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स्काउट चुनावों में डोटासरा-आर्य निर्विरोध जीते:शिक्षा मंत्री डोटासरा अध्यक्ष, तो सीएस निरंजन आर्य स्टेट चीफ कमिश्नर बने, डोटासरा के पास अब तीन पद

जयपुरएक महीने पहले
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सीएस निरंजन आर्य और गोविंद सिंह डोटासरा (फाइल फोटो) - Money Bhaskar
सीएस निरंजन आर्य और गोविंद सिंह डोटासरा (फाइल फोटो)

स्काउट गाइड चुनाव में नाम वापसी के आखिरी दिन सोमवार को समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। सामने से उम्मीदवारों के नाम वापस लेने के बाद शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा स्काउट गाइड के निर्विरोध अध्यक्ष बन गए हैं। मुख्य सचिव निरंजन आर्य स्काउट गाइड के निर्विरोध स्टेट चीफ कमिश्नर चुने गए हैं। स्टेट चीफ कमिश्नर के पद पर मुख्य सचिव निरंजन आर्य के सामने रिटायर्ड आईएएस जेसी महांति और एक अन्य उम्मीदवार अशोक पाटनी ने नामांकन भरा था। आज 4 बजे से पहले जेसी महांति और अशोक पाटनी ने नाम वापस ले लिया। नाम वापसी के बाद स्टेट चीफ कमिश्नर के पद पर निरंजन आर्य निर्विरोध जीत गए।

स्काउट गाइड के राजस्थान के अध्यक्ष के पद पर होने वाले चुनाव में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के सामने अध्यक्ष पद पर भूपेंद्र सिंह ने नाम वापस ले लिया। इसके बाद डोटासरा निर्विरोध अध्यक्ष पद पर जीत गए। पहले पूर्व मंत्री अरुण चतुर्वेदी स्काउट गाइड के अध्यक्ष थे। डोटासरा के पास अब तीसरा पद भी आ गया है। शिक्षा मंत्री और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के साथ डोटासरा अब स्काउट गाइड के प्रदेशाध्यक्ष भी होंगे।
ली थी कार्मिक विभाग की मंजूरी
मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने स्काउट गाइड के स्टेट चीफ कमिश्नर का चुनाव लड़ने से पहले 12 अक्टूबर को कार्मिक विभाग से अनुमति मांगी थी। कार्मिक विभाग ने 13 अक्टूबर को इसकी अनुमति दे दी। सेवा नियमों के अनुसार ऐसा करना जरूरी था। निरंजन आर्य पहले भी इस पद पर रह चुके हैं।

जनवरी में रिटायरमेंट
मुख्य सचिव निरंजन आर्य को सरकार से एक्सटेंशन नहीं मिलता है तो तीन महीने बाद जनवरी में रिटायर हो जाएंगे। रिटायरमेंट से तीन महीने पहले आर्य स्काउट गाइड के चीफ क​मिश्नर बन गए हैं। स्काउट गाइड के स्टेट चीफ कमिश्नर के पद पर उनका कार्यकाल 5 साल रहेगा। निरंजन आर्य इससे पहले भी चीफ कमिश्नर रह चुके हैं। निवर्तमान स्टेट चीफ कमिश्नर जेसी महांति ने कहा- स्काउट गाइड के चुनावों में हमेशा अच्छे माहौल में सर्वसम्मति बनाने की परंपरा रही है। स्काउट गाइड हित में मैंने सर्वसम्मति बनाने के लिए नाम वापस लिया है, यही स्काउटिंग की मूल भावना है। हम सबका उद्देश्य स्काउटिंग का हित है।

स्टेट एसोसिएशन के चुनाव इसलिए होते हैं अहम
स्काउट-गाइड संगठन का प्रदेश के हर सरकारी स्कूल में विंग है। स्कूली बच्चों की स्काउटिंग की टीम होती है। इस टीम में हर स्कूल में दो शिक्षक स्काउट मास्टर के तौर पर होते हैं। इसके बाद ​लोकल, जिला, संभाग और प्रदेश स्तर तक अलग अलग पदाधिकारी होते हैं। इनमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के पदों पर चुनाव होते हैं। स्टेट एसोसिएशन के चुनाव सबसे ज्यादा अहम होते हैं। स्टेट एसोसिएशन में अध्यक्ष, 8 उपाध्यक्ष और स्टेट चीफ कमिश्नर के चुनाव होते हैं। स्टेट चीफ कमिश्नर ज्यादातर आईएएस अफसर ही बनते आए हैं। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों पर नेता और समाजसेवी, शिक्षाविद चुनाव लड़ते हैं। कमिश्नर पदों पर ज्यादातर आईएएस अफसर होते हैं। स्काउट गाइड चुनावों में सत्ताधारी पार्टी के नेता और चहेते आईएएस अफसरों का ही दबदबा रहता आया है। इन चुनावों के लिए खूब लॉबिंग चलती है।

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