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डेंगू का खतरनाक डंक:पिछले पूरे साल 1331 मरीज थे, अब एक माह में 6797 डेंगू रोगी; 33 में से 30 जिलों में उभरी बीमारी

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: डूंगरसिंह राजपुरोहित
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फोटो जयपुरिया अस्पताल में शाम 6 बजे रिपोर्ट लेने के लिए लगी कतार की। (फोटो -महेंद्र शर्मा) - Money Bhaskar
फोटो जयपुरिया अस्पताल में शाम 6 बजे रिपोर्ट लेने के लिए लगी कतार की। (फोटो -महेंद्र शर्मा)

प्रदेश में कोराेना कम हुआ ही था कि अब डेंगू ने 70 साल में सबसे खतरनाक रूप अख्तियार कर लिया है। एक महीने में ही प्रदेश के 33 में से 30 जिलों में 6797 रोगी हो गए हैं, जबकि 100 मौतें हो चुकी हैं। हालांकि विभाग 10 ही मौतें बता रहा है। पिछले साल डेंगू के पूरे साल 1331 रोगी मिले थे, लेकिन इस बार एक महीने में ही रिकॉर्डताेड़ मरीज मिले हैं।

यानी डेंगू पिछले साल से 510% अधिक रोगी मिले हैं। अकेले जयपुर में ही 1411 से अधिक डेंगू रोगी मिल चुके हैं। जयपुर और कोटा के जेके लोन जैसे अस्पताल में एक बेड पर 3-3 मरीजों को भर्ती हैं। बांसवाड़ा, सिरोही और जालोर ही ऐसे जिले हैं, जहां अब तक डेंगू का कोई मरीज नहीं मिला है।

डेंगू जैसे जैसे पैर पसार रहा है, अस्पतालों में जांच के लिए कतारें भी पसर रही हैं। कई घंटे लाइन में लगने के बाद नंबर आ रहा है। प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में ऐसे ही हाल हैं। कई जगह तो डेंगू जांच की किट भी कम पड़ रही हैं।

गुजरात का प्रभारी बनने के बाद से स्वास्थ्य मंत्री टूर पर

चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा को गुजरात कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने के बाद से वह 2 दिल्ली दौरे, एक गुजरात दौरा, अजमेर के केकड़ी आदि दौरे कर चुके हैं। डेंगू के प्रकोप के बावजूद वह बाहर हैं। मंत्री का कहना है कि हमने पहले भी विभाग को कहा था कि एंटी लार्वा एक्टिविटी बढ़ाओ। सरकार के डेंगू के आंकड़े सही हैं।

विभाग कार्यवाहक अफसर के भरोसे

चिकित्सा-स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा दोनों का जिम्मा अभी एक आईएएस अफसर के पास है। कोरोना के बाद डेंगू जानलेवा बन चुका है, लेकिन विभाग में सीनियर आईएएस एक भी नहीं हैै। चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव को ही पूरे स्वास्थ्य का भी कार्यभार दे रखा है। विभाग के मंत्री पर आरोप है कि ऐसी रिश्तेदारी निभाने की क्या बाध्यता है कि पूरे हैल्थ तंत्र को ही ढीला छोड़ दिया?

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