ब्लड की सूचना भी नहीं देते हैं। समय-समय पर कार्रवाई के लिए पत्र जारी करते हैं, लेकिन कोई जवाब ही नहीं देता।
- डॉ मनमोहन मित्तल, असिस्टेंट डायरेक्टर, राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी

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